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भाजपा के साथ सपा का गुप्त समझौता…

BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : रिहाई मंच ने टांडा के हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े राम बाबू गुप्ता और उनके भतीजे राम मोहन की हत्या के पीछे डीजीपी रिजवान अहमद द्वारा कथित जेहादी मानसिकता वाले मुस्लिम नौजवान का हाथ होने के आरोप को सफेद झूठ क़रार देते हुए प्रदेश सरकार से तत्काल प्रभाव से उन्हें डीजीपी पद से हटाने की मांग की है.

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने आज जारी एक बयान में कहा कि यह बात शुरु से ही स्थापित हो गई थी कि यह हत्याएं व्यक्तिगत रंजिश में हुई थी, जिसपर पहले तो भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ द्वारा सांप्रदायिक माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की गई और पुलिस की मौजूदगी में मुसलमानों के घर जला दिए गए. तो वहीं अब डीजीपी से इस तरह का बयान दिलाकर सपा सरकार सांप्रदायिक हिंसा पीड़ितों के इंसाफ के सवाल को जिस तरह मुज़फ्फरनगर में आतंक का हौव्वा खड़ा कर राहत कैंपों पर बुल्डोजर चलवाकर पीछे करने की कोशिश की थी, वही कोशिश अब टांडा में करना चाहती है.

मोहम्मद शुऐब ने कहा कि मुलायम को इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि कोसी कलां, अस्थान, फैजाबाद से लेकर मुज़फ्फरनगर तक जो सौ से ज्यादा मुस्लिम विरोधी दंगे हुए है या आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को छोड़ने के वादे से वादा खिलाफी व मौलाना खालिद की हत्या से नाराज़ हुए मुसलमानों को वह किसी मुस्लिम को डीजीपी बनाकर लोकसभा चुनाव में वोट पा लेंगे.

रिहाई मंच के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य लक्ष्मण प्रसाद और अनिल आज़मी ने कहा कि 2007 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा द्वारा जारी भड़काऊ सीडी मामले में राजनाथ और लाल जी टंडन को लखनऊ पुलिस द्वारा क्लीन चिट देने को चुनाव से पहले भाजपा और सपा में गठजोड़ का उदाहरण बताया.

उन्होंने कहा कि लखनऊ पुलिस का यह कहना कि सीडी जारी करते समय लालजी टंडन को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसमें क्या है इसलिए वे बेगुनाह हैं, को हास्यास्पद और हद दर्जे की सांप्रदायिक और आपराधिक धुर्तता है. जबकि पुलिस द्वारा गढ़े फर्जी आतंकवाद के ऐसे तमाम आरोपों के चलते मुस्लिम नौजवान सालों-साल से जेल में सड़ रहे हैं. जिसकी तस्दीक निमेष आयोग रिपोर्ट करती है. जिसे सरकार आंदोलनों के दबाव में सार्वजनिक करने के बावजूद उस पर अमल नहीं किया और न ही खालिद के हत्यारे पुलिस अधिकारियों को नामजद मुक़दमा होने के बावजूद गिरफ्तार किया. जबकि यही लखनऊ पुलिस अतार्किक तथ्यों के जरिए लालजी टंडन को बचाने की बेशर्म कोशिश कर रही है.

नेताओं ने कहा कि इसी तरह एक गवाह के कहने के बावजूद कि राजनाथ सिहं के कहने पर उसने यह सीडी बनाई थी, सपा सरकार उन्हें क्लीन चिट दे रही है.

उन्होंने पूछा कि मुलायाम सिंह को यह ज़रुर बताना चाहिए कि ठीक लोकसभा चुनाव से पहले राजनाथ सिंह के प्रति यह प्रेम क्यों दिखा रहे हैं. क्या इस बार भी पिछले लोकसभा चुनाव की तरह वह राजनाथ सिंह के खिलाफ प्रत्याशी न उतारने का उनसे गुप्त समझौता कर चुके हैं.

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