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क्या आप अब भी खामोश रहेंगे…?

Anita Gautam for BeyondHeadlines

फिर दिल्ली के लोगों को दिसंबर की ठिठुरती हुई ठंड में बलात्कार की सुलगती ख़बर की आग में हाथ सेंकने का मौका मिल गया. मंत्री महोदय कुछ बोलेंगे… पुलिस कुछ बोलेगी… फिर विदेशी चंदे से काम करने वाले एक्टिविस्ट… वकील और अदालत …. न जाने कौन क्या-क्या बोलेगा? पर इन सबके बीच अस्पताल के आईसीयू वार्ड में पड़ी वो लड़की खामोश है.

सिर्फ आप ही नहीं, मेरे जैसी आम लड़की भी शोक जताएगी और फिर हम और आप जैसे आम लोग 2-4 दिन बाद इस ख़तरनाक वारदात को भूलते हुए अपने-अपने काम मे लग जाएंगे.

अभी कुछ ही दिन पहले एक मनचले ने एक लड़की को खुली सड़क पर उसके पिता के सामने छेड़ा. पिता ने विरोध किया तो जान से हाथ धो बैठे. ये आदमी पिता के साथ-साथ एक पुलिसकर्मी था. जब इस देश में पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं है तो आम लड़की कैसे सुरक्षित रह सकती है? वह भी वो लड़की जिसे देवताकाल से ही हर वर्ग का व्यक्ति कमजोर समझता आया है. वो चाहे त्रेतायुग की द्रोपदी हो या आज के युग की आम लड़की, वह तो आम ही रहेगी न?

सरकार बोलती है कि हर चौराहे पर पुलिस की पीसीआर वैन खड़ी होती है. महिलाओं के लिए हेल्पलाईन नम्बर प्रारंभ किया है. पर आप सोचिए कि कितने मनचले पुलिस की गिरफ्त में आते होंगे?

आप गलती से रेड लाईट की सीमा पर टायर रख देंगे तो सुगलती धूप, ठिठुरती ठंड और तेज़ बारिश में भी पुलिसवाला आपसे बिना पर्ची काटे 50-100 रूपये ले जाता है, पर जब गाड़ी में किसी लड़की की इज्जत लूट रही होती है तब क्या मुजरिम हर लाल बत्ती पर 1 मिनट से लेकर 5-7 मिनट की रेड लाईट में गाड़ी खड़ा करके नियमों का पालन करता है? शायद नहीं…

लेकिन क्या करें… ये पुलिसवाला भी तो आदमी है. वो क्यों न किसी महिला को भूखे भेडि़ये की नज़रों से देखे? आखिर उसका भी मन और इच्छा है. इनका बस चले तो यह पुलिस चौकी में ही अपनी हर रात रंगीन करें और वो अक्सर ऐसा करते भी हैं. देश के कई थानों में बलात्कार मामले सामने आ चुके हैं और शायद उससे कहीं ज़्यादा मामले वहीं दबा दिए जाते हैं.

ऐसे में महिलाएं अपनी शिकायत कहां दर्ज करवाएं? शायद ही किसी भी भले परिवार की लड़की को उसके पिता, भाई अथवा पति कभी भी कोई शिकायत दर्ज तक करने के लिए पुलिस स्टेशन भेजते हो. कारण कया है वह आप सभी जानते हैं. और अगर शिकायत दर्ज करा भी दिया तो पुलिस कार्रवाई क्या करती है, यह आप सबको बखूबी मालूम है.

एक सच यह भी है कि जब तक हमारी सरकार के किसी बड़े नेता अथवा किसी बड़ी नामी-गिरामी खानदान की बहू अथवा लोगों को अपने जलवे से पागल करने वाली किसी अभिनेत्री के साथ बलात्कार नहीं होगा तब तक सरकार कोई ठोस क़दम नहीं उठाएगी. क्योंकि राह चलती लड़की तो आम लड़की है.

विशेषज्ञों का तो यहां तक मानना है कि वो लड़कियां कपड़े ही ऐसे पहनती हैं, जिससे लड़के भड़क जाते हैं. तो फिर कोई ऐसी अभिनेत्रियां जो कपड़ों से परहेज करती हैं, उनके साथ ऐसा क्यों नहीं होता?

दरअसल, पूरी सामाजिक व्यवस्था ही खराब है. अश्लीलता की हद तो तब चरम-सीमा पर आती है जब ‘‘शीला के जवान होते ही मुन्नी बदनाम होती है और इतने में चिकनी चमेली पऊवा चढ़ा कर आ जाती है तो वहीं हिरोईन बोलती है- मेरी फोटो को सीने से चिपकाले सईंया फेविकॉल से, किसी को सैकेंड हैंड जवानी नहीं चाहिए तो किसी को किसी की यारी देसी दारू की तरह चढ़ जाती है. पर आम लड़की ही क्यों इन सब का शिकार होती हैं? तब वो विशेषज्ञ कहां जाते हैं, जब अश्लीलता की सारी हद पार हो चुकी होती है…?

अजीब मामला है. करता है कोई और भुगतता है कोई. अब आप ही सुझाईए कि ऐसे मनचलों का क्या किया जाए? ये इश्किया बुखार के नहीं, मानसिक डेंगू मच्छर के काटे हुए रोगी हैं?  पर इनकी बीमारी तो कैंसर और एड्स से भी ज्यादा खतरनाक और लाईलाज है.

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