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रविश कुमार ‘प्रथम पीर मुहम्मद मूनिस पत्रकारिता अवार्ड’ से सम्मानित

BeyondHeadlines News Desk

बेतिया (बिहार) :  गत रविवार पीर मुहम्मद मूनिस की याद में चम्पारण के बेतिया शहर के एम.जे.के. कॉलेज में द्वितीय पीर मुहम्मद मूनिस स्मृति व्याख्यान सह-सम्मान समारोह आयोजित किया गया.

इस कार्यक्रम में प्रथम पीर मुहम्मद मूनिस पत्रकारिता पुरस्कार इस बार एनडीटीवी के एक्जीक्यूटिव एडिटर रविश कुमार को दिया गया. इनके नामों की घोषणा करते हुए पत्रकार अफ़रोज़ आलम साहिल ने बताया कि –‘हमारी ज्यूरी ने इस पुरस्कार के रविश कुमार के नाम का चयन किया है. चम्पारण के धरती के लाल रविश कुमार किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने मौजूदा पत्रकारिता को अपनी स्वतंत्र विचारधारा और शानदार शैली से एक नया आयाम दिया है. रविश भाई ने यह सम्मान स्वीकार करने की हामी भरकर चम्पारण-वासियों को गौरवन्तित किया है. यह पीर मुहम्मद मूनिस के प्रति उनकी सच्ची श्रद्धांजलि है.’

हालांकि अपनी व्यस्तता की वजह से रविश कुमार कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सकें. लेकिन इस कार्यक्रम में उनके द्वारा रिकार्ड करके भेजे गए संदेश को सुनाया गया, जिसमें रविश कुमार ने  पीर मुहम्मद मूनिस को याद करते हुए आज की पत्रकारिता पर चिंता व्यक्त की है.

इस मौक़े पर रविश कुमार अपनी खुशी का इज़हार इन शब्दों में किया –‘मैं आज खुद को प्रताप अख़बार सा महसूस कर रहा हूं. ऐसा लग रहा है कि मेरी रूह पर मूनिस साहब लिख रहे हैं और गणेश शंकर विद्यार्थी साहब उस ख़बर के संपादित कर रहे हैं. मुझे लग रहा है कि गांधी इन ख़बरों को पढ़ रहे हैं और चम्पारण आने का मन बना रहे हैं.’

इस मौक़े पर अपने एक संदेश में सभा को संबोधित करते हुए रविश कुमार ने कहा कि –‘मुझे बहुत खुशी है और उससे भी ज़्यादा अफ़सोस कि जिस पत्रकार के नाम पर मुझे यह अवार्ड मिल रहा है, उस पत्रकार को दुनिया ठीक से नहीं जान सकी. जिन लोगों ने उनकी याद को ज़िन्दा किया है, दरअसल वही इस पुरस्कार के असली हक़दार हैं…’

आगे उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों से सवाल पूछते कहा कि –‘क्या पत्रकार को आज सरकार के साथ-साथ समाज से भी लड़ना होगा? समाज किसी पत्रकार का साथ सरकार का गुण गाने के लिए कैसे दे सकता है? हम लगातार अनदेखा करते जा रहे हैं कि सरकारें पत्रकारों को पद रही हैं, टिकट दे रही हैं, कारपोरेट जनसम्पर्क की नौकरी दे रही हैं, अपनी पार्टियों में प्रवक्ता बना रही हैं… ये सब होता रहा है या हो रहा है? सवाल है कि क्या यही होगा?’

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