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तो अब भारत का नया नाम होगा ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ इंडिया’

BeyondHeadlines News Desk

बीजेपी ने लोकसभा चुनावों के लिये 5 स्थानीय राजनीतिक पार्टियों से चुनावी गठबंधन किया है. मगर इन पार्टियों ने अपनी चुनावी डफली पर अपनी ही ताल छेड़ दी है, जिससे आने वाले वक्त में बीजेपी की नेतृत्व वाली एनडीए के लिये मुश्किल पैदा कर सकता है. तमिलनाडु में बीजेपी से चुनावी गठबंधन करने वाली वाइको के नेतृत्व वाली पार्टी एमडीएमके ने कहा है कि अगर बीजेपी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी तो सहयोगी पार्टी के रूप में उनकी पार्टी सबसे पहले देश का नाम बदलने के लिए संघर्ष करेगी.

एमडीएमके चाहती है कि भारत का नाम यूनाइटेड स्टेट्स आफ इंडिया रखा जाए. इसके अलावा वाइको ने पार्टी के मैनीफैस्टों में तमिलनाडु के लोगों से वायदा किया कि एनडीए की सरकार बनने पर लिट्टे पर लगे बैन को भी हटाने के प्रयास किए जाएंगे और अलग तमिल होमलैंड के लिए जनमत संग्रह कराने के लिये संघर्ष किया जाएगा.

वाइको की चुनावी घोषणा पत्र तमिल राजनीति में तुरंत चर्चा का विषय बन गया है. इस बारे में तमिलनाडु राज्य के बीजेपी प्रमुख पोन राधाकृष्णन का कहना है कि एमडीएमके के चुनावी घोषणा पत्र को उन्होंने अभी देखा नहीं है.

गौरतलब है कि वाइको हमेशा लिट्टे समर्थक नेता के रूप में देखे जाते रहे हैं. लिट्टे को लेकर वह हमेशा खुलकर बोलते भी रहे हैं. लोकसभा चुनावों के तहत बीजेपी ने जो राजनीतिक गठबंधन किया है, उसके तहत वाइको की पार्टी राज्य के 7 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. राजनीतिक विश्लेषक एस. नारायण का कहना है कि बीजेपी एक नैशनल पार्टी है. ऐसे में उसे इस बात का ध्यान रखना होगा कि राज्य स्तर पर वे जिन पार्टियों के साथ चुनावी गठबंधन कर रही है, वह अपने चुनावी घोषणा पत्र में राष्ट्रीय मुद्दों पर किस तरह की बातें कह रही है. लोकल मुद्दों पर लोकल पार्टी का अपना पक्ष हो सकता है, मगर राष्ट्रीय मुद्दों पर उनका किसी प्रकार का बयान या वादा बीजेपी के लिये घातक हो सकता है.

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