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न्याय की उम्मीद में राहुल गांधी के पास पहुंचे गोपालगढ़ दंगा पीड़ित

. एन. शिबली

नई दिल्ली, भारतीय मुसलमानों पर देश के अधिकांश हिस्सों में समय समय पर अत्याचार का सिलसिला जारी है. कहीं आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह  मुसलमानों की गिरफ्तारी होती है तो कहीं एक  साजिश के तहत दंगा कराकर उन्हें बर्बाद करने की कोशिश की जाती है. इसी अत्याचार और संगठित साजिश की कड़ी गोपालगढ़ दंगा भी थी.

आज गोपाल गढ़ दंगा पीड़ितों ने राजस्थान और मेवात की प्रमुख हस्तियों के साथ जिन में राजस्थान मुस्लिम मंच और एपीसीआर के सदस्य शामिल थे, ने कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी से मिल कर  न्याय की मांग रखी. राहुल से कहा कि हम भारतीय नागरिक हैं और हमें भी संवैधानिक अधिकार है तो फिर हम पर अत्याचार क्यों हुए और अगर एक संगठित साजिश के तहत हम पर अत्याचार हुए और हमारे रिश्तेदारों को मौत के घाट उतारा भी गया तो फिर अब इस लोकतांत्रिक देश में हमारी बार बार अपील के बावजूद दोषियों को सजा देकर हमारे साथ न्याय क्यों नहीं किया जा रहा है.

लगभग 25 लोगों के इस प्रतिनिधि-मंडल से राहुल गांधी ने दस मिनट की मुलाकात की, पीड़ितों की समस्याओं को सुना और उन्हें हर मदद का भरोसा दिलाया. प्रतिनिधिमंडल में राजस्थान मुस्लिम फोरम के मेंबर प्रोफेसर एम. हसन ने राहुल से मुलाकात के बाद  इस संवाददाता से बात करते हुए कहा कि हमने राहुल से कहा कि मुसलमान हमेशा कांग्रेस की मदद करते हैं और बदले में उन्हीं पर अत्याचार किया जाता है, उन्हें जान से मारा जाता है और उनकी संपत्ति नष्ट कि जाती हैं. श्री हसन ने कहा कि हमने राहुल से कहा कि यह केवल हिंदू मुस्लिम दंगा नहीं था बल्कि पुलिस और प्रशासन की मिली भगत से मुसलमानों के खिलाफ संगठित तरीके से किया गया एक नरसंहार था. अशोक गहलोत  सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी थी कि वह अपने राज्य के नागरिक यानी मुसलमानों के जान-माल की रक्षा करती पूरी तरह से नाकाम रही.

प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी से जो विशेष मांग  की  उनमें मारे गए गए लोगों के रिश्तेदारों को 15 से 20 लाख और जिनके घर तबाह हुए हैं उन्हें 5 से 10 लाख रुपये मुआवजा  देना शामिल है.  इसके अलावा राहुल से यह भी गुहार की गई कि जो दोषी हैं उन्हें सज़ा दी जाए, जिन पांच निर्दोष मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया है उन्हें तुरंत रिहा किया जाए, क्योंकि मुसलमानों को सीबीआई की जांच पर भरोसा नहीं है इसलिए उसकी जूडीशीयल जांच कराई जाए और मुसलमानों के खिलाफ इस अत्याचार में जो भी अधिकारी शामिल हैं उसे तत्काल बर्खास्त किया जाए. प्रतिनिधिमंडल ने राहुल से यह भी अपील की कि वह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आदेश दें कि वह अतीत में ऐसी मनहूस घटना उत्पन्न नहीं होने दें और मुसलमानों के जान व माल की सुरक्षा सुनिश्चित करें.

गोपालगढ़ दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की उम्मीद लेकर राहुल के दरबार में पहुंचने वाले प्रतिनिधियों में मारे गए जाकिर  के भाई शफी  मोहम्मद, मारे गए युवक इरफान के पिता शमशुद्दीन, बड़ी बेदर्दी  से मौत के घात उतारे गए मौलाना खुर्शीद के बेटे हजरो, मारे गए रहमान के पुत्र बदरुद्दीन, मारे गए शब्बीर काजी के बेटे ज़ाहिद, महमोदा जिसके अबू की मौत हुई, शाहीना जिसके बहनोई की मौत हुई, डाक्टर खुर्शीद अहमद जिनका  घर लूटा गया आदि शामिल थे. इनके अलावा इस दल में मुहामद  अली, जामा मस्जिद के इमाम अब्दुर्रशीद, , मौलवी अरशद, चौधरी अख्तर, सरपंच मुबीन अहमद, शौकत खान, मोहम्मद रफीक, सरपंच अलदीन बिलाल, सरपंच ईसा खान, सरपंच दीन मोहम्मद, एडवोकेट रमज़ान चौधरी, क़ारी मोईनुद्दीन, इंजीनियर मोहम्मद सलीम, एडवोकेट पैकर फारूक, नाज़िमुद्दीन शौकत कुरैशी और प्रोफेसर एम हसन शामिल थे.

अब देखना यह है कि राहुल गांधी से गोपाल गढ़ दंगों के पीड़ितों की दस मिनट की मुलाकात का कोई असर होता है या फिर यह बैठक केवल एक मुलाक़ात बनकर रह जाती है.

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