BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Reading: कोसी कलां दंगे की हो सीबीआई जांच
Share
Font ResizerAa
BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
Font ResizerAa
  • Home
  • India
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Search
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Follow US
BeyondHeadlines > India > कोसी कलां दंगे की हो सीबीआई जांच
IndiaLatest NewsLeadबियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी

कोसी कलां दंगे की हो सीबीआई जांच

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published March 30, 2013 76 Views
Share
10 Min Read
SHARE

BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के रिहाई मंच (Forum for the Release of Innocent Muslims imprisoned in the name of Terrorism) द्वारा कोसी कलां दंगा पीडि़तों की जनसुनवाई करते हुए कोसी कलां दंगे में राज्य मशीनरी की संदिग्ध भूमिका पर चर्चा करते हुये दंगे की सीबीआई जांच कराने की मांग की. इस दौरान कोसी कलां, मथुरा से लगभग पचास पीडि़त परिवारों के लोग मौजूद थे, जिन्होंने अपने उत्पीड़न की दास्तां सुनाई, जिन्हें नौ महीने बीत जाने के बाद भी न्याय नहीं मिला है.

SR Darapuri Rihai Manch
रिहाई मंच के महासचिव व पूर्व पुलिस महानिरिक्षक एसआर दारापुरी ने कहा कि सपा सरकार मुसलमानों को दंगे की आग में झोंककर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराना चाहती है. जबकि सपा मुसलमानों के समर्थन से ही सत्ता तक पहुंची है. श्री दारापुरी ने कहा कि जिस तरह से कोसी कलां के दंगा पीडि़तों ने अपनी आप बीती सुनाई और बताया कि जांच कर रही पुलिस किस तरह सांप्रदायिक राजनेताओं को संरक्षण दे रही है उससे लगता है कि कोसी कलां यूपी में नहीं बल्कि मोदी के गुजरात में है. उन्होंने दंगे में पुलिस की संदिग्ध भूमिका पर सवाल करते हुए कहा कि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए क्योंकि प्रदेश की पुलिस अपने ही खिलाफ उठे सवालों पर जांच नहीं कर सकती.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य नसीम इक्तेदार अली ने कहा कि एक साल के शासन में 27 दंगे होने से साफ हो जाता है कि यह दंगे सपा सरकार की नीतियों के तहत हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह महज़ इत्तेफाक नहीं है कि एक तरफ पूरे सूबे में दंगे हो रहे हैं तो वहीं मुलायम सिंह मुसलमानों के खून से सने हाथ वाले आडवानी की तारीफ करते हैं और वरुण गांधी जैसे मुस्लिमों के हाथ काटने की खुलेआम धमकी और मुसलमानों को एक बीमारी कहने वाले सांप्रदायिक व्यक्ति को बरी करवा देते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह ने कहा कि सपा के शासन काल में हर बार मुस्लिम विरोधी दंगे होते रहे हैं इसलिए इसे अखिलेश के शासन की विफलता नहीं बल्कि सामाजिक न्याय के नाम पर मुसलमानों को ठगने की जो राजनीति रही है उसका परिणाम है. जो इस बार सपा की पिछली हुकूमतों से ज्यादा बर्बर तरीके से अभिव्यक्त हो रही है. इससे यह भी समझा जा सकता है कि देश में सांप्रदायिकता का खतरा सिर्फ भाजपा से ही नहीं सपा और कांग्रेस जैसी कथित सेक्युलर पार्टियों से भी है.

एपवा नेता ताहिरा हसन ने कहा कि जिस तरह मुसलमानों के वोट से सत्ता में पहुंची सपा ने मुस्लिम विरोधी दंगों की लाइन लगा दी है उससे तय हो गया है कि मुसलमानों को अब तय करना होगा कि मुलायम सिंह जैसे छद्म सेक्युलर नेता के हवाले अपना भविष्य नहीं छोड़ा जा सकता. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अब ऐसे नए राजनीतिक समीकरण की तरफ बढ़ना होगा जो सांप्रदायिकता के खिलाफ बिना समझौते के लड़ाई लड़ सके.

ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के नेता दिनकर कपूर ने कहा कि दंगों से तय हो गया है कि मुलायम की अवसरवादी धर्मनिरपेक्षता सांप्रदायिकता से नहीं लड़ सकती. उन्होंने कहा कि सरकार आतंकवाद के नाम पर बंद निर्दोष युवकों को छोड़ने की बात कर रही है लेकिन आरडी निमेष जांच कमीशन की रिपोर्ट सरकार दबा कर रखी है, क्योंकि उसे जारी करने के बाद सिर्फ बेगुनाहों के छूटने का रास्ता ही नहीं खुलेगा बल्कि सांप्रदायिक और अपराधी एसटीएफ और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाई करना होगा. जो सपा सरकार नहीं करना चाहती.

सामाजिक कार्यकर्ता केके वत्स पिछले दिनों पुलिस की पिटाई से आत्म हत्या करने वाले मुहम्मदपुर लखनऊ के निवासी समीर कांड को पुलिसिया सांप्रदायिकता का नया उदाहरण बताया जहां ठोस सुबूत होने के बावजूद अपराधी पुलिस कर्मी आजाद है.

जनसुनवाई में मौजूद कोसी कलां दंगे में मारे गए दो जुड़वा भाईयों की सास फरजाना ने कहा कि उनकी आखों के सामने ही उनके दामाद कलुवा और भूरा को काटकर जिंदा जला दिया गया. और उनके साथ आबरुरेजी करने की कोशिश की गई पर आज तक उसके दोषी खुलेआम घूम रहे हैं.

जनसुनवाई में मौजूद मौलाना ताहिर ने कहा कि जिस तरह से जय श्री राम के नारों के साथ पुलिस की मौजूदगी में बस स्टैण्ड और कब्रिस्तान वाली मस्जिदों में मजहबी किताबों को जलाया गया और मस्जिद को छतिग्रस्त किया गया वह मंजर याद करके आज भी रुह कांप जाती है. एक तरफ मुलायम और आज़म खान मदरसों के आधुनिकीकरण के नाम पर मुसलामानों को रिझाते हैं तो वहीं दूसरी ओर उनकी हुकूमत में मदरसों और मस्जिदों को नज़र-ए-आतिश कर दिया जाता है.

जनसुनवाई में मौजूद मोहम्मद इदरीस ने कहा कि उन लोगों ने मेरी आंखों के सामने मेरे भतीजे सलाउद्दीन की गोली मारकर हत्या कर दी और अब विवेचना कर रहे सीओ बंशराज सिंह यादव मेरे भाई पर दबाव डाल रहे हैं कि वे दो लाख रुपए लेकर अभियुक्तों से समझौता कर लें.

जनसुनवाई में मौजूद कोसी कलां के पीस हिंद सोशल सोसाइटी के सचिव मोहम्मद शाहिद कुरैशी ने कहा कि इस दंगे की साजिश पांच रोज पहले वृंदावन में रची गई. जहां आरएसएस की तीन रोजा मीटिंग हुई थी. उसमें शरीक होकर नगर के भगवत प्रसाद रुहेला, भगवत अचार वाला, बंटी बीज वाला, लांगुरिया बैण्ड मास्टर, मुकेश गिडोहिया आदि आरएसएस, बजरंगदल और भाजपा के लोगों ने एक जून को कोसी कलां की सांप्रदायिक एकता को नेस्ता नाबूद कर दिया. जो आज तक बहाल नहीं हो सकी.

जनसुनवाई में मौजूद जान मोहम्मद ने कहा कि मेरी उम्र 60 से ज्यादा की हो गई है, सही से चल-फिर भी नहीं पाता हूं और मेरे ऊपर और मेरी ही तरह ऐसे बहुत से लोगों पर झूठे मुकदमें लगाकर पुलिस ने हमारी हंसती-खेलती जिन्दगी तबाह कर दी है.

जनसुनवाई में मौजूद बाबू ने कहा कि मेरा बेटा आस मोहम्मद जिसे हम प्यार से आशू कहते थे, वो सोलह साल का बच्चा था, जिसे अभी बहुत दुनिया देखनी थी. पर दंगाईयों को उस पर रहम नहीं आई और उन्होंने उसे गोलियों से छलनी कर दिया. आज तक न इस पर चार्जशीट दाखिल की गई है और न ही नौ महीने बीत जाने के बाद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है.

जनसुनवाई मे मौजूद मो0 फखरुद्दीन ने कहा कि मुझ पर दंगाइयों ने तेजाब फेंका जिसकी जलन से मेरा बुरा हाल हो गया. आज भी उस मंज़र को याद करके दिल दहल जाता है. दंगाईयों ने उनके भतीजे कयूम, भाई निजामुद्दीन की दुकान को लूटा और आग लगाई.

जनसुनवाई का संचालन कर रहे अवामी काउंसिल के महासचिव असद हयात ने कहा कि विधान परिषद में राज्य सरकार द्वारा यह घोषणा करना कि एमएलसी लेखराज को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी है, सत्य पर पर्दा डालना और मुसलमानों के साथ धोखा करना है. वास्तविकता यह है कि दंगाइयों ने दोपहर के समय फोन करके ग्रामीणों को लक्ष्मी नारायण और लेखराज सिंह का नाम लेकर एकत्र किया कि उन्होंने कहा है कि मुसलमानों की ईंट से ईंट बजा दो और रात्रि के समय इन लोगों द्वारा नकासा का दौरा किया और फायरिंग करवाकर दहशत फैलाई गई. इससे साबित है कि दंगा कराने और उसकी योजना में लक्ष्मी नारायण और एमएलसी लेखराज सिंह शामिल रहे. ऐसे में जब इस दंगे में राजनीतिज्ञों की षडयंत्रकारी भूमिका सामने आ रही है तो इस दंगे की निष्पक्ष विवेचना सीबीआई से ही कराई जानी चाहिए.

जनसुनवाई में कोसी कलां, मथुरा से हाजी जमील अहमद, मोहम्मद यूसुफ, अब्बासी, मोहम्मद इस्लाम, शरीफ मुल्ला जी आदि लोगों ने शिरकत की.

जनसुनवाई में काजी शहर मौलाना अबुल इरफान फिरंग महली, संदीप पांडे, मो0 शुऐब, आलोक अग्निहोत्री, आदियोग, विवेक, अभिनव गुप्ता, अंकित, बॉबी अंसारी, इदरीस, अबुज़र, आफताब खान, शिब्ली बेग, मो0 मोइद, मोहम्मद अनस, शाहनवाज़ आलम और राजीव यादव मौजूद थे.

TAGGED:kosi kalan riotsriot
Share This Article
Facebook Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Telangana Must Order CBI Inquiry into Alleged Murder of Advocate Moizuddin in Waqf Cases
India Waqf Facts
Waqf Registration Ends With Fears of Vanishing Properties
Exclusive India Waqf Facts
The Waqf Act 2025, Supreme Court Interim Ruling, and the Role of Muslims in Protecting Waqf Properties
Waqf Facts
Supreme Court Verdict on the Waqf Act: Justice or Just Temporary Consolation?
India Waqf Facts Young Indian

You Might Also Like

IndiaLeadWorld

Islamic publishers adopt Istanbul roadmap for global cooperation

September 28, 2026
Edit/Op-EdExclusiveIndia

18 Years After Batla House ‘Encounter’, Azamgarh Still Lives With Fear, Silence and Waiting

September 20, 2026
ExclusiveIndiaLead

Maulana Izhar-ul-Haq Case: A Family Caught Between an Arrest, a Mud House, a Silent Village and Terrorism Charges

September 19, 2026
IndiaLeadSportsYoung Indian

Football against patriarchy: How Yuwa is changing girls’ futures in Jharkhand

September 15, 2026
Copyright © 2025
  • Campaign
  • Entertainment
  • Events
  • Literature
  • Mango Man
  • Privacy Policy
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?