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जहां उजड़ी थीं वहीं बसने लगीं जिंदगियां

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Avdhesh Kumar for BeyondHeadlines

दिल्ली के शकूरबस्ती में करीब 500 झुग्गियां तोड़ने जाने के बाद अब यहां के लोगों की जिंदगियां दौबारा पटरी पर लौट रही हैं.

बता दें कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर रेलवे ने शकूरबस्ती में 500 झुग्गियां तोड़ दी. इस दौरान एक बच्ची की भी मौत हो गई थी. 42 वर्षीय अमीर का कहना है कि इस भयंकर ठंड में काफी मुसीबत झेलने के बाद अब थोड़ा अमन चैन हैं. उन्होंने कहा कि इस कड़के की ठंड में रेलवे ने अच्छा नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि अगर सीएम केजरीवाल ने हमरी मदद नहीं कि होती तो रेलवे ने हमें मारने के पूरे इंतज़ाम कर लिए थे.

25 वर्षीय यशोदा का कहना है कि रेलवे ने हमारी गैर मौजूदगी में झुग्गियां तोड़ दीं. इससे हमारे घर का काफी सामान मिट्टी में ही दब गया. उन्होंने बताया कि मुश्किल से पहचान पत्र, आधार कार्ड व अन्य कागज बनवाए थे लेकिन इस दौरान वह सभी कागज दब गए.

वहीं कश्मिरा का कहना है कि सीएम केजरीवाल के लोग हमारी मदद कर रहे हैं. उनके लोग समय से चाय, खाना और पानी की व्यवस्था कर देते हैं. जिसके सहारे जिंदगी चल रही है.

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि समय से कुछ नहीं मिल रहा है और लोग कुछ लाते हैं तो उधर ही कोने में देकर चले जाते हैं.

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बता दें कि सीएम केजरीवाल ने इस दौरान घटनास्थल का दौरा किया था. रेलवे की इस कार्रवाई पर नाराज़ केजरीवाल ने पीड़ितों के लिए इंतजाम न किए जाने पर 2 एसडीएम समेत 3 अफ़सरों को सस्पेंड भी कर दिया था.

केजरीवाल ने कहा कि 2006 में कानून पास किया गया था कि जब तक बहुत ज़रूरी नहीं होगा तब तक सरकार किसी भी झुग्गी को नहीं तोड़ सकती. हमारी सरकार झुग्गी वालों के लिए कॉलोनियां बनाने का काम कर रही है.

रेलवे के मुताबिक बीते 9 महीने में 3 बार झुग्गी हटाने के लिए नोटिस दिया गया. इसके बावजूद जगह खाली नहीं की गई, जिसके बाद पुलिस की मदद से जगह खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी.

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