फेहमिना हुसैन
बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कभी कहा था कि “जमीन बदलेगी और आसमां बदलेगा… किसे खबर थी यूं सारा जहां बदलेगा…” लेकिन ज़मीनी हकीक़त इन सबसे कहीं दूर है. बिहार सरकार की तमाम योजनाएं महज़ कागज़ी साबित हो रहे हैं…
कल्याण विभाग ने ‘बाबुल’ की भूमिका निभाते हुए लड़कियों की शादी तो करवाई मगर उन्हें ‘उपहार’ देना भूल गई. हक़ीक़त ये है कि राज्य सरकार ने इनके लिए कई योजनाओं की घोषणाएं की, जिनका लाभ अब तक उन्हें नहीं मिला.
सिर्फ मुज़फ्फरपूर में 2009 से अब तक विभाग ने कुल 54 अनाथ लड़कियों के हाथ पीले कराएं, लेकिन वह उपहार (अनुदान) देना भूल गया, जो उनकी ज़िन्दगी का सहारा बन सकती थी. इन लड़कियों को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 5 हज़ार रूपये, मुख्यमंत्री संवासिन कन्या विवाह योजना के तहत 21 हज़ार व इंदिरा आवास मिलना था. मगर इन्हें कुछ भी नहीं मिला. कुछ को सिर्फ 5 हज़ार रूपये मिल गए, बाकी लाभ के लिए ये सभी चक्कर लगा रही हैं.
मुशहरी की साची हो या फिर पटना की सोनी, कई ऐसे जोड़े हैं जिन्हें मुख्यमंत्री संवासिन कन्या विवाह योजना का लाभ नहीं मिला और न ही इंदिरा आवास ही मिल पाया.
राज्य के दूसरे हिस्सों की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. सारण ज़िला के गड़खा प्रखंड में राशि के अभाव के कारण मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना पूरी तरह से फ्लाप कर गयी है. जिसके फलस्वरूप इस योजना का लाभ इस प्रखंड के लोगों को नहीं मिल पायी है, जिससे उनके चेहरे पर उदासी देखी जा रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 23 पंचायतों से इस योजना का लाभ लेने के लिए पांच सौ से अधिक लोगों ने आवेदन किया. कई विवाहित बेटियां अपनी ससुराल से इसका लाभ लेने के लिए अपनी मायके में आयीं. अपने परिजनों के साथ प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते थक गयीं, लेकिन अब तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया. अंतत: इस योजना का मोह-माया छोड़कर कई कन्याएं अपनी ससुराल भी चली गयीं. इस संदर्भ में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी रामईश्वर प्रसाद का कहना है कि इस योजना के अंतर्गत 500 से अधिक आवेदन प्रखंड कार्यालय में जमा हैं, लेकिन योजना की राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान बाधित है. राशि उपलब्ध होते ही भुगतान कर दिया जाएगा.
गोपालगंज जिले में भी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना दम तोड़ रही है. मुखिया और बीडीओ साहब की सुस्ती गरीबों पर भारी पड़ रही है. कन्या विवाह योजना की राशि प्रखंड कार्यालयों में रहने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया. यह हाल पूरे बिहार का है. इस योजना में घोटाले की कहानी भी काफी दिलचस्प है.
क्या है योजना?
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे रहनेवाले परिवार या फिर वे परिवार जिनकी सालाना आय 60 हजार रुपए से कम है उन्हें लड़की की शादी के समय उसकी शादी की तस्वीर के आधार पर पंचायत से पांच हजार रुपये के चेक द्वारा उनको राशि देनी है. इस योजना का उद्देश्य था कि गरीब बच्चियों की शादी में गरीबों को कोई समस्या नहीं आए. इसके अलावा मुख्यमंत्री कन्या संवासिन विवाह अनुदान योजना के तहत अनाथ लड़कियों को शादी के समय 21 हजार रुपए दिए जाएंगे और साथ ही अगर वो बीपीएल कार्ड धारक है तो उसे इंदिरा आवास का लाभ भी मिलेगा.
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