Literature

परदेशियों से अंखियाँ न मिलाना…

प्रधानमंत्री की पांच मध्‍य एशियाई देशों और रूस की आगामी यात्रा पर टिप्पणी

Arun Kant Shukla for BeyondHeadlines

वैसे घूम कर आईये सर, आप परदेश में ज्यादा खुश रहते हैं, खूब सेल्फी खिंचवाते और खींचते हैं. भारत में तो आपको सेल्फी के नाम से (योग दिवस) गुस्सा आ जाता है. भारत में तो आपकी मुस्कराती तस्वीर देखने हम तरस जाते हैं. वह तो विदेश से ही आती है. ड्रम बजाते, बांसुरी बजाते. सच विदेश में आप कितने खुश रहते हैं!

वैसे आप भी मानते हैं कि भारत में रहना भी कोई रहना है लल्लू… पर हम लल्लू क्या करें? हम तो राजकपूर की मेरा नाम जोकर के जोकर हैं… जीना यहाँ,  मरना यहाँ, इसके सिवा जाना कहाँ?

थोड़ा जल्दी आईयेगा… आप की उपस्थिति में ही जब आपके चेले चपाटी इतनी उधम मचाते हैं तो सोचिये आपके न रहने पर क्या करेंगे?

वैसे आप भी क्या कर सकते हैं?  विकास करना है तो देश-देश तो घूमना ही पड़ेगा.

मनमोहनसिंह जी ने उस रास्ते पर डाल दिया है कि अपने बूते पर तो आप कुछ कर ही नहीं सकते. विकास की जो जड़ी-बूटी आप पिछले वर्ष दिखाए थे, वो तो असली की नक़ल थी. असल तो विदेश में ही है.

आपका कहना सच है कि विदेश में आपके जाने से संबंध सुधरेंगे. आखिर रूसियों के साथ संबंध सुधारकर राजकपूर जी को भी तो फ़ायदा ही हुआ था, तो फिर आपको क्यों नहीं होगा?

वहीं सुधारिए सर… यहाँ तो (भारत में) बहुत मुश्किल है. लोग समझते ही नहीं है कि भारत में संबंधों को ख़राब रखना सिद्धांत की बात है और सिद्धांत की बात पर तलवारें चलाने की हमारी पुरानी परंपरा है, समझौते की नहीं. बल्कि, यहाँ मेहनत करना ही बेकार है.

सच मानिए आप इतने दिन बाहर रहेंगे तो आपकी बहुत याद आयेगी. अब क्यों… ये न पूछिए… लल्लू लोग ऐसे ही होते हैं, वे 40वर्ष पुरानी इमरजेंसी को ऐसे याद करते हैं, जैसे कल की ही बात हो! मुंबई ब्लास्ट की बरसी मनाते हैं!

दरअसल पुराने में खोये रहना लल्लूओं की फितरत होती है. अब देखिये न… हम छोड़ रहे हैं क्या राजीव गांधी का डिजिटल इंडिया, भारत में बनाओ-विदेश के लिए या मनमोहन का एफडीआई, नहीं न! इसलिए आप जल्दी आ जाना क्योंकि एक दिन बाद ही हमें आपकी याद आने लगेगी.

आपकी यात्रा सुखद हो, आप खूब घूमें-फिरें, सेल्फी लें और जहां जाएँ कुछ न कुछ बजाकर आयें. हाँ, अदानी भैय्या को ज़रुर साथ ले जाएँ, मन बहला रहेगा. हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.

हाँ… वैसे तो आप जो कुछ भी बोलते हैं, 120 करोड़  भारतवासियों की तरफ से बोलते हैं… फिर भी राष्‍ट्रपति कारिमोव (उज़बेकिस्‍तान), राष्‍ट्रपति नज़रबायेव, प्रधानमंत्री करीम मास्सिमोव (कज़ाकिस्‍तान), गुरूबनगुली वर्दीमुहेमेदोव (तुर्कमेनिस्‍तान), राष्‍ट्रपति अलमाज़बेक अतामबायेव (किर्गिस्‍तान), राष्‍ट्रपति इमोमाली रहमौन (ताजिकिस्‍तान) और (भानुमती के कुनबे) ब्रिक्स के सभी नेताओं को नमस्कार कहिएगा…

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