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कृषि मंत्रालय में ‘चाय-नाश्ता’ घोटाला…

अफ़रोज़ आलम साहिल

नई दिल्ली. क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो दो साल के भीतर 9 लाख 22 हजार रुपए का चाय-नाश्ता डकार जाए? नहीं जानते… कोई बात नहीं हम भी नहीं जानते. लेकिन हम बता सकते हैं कि वो व्यक्ति मिलेगा कहां… और ज़रूरी नहीं है कि वो अकेला हो… उसके साथ और लोग भी शामिल हो सकते हैं.

भले ही आपको हमारी बात पर यकीन नहीं हो रहा हो. लेकिन इस देश में ऐसा व्यक्ति मौजूद है, जो दो साल के भीतर ही 9 लाख 22 हजार रुपए का चाय-नाश्ता डकार सकता है. और यह व्यक्ति कोई आम आदमी नहीं है, यह तो हमारे शरद पवार जी के कृषि मंत्रालय का ही कोई कर्मचारी है.

अभी हाल ही में हमने केंद्रीय कृषि मंत्रालय के कृषि एवं सहकारिता विभाग के बारे में आरटीआई के ज़रिए मिली सूचना से खुलासा किया था कि इस विभाग के कर्मचारी रोजाना करीब साढ़े पांच लाख रुपए की चाय पी जाते हैं. यानि कि पिछले चार सालों में 78 लाख 54 हजार 526 रुपए कृषि एवं सहकारिता विभाग में चाय नाश्ते पर खर्च हुए. यदि कृषि एवं सहकारिता विभाग के कर्मचारियों का रोजाना साढ़े पांच हजार रुपए की चाय पीना आपको हज़म नहीं हो रहा है तो ज़रा अपने हाज़मे को थोड़ा दुरुस्त कीजिए क्योंकि BeyondHeadlines को आरटीआई के ज़रिए मिली सूचना से एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है.

साल 2010 में भी BeyondHeadlines ने कृषि मंत्रलाय में आरटीआई दायर करके चाय-नाश्ते पर होने वाले खर्च का हिसाब मांगा था. तब हमें साल 2005-06 से लेकर साल 2009-10 तक की जानकारी दी गई थी. कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा साल 2010 में BeyondHeadlines को आरटीआई के जवाब में दी गई जानकारी के मुताबिक साल 2008-09 में विभाग ने 22 लाख 875 रूपये और साल 2009-10 में 23 लाख 31 हज़ार 986 रुपए चाय-नाश्ते पर खर्च किए. जबकि 2012 में BeyondHeadlines की आरटीआई के जवाब में कृषि एवं सहकारिता विभाग ने बताया है कि साल 2008-09 में 19 लाख 28 हज़ार 526 रूपये और साल 2009-10 में 16 लाख 81 हज़ार 832 रुपए चाय नाश्ते पर खर्च हुए.

यानि एक ही विभाग द्वारा एक ही सवाल के जवाब में अलग-अलग सालों में अलग-अलग जानकारी आरटीआई के ज़रिए दी गई. दोनों वित्त वर्षों के दौरान कुल खर्च में 9 लाख 22 हजार 503 रुपए का अंतर है.

अब सवाल यह है कि कृषि एवं सहकारिता विभाग का कौन सा कर्मचारी दो सालों के भीतर चाय नाश्ते पर खर्च हुए 9 लाख 22 हजार रुपए डकार गया? यह सवाल तो चाय-नाश्ते पर होने वाले खर्च में घोटाले का है.

लेकिन सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस विभाग में चाय-नाश्ते पर होने वाले खर्चे में ही हेराफेरी हो रही है, तो उसकी सरकारी योजनाओं का क्या हाल होगा? 9 लाख 22 हजार रुपए का यह चाय खर्च घोटाला कृषि और सहकारिता विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक झलक भर है, जिसका खुलासा आरटीआई के एक सीधे से सवाल से हो गया है. यदि विभाग के खातों का सही से ऑडिट किया जाए तो न जाने किस-किस के पेट से क्या-क्या निकले? लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि जिस विभाग के मुखिया शरद पवार हों क्या उस विभाग में हुए घोटाले की जांच की बात भी कोई कर सकता है?

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