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आम आदमी पार्टी के समर्थन में उतरी मोमिन कांफ्रेंस

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BeyondHeadlines News Desk

बनारस की लड़ाई में मोमिन कांफ्रेंस अहम भूमिका निभा रही है. आम आदमी पार्टी ने बनारस में प्रचार के लिए जिस जगह को हेडक्वार्टर बनाया है, वो जगह मोमिन कांफ्रेंस की ही है. मोमिन कांफ्रेंस बनारस में आम आदमी पार्टी का खुला समर्थन कर रही है.

मोमिन कांफ्रेंस ने न केवल अपना ऑफिस आम आदमी पार्टी के हवाले कर दिया है, बल्कि अपने काडर को भी आम आदमी पार्टी के समर्थन में जगह-जगह लामबंद कर दिया है.

मोमिन कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष शकील अंसारी ने आज मीडिया से मुखातिब होते हुए इस बात का ऐलान किया कि मोमिन कांफ्रेंस खुलकर आम आदमी पार्टी का समर्थन करेगी.

मोमिन कांफ्रेंस का कार्यकारी अध्यक्ष शकील अंसारी

मोमिन कांफ्रेंस का कार्यकारी अध्यक्ष शकील अंसारी

शकील अंसारी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल बेहद ईमानदार छवि के नेता हैं और मोमिन कांफ्रेंस का मक़सद ईमानदार और सेक्यूलर ताक़तों को मज़बूत करना है, ऐसे में अरविन्द केजरीवाल की पार्टी उनके लिए सबसे बेहतर विकल्प है. वो बताते हैं कि इस देश में मुसलमान काफी पिछड़ते जा रहे हैं. हमारी काशी के मुसलमानों की हालत तो और भी खराब है. खास तौर पर बुनकरों की हालात तो और भी बदतर है. हम इनकी लड़ाई वर्षों से लड़ते आ रहे हैं. हमें लगता है कि जो सिद्धांत मोमिन कांफ्रेंस का है, शायद वही सिद्धांत आम आदमी पार्टी का भी है. वो इस देश के गरीब आदमी की लड़ाई लड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मोमिन कांफ्रेंस का उदेश्य केवल सत्ता में पहुंचने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य समाज के ऐसे बुद्धिजीवी व्यक्तियों को सत्ता तक पहुंचाना भी है, जो विभिन्न जाति, धर्म व संस्कृति वाले देश की युवा शक्ति को संगठित कर सबके सर्वांगीण विकास के पथ-प्रदर्शन की क्षमता रखते हों. साथ ही उन्होंने काशी के लोगों से अपील की कि 23 को सारे काशी वासी ज़रूर केजरीवाल के नामांकन में शामिल रहें, ताकि साम्प्रदायिक ताक़तों को एक बेहतर संदेश दिया जा सके.

मोमिन कांफ्रेंस का आम आदमी पार्टी को समर्थन इस मायने में भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है कि बनारस में मुस्लिम वोट तीन लाख से अधिक है. मोमिन कांफ्रेंस की कोशिश है कि वोटों का ध्रुवीकरण न होने पाए. इस प्रेस वार्ता में मोमिन कांफ्रेंस के पूर्वांचल प्रभारी अक़ील अहमद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अख्तार अंसारी, ज़िला संयोजक अखलाक अहमद, नुरूल्लाह अंसारी, अब्दुल वाहिद, अब्दुल रशीद सहित सैंकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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