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युवा अखिलेश की घुटनाटेक सोच!

तरुण वत्स

बसपा को हराकर उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से आई समाजवादी पार्टी अपने काम से कम गलत फैसलों से ज्यादा खबरों में बनी रहती है. अखिलेश यादव अपनी पार्टी को बहुमत दिलाने में तो कामयाब रहे हैं लेकिन जनता को लाभ देने के चक्कर में पार्टी की छवि को धूमिल करते नज़र आ रहे हैं.

जनता को फायदा देने के लिए उन्होने पार्क में जलने वाली बिजली को शाम के समय बंद करा दिया. फिर नोएडा और गाज़ियाबाद के मॉल और बड़ी दुकानों को भी शाम सात बजे ही बंद करने का फरमान सुना दिया. हालांकि 24 घंटों के भीतर ही सरकार को इन फैसलों को वापस लेना पड़ा.

अभी हाल ही में अखिलेश ने सूबे के विधायकों को एक गाड़ी का उपहार देने का फैसला सुनाया लेकिन इस उदार फैसले के चलते इतनी फज़ीहत झेलनी पड़ी कि एक बार फिर 24 घंटे के भीतर ही यह फैसला भी वापस लेना पड़ा. दरअसल यूपी सरकार ने ऐलान किया था कि विधायक निधि की रक़म का इस्तेमाल करते हुए यूपी विधायक 20 लाख रुपए तक की गाड़ी खरीद सकते हैं. सरकार ने अन्य पार्टियों के कड़े विरोध के बाद यह फैसला वापल से लिया है.

यूपी सरकार के इस फैसले की खासी आलोचना हो रही थी. सूबे के विधायकों ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि उन्हें फोकट की गाडी़ नहीं चाहिए. विधायकों को खुश करने की नीयत से एसपी सरकार की इस छूट का दांव खुद सरकार पर ही उल्टा पड़ गया. साथ ही बसपा, कांग्रेस और भाजपा ने भी अखिलेश सरकार को इस मसले पर आड़े हाथों लिया था.

खबरों की मानें तो खुद समाजवादी पार्टी के विधायक भी इस फैसले से खुश नहीं है, क्योंकि उन्हें भी पता है कि जनता नहीं चाहती है कि क्षेत्र के विकास के लिए मिलने वाली रक़म को विधायक अपने लिए खर्च करें.

फैसले का उल्टा असर पड़ते देख सरकार के ताकतवर मंत्री माने जाने वाले आज़म खान ने अपने मुख्यमंत्री का बचाव करते हुए कहा था कि यह फैसला उन ‘गरीब’ विधायकों के लिए था, जो कार की कमी के चलते अपने क्षेत्र के विकास का पूरी तरह निरीक्षण नहीं कर पाते हैं.

समाजवादी पार्टी जब सत्ता में आई थी तभी उत्तर प्रदेश की जनता ने कहा था कि अब गुंडाराज आ जाएगा. सूबे की जनता बसपा को हटाना चाहती थी लेकिन विकल्प न होने को कारण व युवा अखिलेश के वादों की वजह से सपा को समर्थन मिला. पार्टी के राज में आते ही नित नई खबरें सुनने को मिलीं जिससे यह पुख्ता होता था कि जनता का डर सही था.

युवा अखिलेश यदि जनता की मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान दें तो शायद पार्टी और जनता दोनों ही खुश रह सकेंगे. अखिलेश को रोज़गार, बिजली, पानी जैसी ज़रूरतों पर होती परेशानियों की तरफ ध्यानाकर्षण करने की आवश्यकता है न की फरमान जारी कर फजीहतें झेलने की. अखिलेश सरकार को उस जनता का ख्याल कर सोचना चाहिये जिसने पार्टी पर भरोसा किया, युवा अखिलेश के वादों पर विश्वास किया था. अखिलेश को चुनावी दौरों के दौरान जनता से किये वादों की और भी एक दृष्टि डालनी चाहिये. उन्हे समझना चाहिए कि मात्र जनता दरबार लगा लेने से ही समाधान नहीं हो जाता, क्षेत्र की समस्याओं की वजह को भी समझना होगा. सूबे की विकास दर को भी परखना होगा तभी युवाओं पर देश की कमान सौंपने का समना देखा जा सकता है.

(यह लेखक के अपने विचार हैं. BeyondHeadlines आपके विचार भी आमंत्रित करती है. अगर आप भी किसी विषय पर लिखना चाहते हैं तो हमें beyondheadlinesnews@gmail.comपर ईमेल कर सकते हैं.)

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