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देश को लूट रही हैं सबसे बड़ी दवा कंपनी

आशुतोष कुमार सिंह

सिप्रोफ्लाक्सासिन 500 एम.जी और टिनिडाजोल 600 एम.जी साल्ट से निर्मित दवा जिसे सिपला, सिपलॉक्स टी जेड के नाम से बेचती है. लूज मोसन की रामवाण दवा है. सरकार ने जिन 74 दवाइयों को कंट्रोल्ड प्राइस की श्रेणी में रखा है, उसमें एक यह भी है.

एन.पी.पी.ए (नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग ऑथरिटी) द्वारा 23 मार्च 2011 को जारी कंपेडियम ऑफ द प्राइसेस ऑफ शिड्यूल्ड ड्रग्स फिक्स्ड/रिवाइज्ड बाई एन.पी.पी.ए के सातवें एडिशन के पृष्ठ संख्या 70 के क्रम संख्या 166 में इस दवा की सरकारी सेलिंग प्राइस-25.70 पैसा प्रति 10 टैबलेट बतायी गयी है. जिसका विवरण गैजेट संख्या 2500 (ई) है, जिसका नोटिफिकेशन 11.10.2010 को निकाला गया था.

शर्म और लानत की बात यह है कि देश की सबसे बड़ी कंपनी का दावा करने वाली सिपला इस दवा को पूरे देश में 100 रूपये से ज्यादा में बेच रही हैं… यानी प्रत्येक 10 टैबलेट वह 75-80 रूपये ज्यादा उपभोक्ताओं से वसूल कर रही है. इस राष्ट्र को स्वस्थ बनाने का दावा करने वाले कहां हैं… है कोई जवाब…? आखिर सबके मुंह पर ताला क्यों लग गया है?

(लेखक प्रतिभा जननी सेवा संस्थान के नेशनल को-आर्डिनेटर व युवा पत्रकार हैं.)

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