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डिंपल यादव किसके साथ हैं?

Hare Ram Mishra for BeyondHeadlines

पत्रकार जगेन्द्र को जिंदा जला देने, बाराबंकी में पत्रकार की मां को जिंदा जला देने, बहराइच में आरटीआई कार्यकर्ता गुरु प्रसाद शुक्ला को पीट-पीट कर मार डालने, झांसी में किसान को जिंदा जला देने जैसी विभत्स घटनाओं के बाद महमूदाबाद में थाने में युवती की हत्या ने साफ़ कर दिया है कि अखिलेश सरकार अपराधियों का एक गैंग है.

लखीमपुर थाने में सोनम हत्या कांड मायावती सरकार के ताबूत की आखिरी कील बना. ठीक उसी प्रकार महमूदाबाद की घटना अखिलेश सरकार के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी.

जिस तरीके से महमूदाबाद की घटना में पुलिस को बचाने के लिए लड़की के पिता से जबरन लिखवाया गया है कि लड़की फांसी लगाकर मरी है. उसने प्रदेश के हर उस मां-बाप, भाई-बहन को यह संदेश दिया है कि इंसाफ़ का क़त्ल और अपराधियों को बचाने के लिए उनके प्रदेश का युवा मुख्यमंत्री किसी भी हद तक जा सकता हैं. सोचने की बात है कि जब उस लड़की का पिता उस समय थाने में था ही नहीं, तो चश्मदीद गवाह कैसे बन सकता है? वो कैसे कह सकता है कि लड़की खुदकुशी की है.

यहां सबसे बड़ा सवाल राज्य महिला आयोग व महिला सम्मान प्रकोष्ठ उठता है कि वो इस मामले पर इतने सन्नाटे में क्यों है? प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के विज्ञापन करने वाली सपा सांसद डिंपल यादव को इस घटना पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वह थाने के हत्यारी-बलात्कारी पुलिसिया अमले के साथ हैं या फिर पीडि़ता के इंसाफ़ के साथ हैं.

(लेखक लखनऊ की सामाजिक संस्था रिहाई मंच से जुड़े हुए हैं. ये लेखक के नीजि विचार हैं.)

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