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‘राम के नाम’ पर ABVP का विरोध समझ से परे…

Poster_In the Name of God

BeyondHeadlines News Desk

हाल ही में अयोध्या में एक फिल्म समारोह में आनंद पटवर्द्धन की चर्चित फिल्म राम के नाम दिखाई गई. समारोह के आखिरी दिन हिन्दुत्ववादी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुछ छात्रों ने इस फिल्म के दिखाए जाने की विरोध किया.

यह विरोध हास्यास्पद है क्योंकि फिल्म 22 वर्ष पहल बाबरी मस्जिद के गिराए जाने से पहले बन चुकी थी. इसे सेंसर बोर्ड की स्वीकृति मिली हुई है. 1992 में राष्ट्रीय पुरस्कार तथा फिल्मफेयर का पुरस्कार भी मिल चुका है और 1996 में यह दूरदर्शन पर भी दिखाई जा चुकी है. इस फिल्म में अयोध्या और फैजाबाद के आम नागरिकों (हिन्दू व मुसलमानों, जो सदियों से मिल-जुल कर रहते आए हैं) से बातचीत दिखाई गई है. राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी लालदास से भी बातचीत दिखाई गई है, जिन्होंने धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों की आलोचना की और साम्प्रदायिक सद्भावना के पक्ष में भूमिका ली. उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए जाने वाले ईंट अभियान में भ्रष्टाचार की भी चर्चा की. बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद पुजारी लालदास की हत्या हो गई.

फिल्म में एक महंथ का बयान भी है जिसने 1949 में मंदिर में मूर्ति रखने का दावा कर मूर्ति के प्रकट होने की बात से तमाम साधारण धर्मपरायण हिन्दुओं को गुमराह करने के प्रयास कर भण्डाफोड़ किया है.

फिल्म साम्प्रदायिक राजनीति का पर्दाफाश करती है और भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबद्धता को ही मजबूत करती है और इसीलिए न्यायालय ने इसे दूरदर्शन पर दिखाए जाने कर आदेश दिया. यह फिल्म सहिष्णु और समावेशी हिन्दू धर्म की अवधारणा को संकुचित करने वाले हिन्दुत्वादी संगठनों की अपने राजनीतिक निहित स्वार्थों के लिए साम्प्रदायिक जहर फैलाने का खुलासा करती है और इसलिए साम्प्रदायिक राजनीति करने वाले इससे चिढ़ते हैं. यदि फिल्म का विरोध करने वाले फिल्म पर रोक लगाना ही चाहते हैं तो उन्हें या तो न्यायालय की शरण में जाना चाहिए या फिर सेंसर बोर्ड की.

यह बयान आज सोशलिस्ट पार्टी, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, अयोध्या की आवाज और लोक राजनीति मंच की ओर से न्यायमूर्ति (सेवा निवृत) राजिंदर सच्चर, एस.आर. दारापुरी (सेवा निवृत आई.पी.एस.), युगल किशोर शरण शास्त्री, प्रेम सिंह, ओंकार सिंह, गिरीश कुमार पाण्डेय, उमा शंकर मिश्र, संदीप पाण्डेय की तरफ से जारी की गई. इन्होंने कहा कि हिन्दुत्ववादी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का विरोध हमारे समझ से परे है. इसकी जितनी निन्दा की जाए, वो कम है.

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