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नाबालिग का अपहरण और पुलिस का नाकारापन

नाबालिग का अपहरण और पुलिस का नाकारापन

दिनेश गौतम

मेवात: वैसे तो इंशा खान (बदला हुआ नाम) पिछले साल अक्टूबर से ही एस०पी० कोठी और सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर काट चुका है, लेकिन उसे नहीं पता था कि आज अपने जैसे ही और एक अभागा बाप एस०पी०  ऑफिस में उससे मिलेगा और उसके लिए एक उम्मीद की किरण लेकर आएगा.

‘बियोंड हेडलाइन्स’ वेबसाइट के माध्यम से 27 जुलाई को मेवात के ही एक-दूसरे गांव की एक नाबालिग लड़की के बलात्कार की ख़बर प्रकाश में आई थी. जिससे इंशा खान की मुलाक़ात आज एस०पी० ऑफिस में इत्तेफ़ाकन हो गई, वो कोई और नहीं, बल्कि उसी लड़की के पिता थे जो आगे अपनी कार्रवाई के लिए ‘एम्पावर पीपुल’ के कार्यकर्ता के साथ वहाँ आये थे.

इंशा खान की जब सारी कहानी हमें पता चली तो हम सब दंग रह गए. इंशा खान के दर्द की कहानी कुछ इस तरह है. पिछले वर्ष 11 अक्टूबर 2011 को इंशा खान के घर में रात को 1:30 बजे उसी के गांव के चार दबंग लड़के घुसते हैं और ज़बरदस्ती उसकी मंझली बेटी, रानो (बदला हुआ नाम), जिसकी उम्र सिर्फ 14 साल थी, को उठा कर ले जाते हैं. इंशा एक ट्रक ड्राईवर है जो उस रात घर पर नहीं था और इस हादसे के लगभग एक हफ्ते बाद ही घर पर लौट सका. तब तक रानो की माँ ने गांव के सरपंच से इस बाबत शिकायत की और इस नाबालिग लड़की को उठाने वालो की पहचान भी हो गयी. इंशा ने वापस लौटने पर थाने में बहुत चक्कर काटे, डी०एस०पी० और एस०पी० से भी इस बारे में शिकायत की, लेकिन कुछ असर नहीं हुआ. और ना ही कोई रपट लिखा पाया.

इंशा की मानें तो उसने महिला आयोग एवं अन्य जगह भी लिखित में अक्टूबर 2011 में ही गुहार लगाई, जिस पर आज तक कोई अमल नहीं हुआ. किसी तरह धक्के खाकर इंशा खान आखिर मई 2012 में थाने में रपट लिखा पाने में समर्थ हुए, लेकिन खेद की बात यह है कि अभी तक कोई गिरफ्तारी  नहीं हुई और ये चारों लड़के खुलेआम गांव में घूम रहे हैं.

इंशा खान ने यह भी बताया कि उन्हें कहीं से ये पता चला है कि उनकी बेटी रानो को उन दबंगों ने राजस्थान के भरतपुर में कहीं कैद करके रखा हुआ है और वहाँ की कोई महिला विधायक की विशेष कृपा से ये लोग अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. इंशा खान रोते बिलखते हुए कहते हैं कि उनकी दो जवान बेटियां और भी हैं और उन्हें अब डर है कि उनका भी वही हश्र होने वाला है जो रानो के साथ हुआ है. घर का चूल्हा केवल इनकी कमाई से ही चलता है, लेकिन बेटियों की हिफाज़त और अगवा की गयी बेटी को वापस लाने की लड़ाई के चलते इंशा खान अपना सब काम छोड़कर पुलिस थाने और एस०पी० ऑफिस के चक्कर लगा रहा है. रानो के साथ अभी तक क्या क्या अत्याचार हो चुका होगा हम और आप उसका अंदाज़ा भी लगा पाने में असमर्थ हैं.

(लेखक इम्पावर पीपुल से जुड़े हैं.)

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