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अबुल-फज़ल में शहज़ादी की लाश बरामद: आत्म-हत्या या हत्या…?

रागिब आसिम

नई दिल्ली: जामिया नगर के अबुल-फज़ल इन्क्लेव डी- ब्लॉक में 22 जुलाई को एक  नौकरानी (22) का शव संदिग्घ हालत में बरामद हुआ. स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पुलिस शव को कब्जे में लेकर पोस्ट-मार्टम के लिए भेज दिया. नौकरानी की पहचान शहजादी उर्फ शाजिया के रूप में हुई है.

प्राप्त सुचना अनुसार शहजादी पिछले 15 मई से अबुल-फज़ल इन्क्लेव डी- ब्लॉक फ्लैट नंबर 177, सेकेंड फ्लोर सैयद मोहम्मद अब्बास के यहां घरेलू नौकरानी के रूप में काम कर रही थी. सैयद मोहम्मद अब्बास के अनुसार 20 जुलाई को शहजादी उन लोगों के साथ उनके पैतृक घर लखनऊ भी गई थी, और जून में फिर अपने मालिकों के साथ दिल्ली लौट आई. मोहम्मद अब्बास के अनुसार 16 जुलाई को उनके फ्लैट में चोरी हुई जिसमें बड़ी मात्रा में आभूषण गायब बताए गए. मोहम्मद अब्बास ने चोरी का मामला स्थानीय थाना में दर्ज कराते हुए नौकरानी पर संदेह व्यक्त किया. जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कथित तौर पर शहज़ादी ने 17 जुलाई को अपने पुरुष मित्र के साथ चोरी की बात स्वीकार की. 16 और 17 जुलाई को शहज़ादी अब्बास घर रही और 18 जुलाई की सुबह नौकरानी कथित तौर पर गायब हो गई. अब्बास के अनुसार इसकी भी रिपोर्ट उन्होंने आई. ओ. ऋषि कुमार को दी.

18 जुलाई से लगातार गायब रहने के 4 दिन बाद 22 जुलाई को 4:50 मिनट पर शहजादी का मृत शरीर अब्बास के फ्लैट के बाजू में स्थित खाली पड़े एक प्लाट में पाया गया. जिसके बाद पुलिस ने आत्म-हत्या मानते हुए चन्दन कुमार के नेतृत्व में जांच शुरू कर दिया है.

उधर शहज़ादी की मां नुसरत का आरोप है कि उनकी लड़की निर्दोष थी. वह चोरी या आत्म-हत्या नहीं कर सकती. नुसरत ने आरोप लगाया कि उनकी लड़की की हत्या हुई है. इस हत्या के जिम्मेदार अब्बास और उनके घर वाले हैं. नुसरत ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में पुलिस दोषियों का साथ दे रही है. आगे उसने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस वाले उन्हें डरा-धमका रहे हैं. यही आरोप ओखला विहार में रहने वाली शहज़ादी की ख़ाला रिफअत ने भी लगाया है.

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि लड़की के साथ बलात्कार के बाद मौत के घाट उतार दिया गया. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है जिसके बाद ही तथ्य स्पष्ट हो पाएंगे.

दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं. आखिर 17 जुलाई को पुलिस ने अपराध स्वीकार करने के बाद नौकरानी तथा उसके कथित प्रेमी को हिरासत में क्यों नहीं लिया, जबकि अब्बास का कहना है कि हमने  अपना मुक़दमा वापस नहीं लिया था? आखिर 18 जुलाई को नाटकीय अंदाज में शहज़ादी के लापता होने और अब्बास के सूचना देने बाद भी ऋषि कुमार नामक आई. ओ. के किसी प्रकार क़ा कोई एक्शन नहीं लेने की क्या वजह थी? आखिर लाश बरामद होने के बाद बिना पोस्ट- मार्टम रिपोर्ट तथा बिना किसी जांच के पीड़ित परिवार के विरोध के बावजूद मामले को आत्महत्या का रंग देने की क्या वजह है? यह वह प्रश्न हैं जिनके सही जवाब का जनता को शिद्दत के साथ इंतजार है.

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