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मुसलमानों के साथ हो रहे भेद-भाव के खिलाफ दिल्ली से लेकर पटना तक आंदोलन: पासवान

बीएच न्यूज़ डेस्क

‘संघ परिवार द्वारा मुसलमानों को आतंकवादी कह कर उनके खिलाफ किए जा रहे कुप्रचारों को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे पूरे देश का माहौल बिगड़ता जा रहा है और सांप्रदायिक ताकतें बेरोक-टोक फल फूल रही हैं. जिस तरह बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों और छात्रों को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार करके उन्हें तरह-तरह से प्रताडि़त किया जा रहा है, वह हमारे देश के लिए एक ख़तरे की एक बड़ी घंटी है. मुसलमानों में असुरक्षा की जो भावना पैदा हो रही है उसके लिए पुलिस विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है और उसकी गतिविधियों से सांप्रदायिकता की बू आने लगी है’.

ये बातें लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद राम विलास पासवान ने एक प्रेस कांफ्रेस के दौरान कहीं. आगे पासवान ने किसी एक समुदाय के साथ इस तरह का भेद-भाव तथा उसे अपने स्वार्थों के लिए निशाना बनाये जाने की कड़े शब्दों में भर्त्सना की. इस अवसर पर प्रेस के समक्ष ऐसे कई भुक्तभोगी परिवारों को भी पेश किया और अपने निम्न मांगों को सरकार के समक्ष रखा.

1.     न्यायिक हिरासत में मारे गए बिहार के दरभंगा निवासी कतील सिद्दिकी के मामले का उल्लेख करते हुए पासवान ने कहा कि 27 साल के इस युवक को पिेछले साल नवम्बर में विशेष सेल द्वारा गिरफ्तार किया गया था और उसे इंडियन मुजाहिदीन से संबंधित बताते हुए पूणे के यरवदा सेन्ट्रल जेल में बंद किया गया था. लोक जनशक्ति पार्टी के नेता ने इस मामले की जाँच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से कराने की मांग करते हुए 25 लाख रूपया मुआवजा देने की भी मांग की है.

2.     दरभंगा जिले के ही मेकेनिकल इंजीनियर फसीह मोहम्मद को सउदी अरब पुलिस ने 13 मई 2012 को उनके निवास जुबेल से गिरफ्तार किया गया लेकिन आज तक उनके बारे में उनकी पत्नी और उनके परिवार को विदेश मंत्रालय द्वारा कोई भी सूचना नहीं दी गई, जो कि बहुत ही चिंता का विषय है. पासवान ने इस मामले को लेकर शीघ्र ही विदेश मंत्री से मुलाकात करेंगे.

3.     इसी तरह 18 वर्षीय आमीर खान का मामला सामने आया है, जो स्कूली छात्र था और उसे पुलिस ने दिल्ली में हुए बम विस्फोटों के सम्ंबध में गिरफ्तार कर लिया था और जेल उसे बुरी तरह से प्रताडि़त किया गया, लेकिन अंततः उस पर कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ और चार साल बाद वह जेल से छूटा. ऐसे मामले हमारी पुलिस व्यवस्था पर उंगली उठाने के लिए काफी है.

4.     पासवान ने बिहार के फारबिसगंज कांड की याद दिलाते हुए कहा कि पिछले साल 3 जून को जिस तरह से राज्य सरकार के ईसारे पर पुलिस ने बेगुनाह मुसलमानों की जघन्य हत्या की थी उसकी अभी तक जांच शुरू नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि बिहार और केन्द्र सरकार दोनों से तुरंत जांच शुरू कराने की मांग की है.

इस अवसर पर पासवान ने कहा कि यह कम ताज्जुब की बात नहीं है कि जिस तरह से लगातार मुसलमानों को अपराधी और उग्रवादी का नाम देकर उन्हें प्रताडि़त किया जा रहा है और जेलों में डाला जा रहा है, इस संबंध में एक एक बड़ा ही दिलचस्प रिपोर्ट टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ सोसल साइंसेस ने पेश किया है. उसके मुताविक महाराष्ट्र में 10.6 फीसदी आबादी वाले मुस्लिम समुदाय के 36 फीसदी लोग जेलों में हैं.

पासवान ने कहा है कि पश्चिम बंगाल के श्री डी. के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के निष्कर्षों की तर्ज पर भविष्य में जो भी गिरफ्तारी हो उसमें गिरफ्तार करने वाले पुलिस की वर्दी पर उसका नाम और पद लिखा होना चाहिए तथा गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के परिवार वालों से गिरफ्तारी के कागज पर हस्ताक्षर लिए जाए, यदि परिवार का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं है तो पड़ोसी से उसपर हस्ताक्षर कराया जाए. इसी तरह की अन्य शर्तों का भी पालन किया जाए.

पासवान ने मुसलमानों के साथ हो रहे इस भेद-भाव के खिलाफ दिल्ली से लेकर पटना तक आंदोलन चलाने की घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि बेगुनाह मुसलमानों को जब तक इंसाफ नहीं मिल जाएगा वह इस मामले पर किसी भी कीमत पर चुप नहीं बैठेंगे. उन्होंने कहा कि संसद के मौनसून सत्र में पार्टी की ओर से दिल्ली में प्रदर्शन और संसद का घेराव किया जाएगा. श्री पासवान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केन्द्र सरकार से राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक बुलाने की मांग की है, जिसमें मुसलमानों को जान बूझकर प्रताडि़त किए जाने के खिलाफ एक माकुल फैसला लिया जा सके.

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