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आईपीएल : करोड़ों के क्रिकेटर, अरबों का खेल

Shiv Pujan ‘Shiv’ for BeyondHeadlines

12 फरवरी की सुबह जब टीवी खोला तो इंडियन प्रीमियर लीग के बाज़ार में क्रिकेटरों की बोली लग रही थी. पिछले छह साल की तरह मंच सजा था, क्रिकटरों की बिक्री धड़ल्ले से जारी थी. फ्रेंचाइंजी टीम के मालिक बड़ी शिद्दत से समझ बुझ कर खिलाड़ियों की बोली लगाने में मशगूल थे.

बदलाव कुछ नहीं था. पैसों के इस लीग में सब पैसा बनाने में मस्त थे. अगर हम इस क्रिकेट के नये रूप के अतीत को झांके तो इसमें कालिख ही कालिख लगी हुई है. पिछले साल ही स्पॉट फिक्सिंग ने तो क्रिकेट चेहरे को नफ़रत से भर दिया. श्रीसंथ जैसे बेहतरीन क्रिकेटरों की बली चढ़ गई.

इतना ही नहीं, फिक्सिंग की लपटों से टीम के मालिक भी नहीं बच सके. खुद श्रीनीवासन साहब के दामाद गुरूनाथ मय्यपन को सट्टेबाजी का दोषी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मुदगल कमिटि में पाया गया.

तीन लोगों के पैनल ने पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज़ देखें तो  मय्यपन पर लगे आरोपों को सही पाया. हालांकि अभी इसकी और जांच होनी है.

प्रश्न ये भी खड़ा होता है कि जब श्रीसंथ और अन्य क्रिकेटरों पर कार्रवाई हुई तो मय्यपन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा राही है. बस इसलिए कि वो श्रीनीवासन के दामाद हैं. अगर मय्यपन का बचाव किया जा रहा है तो फिर इसका गलत संदेश क्रिकेट वर्ल्ड में जाएगा.

इस साल भी आईपीएल के बाज़ार में विवादों ने अपना नाता नहीं तोड़ा. युवराज सिंह की बोली बैंगलुरू रॉयल चैलेजर्स ने दस करोड़ में खरीद लिया था, लेकिन कोलकाता नाइट रायडर्स बीच में कूद पड़ी. तब विजय माल्या ने युवराज पर चौदह करोड़ की मुंहमांगी रक़म खर्च कर उसे खरीद लिया.

चैंलेजर्स की इस खरीदारी से तूफान मच गया. इतना ज्यादा पैसा अभी तक किसी भी क्रिकेटर को नहीं मिला है. पर इसमें भी जोड़-तोड़ का गणित था. चैंलेजर्स के कप्तान विराट कोहली की दोस्ती की वजह से टीम के मालिक माल्या ने युवी को 14 करोड़ रूपये दिए. जबकि युवराज का हालिया प्रदर्शन बेहद औसत दर्जे का रहा है.

इतना ही नहीं, युवराज से भी बेहतरीन और भरोसेमंद खिलाड़ी आईपीएल के इस मार्केट में मौजूद थे. पर उनकी भाव कौड़ी के लगे. क्रिकेट के प्रशंसक अपने आप से पूछ रहे होंगे कि क्या युवी ही इस दुनिया के सबसे बेहतरीन क्रिकेटर हैं.

खैर, छोड़िए! विवादों के इस लीग का श्रीगणेश तो विवाद से हो गया. दुनिया के दिग्गज क्रिकेटर भी इस लीग को क्रिकेट की बेहतरी के लिए नहीं मानते है. श्रीलंका के विश्वविजयी कप्तान अर्जुन रणातुंगा  पहले ही ये कह चुके है कि ये आईपीएल खिलड़ियों को लालची बना रहा है. और इसने बीसीसीआई को बदनामी के अलावा कुछ भी नहीं दिया है.

इतना ही नहीं, उऩ्होंने यहां तक कह डाला कि आईपीएल ने विश्व क्रिकेट को कुछ भी नहीं दिया, बल्कि हर सीजन नया विवाद ज़रूर देखने को मिला. रणातुंगा के अलावा भी कई दिग्गज क्रिकेटर इस पैसा लीग की आलोचना कर चुके हैं.

अगर आगे नज़र दौड़ाए तो महीनों तक चलने वाले इस क्रिकेट लीग में एक पचड़ा इसके आयोजन को लेकर इस साल भी है. गृह मंत्रालय ने साफ कह दिया है कि चुनाव की वजह से वो सुरक्षा मुहैय्या नहीं करा सकता.

जाहिर है तो फिर इस लीग का आयोजन अब किसी दूसरे देश में होगा. वैसे 2009 में भी चुनाव की वजह से साउथ अफ्रीका में आईपीएल का आयोजन हुआ था. सवाल है कि क्या इंडियन प्रीमियर लीग वाक़ई क्रिकेट की ज़रूरत है? इससे होनहार खिलाड़ी पैदा हो रहे हैं? क्रिकेट का भविष्य संवर रहा है?

तो शायद इसका जवाब न में होगा. क्योंकि आप अगर नज़र दौड़ाए तो ये लीग महज़ पैसा, ग्लैमर, लेट नाईट पार्टी और अय्याशी का अड्डा बनता जा रहा है. नये नये क्रिकेटर पैसे की चाहत में फिक्सिंग तक करने पर आमादा है. कितने नये क्रिकेटरों का तो भविष्य बनने से पहले ही बिगड़ गया.

सबसे बड़ी बात है कि क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था आईसीसी भी कुछ करने की स्थिति में नहीं है. वो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की महज़ कठपुतली मात्र बन गया है या यूं कहे वो सफेद हाथी की तरह है. इंडियन प्रीमियर लीग की वजह से दूसरे देश के क्रिकेटर तो अपनी राष्ट्रीय टीम की ओर से खेलने से मना कर चुके हैं. कई क्रिकेटरों ने अपने क्रिकेट करियर को लंबा खींचने के लिए संन्यास तक ले लिया…

इस रंगीन क्रिकेट ने इस खेल में भूचाल ला दिया है. कुल 40 ओवर के इस खेल में सच कहे तो हर रन, चौके, छक्के, अर्धशतक, शतक, विकेट और कैच में बस पैसा ही पैसा है, जो क्रिकेटरों को तो करोड़पति और टीम मालिकों को अरबपति तो ज़रूर बना रहा है. लेकिन भद्रजनों के इस खेल को बदनामी के ऐसे भंवर में धकेल रहा है, जहां क्रिकेट का भविष्य नहीं दिखता…

(लेखक इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में दस सालों से कार्यरत हैं.)

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