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सूखा प्रभावित राज्यों में विशेष राहत पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और 11 राज्यों को नोटिस

BeyondHeadlines News Desk

सूखा प्रभावित 11 राज्यों में लोगों तक विशेष राहत और मुवावजा पहुँचाने की ‘स्वराज अभियान’ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र और 11 राज्यों को नोटिस जारी किया. सूखे से निपटने के लिए किये गए कार्यों पर सरकारों से जवाब मांगा गया है जिसकी अगली सुनवाई 4 जनवरी को होगी.

याचिकाकर्ता की तरफ़ से प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें देश के 39% हिस्से में पड़े गंभीर और चिंताजनक सूखे से असरदार तौर पर निपटने में विफल रही है. इसके कारण किसानों की फ़सल का भारी नुक़सान, पानी की किल्लत, कुपोषण, खाद्य सामग्री और पशुओं के चारे की भारी कमी हुई है.

स्वराज अभियान ने जिन 11 राज्यों में लोगों के लिए विशेष सूखा राहत की मांग की है, वो हैं –यूपी, एमपी, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र और हरियाणा. मांग की गयी कि सभी राशन कार्ड धारकों को खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज, 2 किलो दाल और बच्चों के लिए 200 ग्राम दूध या अंडा दिया जाए. लोगों को रोज़गार की मांग के अलावा स्वराज अभियान ने ये भी कहा कि मवेशियों के लिए चारे का इंतज़ाम हो.

अक्टूबर में योगेंद्र यादव के साथ स्वराज अभियान के अन्य साथियों ने जय-किसान आंदोलन के बैनर तले सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और इस आपदा से निपटने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे. सूखे के प्रभाव को और बेहतर समझने के लिए स्वराज अभियान ने एक सर्वेक्षण किया. सर्वे के परिणाम अत्यंत चिंताजनक आये. इससे ये स्पष्ट हुआ कि यदि जल्द से जल्द आपातकालीन कदम नहीं उठाये गए तो कई जिलों में सूखा अब अकाल का रूप ले सकता है.

SA Poster on Drought

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