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अब मैं चौकीदार हूं…

Tapendra Vishwakarma for BeyondHeadlines

मैं नेपाल का रहने वाला हूं. नेपाल में भी कई जगह बहुत बढ़िया है. लेकिन हम बहुत पहाड़ी इलाका में रहते हैं. मेरे गांव में सब लोग खेती-बाड़ी का काम करते हैं. मेरे मम्मी-पापा भी खेती-बाड़ी करते हैं. मेरे पापा ने मुझे 6 साल की उम्र में एक प्राइमरी स्कूल में दाखिला करवा दिया.

मैंने भी स्कूल में अच्छी तरह पढ़ाई की. दसवीं तक पढ़ाई करके मैंने अच्छे नंबरों से एस.एस.सी एक्जाम पास किया. उसके बाद घर के हालात बिगड़े. मैं पढ़ाई छोड़कर कमाने के लिए इंडिया के मुम्बई शहर चला गया. एक साल तक मुम्बई में काम किया और नेपाल वापस आ गया.

मुझे पढ़ने का बहुत शौक़ था, क्योंकि मैं पढ़-लिख कर कुछ बनना चाहता था. ऐसे में मैंने फिर से ग्यारहवीं में दाखिला लिया. उस वक़्त गांव में ग्यारहवीं में पढ़ने वाले लड़के-लड़कियां बहुत कम थे. इसीलिए ग्यारहवीं में दाखिला लेते ही मुझे टीचर की जॉब मिल गई. यह वही स्कूल था, जिस स्कूल में मैंने दसवीं तक पढ़ाई किया था. मैंने दो साल तक टीचिंग का कार्य किया. इसी दौरान हमने बाहरवीं भी पास कर लिया. अचानक हालत ऐसे बने कि मुझे टीचिंग की जॉब छोड़नी पड़ी. यहीं से मेरा जीवन खराब हो गया. जो चीज़ें हमने अपनी ज़िन्दगी में सोचा था, वह पूरा हो न सका.

मेरे पापा भारत में चौकीदारी का काम करते हैं. उन्होंने भारत में चौकीदारी करके ही मुझे यहां तक पढ़ाया-लिखाया. हालांकि मुझे आगे भी पढ़ाई करने का शौक़ था, लेकिन पैसे न होने की वजह से मैं आगे की पढ़ाई नहीं कर सका. पापा की उम्र भी ज़्यादा हो गई. मां भी ठीक नहीं रहती है, तो फिर मजबूरी में मुझे शादी करनी पड़ी. अब घर का खर्च और बढ़ गया. ऐसे में घर चलाने के लिए पैसे की ज़रूरत थी. इसीलिए पैसे कमाने के लिए फिर से इंडिया आना पड़ा. पर अफ़सोस! इधर भी कोई अच्छा काम नहीं मिल पाया. तो फिर पापा की तरह मुझे भी बिल्डिंग की चौकीदारी का काम करना पड़ा.

अभी बहुत दुख में हूं… आगे कैसे जाउं…? क्या करूं…?

(लेखक दिल्ली के बटला हाउस इलाके में चौकीदारी का काम करते हैं.)

नोट: अगर आप ‘Mango Man’ हैं तो आप भी अपनी समस्याओं व विचारों को BeyondHeadlines के इस कॉलम के लिए भेज सकते हैं.    

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