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लोटन  की ख़रीदारी

लोटन की ख़रीदारी

अभिनव उपाध्याय

“देखो मेरा कोई क्रिमिनल बैकराउंड नहीं है वरना मैं तुम्हे गोली मार देता और हां मेरा शाकाहारी होना भी इसमें रह रह कर बाधा डाल देता है. बम-बंदूक तो मेरे सपने में भी आए तो थोड़ा चिंहुक जाता हूं. लेकिन तुम्हारा यह न बताना कि दाल चावल व चीनी इतनी सस्ती कैसे मिल गई मुझको गुस्सा दिला रहा है, और आखिरी बार कह रहा हूं कि बता दो नहीं तो शायद मैं कोई हथियार चला दूं.”

उक्त बातें क्षणिक के बाद तीव्र गुस्सा करने वाले भूखन जी लोटन जी से कह रहे थे. लोटन कम दाम में सामान लेने का राज किसी को नहीं बताना चाह रहे थे. हालांकि वह खूब खरीदारी कर रहे थे. भूखन की समस्या में सब शामिल हो गए और गांव के कई लोगों ने उनसे विनम्र निवेदन करके पूछा कि लोटन चाहो तो मुफ्त में एक लोटा शरबत पी लो लेकिन इस मंहगाई में इतनी ख़रीदारी देखकर सब भौंचक्के हैं.

लाख कोशिश के बाद भी जब लोटन ने लोगों की बात नहीं सुनी तो एक गांव के एक युवा पत्रकार ने जूता निकाल लिया. पत्रकार के लिए इस बारे में पता लगाना कुछ खोजी पत्रकारिता करने जैसा था. क़लमकार के तीखे तेवर देखकर भूखन ने बीच में रोका, कहा बता लो लोटन तुम्हे पता नहीं जूता एक परिधान है लेकिन एक खूबसूरत और आरामदायक हथियार है, इसे बिना किसी सुरक्षा जांच के लिया जा सकता है और इसे चलाना तो  सदियों से आसान रहा है. और हां! क़लमकारों में आजकल इसका क्रेज कुछ ज्यादा है.

भूखन अभी समझा रहे थे कि लल्लन ने कहा बता दो नहीं तो मैं भी लोटा भर शरबत नहीं जूते के साथ पेश आऊंगा. लोटन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह ज़मीन पर लोटने लगा, लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें. किसी ने कहा कि हो सकता है इसे मिर्गी आ गई हो, इसे जूता सुंघाओ.

जूता सुंघाने के बाद भी लोटन जस का तस. इस पर पत्रकार जी बोले तो ख़बरनवीस अकड़ गए. उन्होने जोर देकर कहा कि जूतों की भाषा समझने वाले सीधी बात नहीं समझते, रुकिए मैं ट्राई करता हूं. बाद में सब आजमा लेना, लोटन आखिरी बार पूछ रहा हूं बता दो इतना राशन कहां से लाए. गांव में कितने दिनों से कोटे से कुछ नहीं मिल रहा है, और तुम्हारे यहाँ अनाज की बारिश हो रही है. बता दो मैं जूता चलाने में तेज़ हूं. अगर राष्ट्रमंडल खेल में जूता मारो प्रतियोगिता होती तो कोई पत्रकार ही स्वर्ण पदक पाता.

लोटन उठ कर बैठ गया, बोला तब से जूता-जूता सुन रहा हूं. अरे जूता खाने से कहीं पेट भरता है, प्रधान जी भी मुझे पकड़ कर यही कह रहे थे. वह कोटे का सारा राशन ब्लैक करते हैं. मुझे पता चल गया था. उन्होंने कहा कि अगर किसी को पता चला तो तेरी खाल का जूता बना दूंगा.  हां! ये दुकानदार आधे दम पर राशन दे देगा. बस भाई वहीं से राशन ला रहा हूं.

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