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लो क्लास जनता पर हाई क्लास मंत्री जी के ताने

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published July 11, 2012 16 Views
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17 Min Read
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एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

अमेरिकी फतवे पर सफाई पेश करने के लिए मनमोहन सिंह के दो सिपाहसालार मैदान में आ डटे. एक चिदंबरम तो दूसरा सलमान खुरशीद. खुरशीद ने तो मनमोहन के बचाव में राहुल गांधी तक की टांग खींच ली. फिर मोइली ने आर्थिक सुधारों में देरी के लिए एनडी के असहयोग का रोना रो लिया. लेकिन सारे किए को गुड़ गोबर कर दिया देश की आमजनता के खिलाफ जारी नरसंहार संस्कृति के सेना नायक गृहमंत्री पी चिदंबरम ने. आम आदमी की ​​तकलीफों की मजाक बनाते हुए चिदंबरम ने कह दिया कि  देश के लोग पंद्रह रुपये का पानी और बीस रुपये की आइसक्रीम कोन खरीदने के लिए तैयार हैं, लेकिन एक रुपये चावल और गेहूं का भाव बढ़ता है तो बवाल खड़ा कर देते हैं. कुछ ऐसा ही बयान अतुल्य घोष ने साठ के दशक में बंगाल में जारी खाद्य आंदोलन को खारिज करते हुए दिया था. तब केंद्रीय मंत्री घोष ने मुख्यमंत्री प्रफुल्ल सेन के बचाव में कहा था कि अनाज नहीं है तो क्या लोग केले और बैंगन खाकर जिंदा रह सकते हैं. इसका अंजाम क्या हुआ, इतिहास गवाह है. 34 साल के वाम-शासन के अवसान के बाद बंगाल में परिवर्तन तो हुआ पर कांग्रेस अब भी ममता बनर्जी के रहमोकरम के भरोसे  है. क्या चिदंबरम बाकी देश में भी कांग्रेस को बंगाल के अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं?

चिदंबरम ने महंगाई पर सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि सरकार हर चीज को मध्यम वर्ग के नजरिए से नहीं देख सकते. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों लोग चावल पर एक रुपए प्रति किलो का ज्यादा खर्च सहन नहीं कर सकते, लेकिन आइसक्रीम पर 15 रुपए आसानी से खर्च कर देते हैं. चिदंबरम ने यह विवादित बयान देकर देश के करोड़ों गरीबों और दरिद्र परिवारों का मज़ाक उड़ाया है, उन्होंने आइसक्रीम और मिनरल वाटर की तुलना अनाज से की है. यह महज कांग्रेस का वैचारिक राजनीतिक दिवालियेपन नहीं है बल्कि खुले बाजार की अर्थ व्यवस्था में क्रय शक्ति आधारित समाज की विडंबना है​, और खाये पिये अघाये सत्ता वर्ग का आम जनता के प्रति अपनाये जा रहे नजरिये, नीति निर्धारण और शासन की प्रथमिकताओं का खुलासा है. इस पर तीखी प्रतिक्रिया जो आ रही हैं, उनमें भी जन सरोकार कम बल्कि सत्ता की राजनीति ज्यादा है. इस खेल में आम आदमी का वजूद ही खतरे में है.

इसी बीच खबर है कि 1987 में 40 लोगों के मारे जाने के एक मामले में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम पर केस चलेगा. दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में उन्हें सह आरोपी बनाने के लिए जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी को याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है. स्वामी ने कहा कि आवेदन अगले माह के पहले सप्ताह में दाखिल किया जाएगा. स्वामी ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश सिद्धार्थ से मौखिक अनुरोध किया था कि उन्हें चिदंबरम और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी जाए, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को होगी. 1987 में गैर कानूनी हथियार की बरामदगी के लिए लगाए गए कर्फ्यू के बाद एक संप्रदाय विशेष के करीब 40 लोग मारे गए थे. चिदंबरम उस समय केंद्रीय गृह मंत्रालय में आंतरिक सुरक्षा के राज्य मंत्री थे. स्वामी का आरोप है कि घटना से पहले चिदंबरम ने इलाके का दौरा किया था.

कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि यूपीए सरकार ने शुरू में शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने माना कि पिछले दो-तीन साल सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार देश को इस कठिन दौर से निकाल ले जाएगी. चिदंबरम ने मंगलवार कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राजकोषीय घाटे को काबू में करने के लिए कई उपायों पर विचार कर रहे हैं और सरकार अर्थव्यवस्था को विकास की पटरी पर वापस ले आएगी. उन्होंने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘ मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री सह वित्त मंत्री राजस्व संग्रह को दुरुस्त करने और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण लगाने के लिए कई उपायों पर विचार कर रहे हैं. हम गैर योजनागत खर्चें में एक समान कटौती पहले ही लागू कर चुके हैं. इससे मदद मिलेगी.’ चिदंबरम ने बचत, निवेश, राजकोषीय घाटे और चालू खाता घाटा को चार मौलिक मुद्दों के तौर पर चिन्हित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे उपायों से बचत और निवेश में सुधार होगा. ‘ हम तेज आर्थिक वृद्धि दर के दौर में वापस लौटेंगे.’ चालू खाता घाटा पर उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंसों के दाम और रुपये की विनियम दर पर निर्भर करता है क्योंकि देश को अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए कई जिंसों का आयात करना पड़ता है.

चिदंबरम के आइसक्रीम बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रक्रिया दी है और कहा कि यह आम आदमी से मजाक है और अपमान भी है. बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि चिदंबरम का बयान अपमानजनक है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए.

लेकिन सवाल ये है कि क्या चिदंबरम की माफी या सफाई से हालात बदल जायेंगे? सरकार और राजनीति की प्रथमिकताएं बदल जायेंगी? महंगाई के सवाल पर सरकार का बचाव करते हुए चिदंबरम ने कहा कि चावल की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह है उसके रखरखाव की बढ़ती लागत. उन्होंने कहा कि रखरखाव की बेहतर व्यवस्था का फायदा किसानों को हुआ है. उन्होंने कहा, हम हर बात को मध्यमवर्गीय नजरिए से नहीं देख सकते.

शाहनवाज़ हुसैन ने कहा,”चिदंबरम का बयान देश की गरीब जनता का अपमान है. गृह मंत्री को फौरी तौर पर माफी मांगनी चाहिए.”

शाहनवाज़ ने कहा कि जब अमेरिकी चश्मे से गरीबी की हकीकत समझने की कोशिश की जाएगी तो ऐसी ही बातें कहीं जाएंगी.

क्या कांग्रेस का चश्मा ही अमेरिकी है? बाकी लोगों का?

पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि श्रीमान चिदंबरम ने मध्य वर्ग का उपहास उड़ाने के लिए यह निंदात्मक टिप्पणी की है. यह एक घृणात्मक टिप्पणी है जो इस सरकार के आंतरिक अंतर्विरोध को दर्शाती है.’

उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार आवश्यक वस्तुओं के दाम को काबू कर पाने में असमर्थ है लेकिन दूसरी ओर उससे परेशान असहाय मध्य वर्ग को निशाना बना कर उसे अपमानित भी कर रही है.

रूडी ने कहा कि चिदंबरम का बयान आम आदमी की परेशानी के प्रति उनकी संवदेनहीनता का भी द्योतक है. पार्टी के अन्य प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि चिदंबरम आम आदमी के दर्द को समझ पाने में अक्षम हैं, क्योंकि वह खुद को एयर कंडीशन कमरों में सीमित किए हुए हैं.

लेफ्ट के नेता मोहम्मद सलीम ने भी चिदंबरम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि कांग्रेस हकीकत से दूर जा रही है.

टाइम पत्रिका के एक आलेख में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आलोचनाओं को खारिज करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने मंगलवार को कहा कि वे कुछ मुद्दों पर पहले ही जवाब दे चुके हैं. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि मेरी राय में टाइम ने जिन मुद्दों को लेकर सरकार की आलोचना की है. वे वही मुद्दे हैं जिनका जवाब प्रधानमंत्री हिंदुस्तान टाइम्स को एक साक्षात्कार में दे चुके हैं. पत्रिका की आलोचना करते हुए आहलूवालिया ने कहा कि मेरी राय यही होगी कि हमें हिंदुस्तान टाइम्स के साक्षात्कार की एक प्रति टाइम पत्रिका को भेजनी चाहिए. टाइम ने अपनी कवर स्टोरी में सुधार तथा निर्णय लेने की धीमी गति पर सरकार की आलोचना की है.

कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) न केवल आर्थिक सुधारों की राह में रोड़े डाल रहा है, बल्कि सरकार के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण माहौल बना रहा है. मोइली ने एक बयान में कहा कि मुख्य विपक्षी राजनीतिक गठबंधन सुधारों की सभी पहल का विरोधी है और साथ ही वह सरकार के खिलाफ नकारात्मक झूठी अफवाह फैला रहा है. सुधार कार्यक्रमों में रूकावट के लिए राजग को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि डीटीसी (प्रत्यक्ष कर संहिता) भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति के पास है. जीएसटी विधेयक भी बिहार के वित्त मंत्री सुशील मोदी की अध्यक्षता वाले राज्य के वित्त मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह के विचाराधीन है. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मोइली ने कहा कि संप्रग दो के कार्यकाल में कोई भी बड़ा मामला सामने नहीं आया है. सिविल सोसाइटी के साथ निपटने की भारी चुनौतियों के बावजूद सरकार ने उनके साथ काम किया और एक मजबूत लोकपाल विधेयक लेकर आई जो मंजूरी के लिए संसद में लंबित है.

अब देखिये मनमोहन सिंह की सफाई में चिदंबरम क्या कहते हैं. केंद्रीय गृहमंत्री ने मंगलवार को कहा कि संप्रग-2 सरकार ने उन चुनौतियों का सामना किया है जो साफ जाहिर नहीं थीं लेकिन सरकार ने तालमेल बिठाने एवं सहयोगियों को साथ लाना सीख लिया. चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा कि संप्रग-1 में मुझे पहले दिन से पता था कि चुनौतियां हैं. खुलकर कहें तो संप्रग-2 में चुनौतियां इतनी स्पष्ट नहीं थीं. अचानक से कुछ नई चुनौतियां आ गईं. यही संप्रग-1 और संप्रग-2 में अंतर है. वह एक तरह से वाम दलों का जिक्र कर रहे थे जिन्होंने संप्रग-1 में समर्थन दिया और वस्तुत: ममता बनर्जी नीत तृणमूल कांग्रेस का भी उल्लेख कर रहे जो मौजूदा गठबंधन में साझेदार है. हालांकि चिदंबरम ने गठबंधन सहयोगियों में मतभेदों की बात को कम तर करके आंकते हुए कहा कि सभी दलों का अपना राजनीतिक एजेंडा है. उन्होंने कहा कि लेकिन जैसे ही हम नई चुनौतियां देखते हैं तो हम उनके साथ तालमेल बिठाने और लोगों को मनाना सीख जाते हैं. चिदंबरम ने सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों में विनिवेश पर एक तरह से वाम दलों के कड़े विरोध का अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि मसलन संप्रग-1 में हमारे सामने यह मजबूरी थी कि हम निवेश नहीं कर सके. हमने एनटीपीसी के विनिवेश को लेकर एक समय रेखा पार कर ली लेकिन बाद में उन्होंने चौड़ी रेखा खींची और कहा कि आप विनिवेश नहीं कर सकते. संप्रग-1 के सामने परमाणु सौदे को एक और चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि वह साझेदारी तोड़ने वाली स्थिति थी. उन्होंने कहा कि हमें साझेदारी टूटने की स्थिति में पहुंचे बिना गठबंधन चलाना चाहिए.

तो दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने साफ शब्‍दों में कहा है कि आज पार्टी दिशाहीन हो गई है. अब सिर्फ राहुल गांधी से ही उम्‍मीद बची है. खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि उसके पास राहुल गांधी जैसे युवा नेता की ओर से कोई वैचारिक दिशा निर्देश नहीं आ रहे हैं. कांग्रेस ने एक इंटरव्यू में कही गई उनकी इस बात के लिए सफाई मागी है और कहा है कि वह बयान का मतलब समझाएं. खुर्शीद ने कहा कि राहुल के आइडिया और विचार केवल चुनाव के दौरान आते हैं. यह हम सब के लिए इंतजार करने का वक्‍त है. खुर्शीद का कहना है कि कांग्रेस के पास इंतजार करने के सिवाय और कोई रास्‍ता नहीं है. जब कानून मंत्री से देश की गिरती आर्थिक तस्‍वीर के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि सिर्फ इकोनॉमिक रिफार्म ही धीमा नहीं हुआ. पॉलिसी और प्रशासनिक रिफार्म भी ऐसी स्थिति में नहीं हो सकता.

सलमान खुर्शीद कहते हैं कि यूपीए-2 में राजनीति और गवर्नेंस आपस में मिक्‍स हो गई है. यह एक चिंतनीय स्थिति है. ऐसी स्थिति से सिर्फ कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ही छुटकारा दिला सकती हैं. सिर्फ सोनिया ही इतनी ऊंचाई पर हैं. प्रधानमंत्री सरकार चला सकते हैं लेकिन वह मंच तैयार नहीं कर सकते. यह काम सिर्फ सोनिया ही कर सकती हैं. गौरतलब है कि खुर्शीद ने कुछ दिन पहले ही सोनिया गांधी से आग्रह किया था कि उन्‍हें सरकार छोड़ने की इजाजत दी जाए. यूपी विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद उन्‍होंने मंत्री का पद छोड़ कर संगठन के लिए काम करने की ख्‍वाहिश जताई थी. हालांकि, कांग्रेस अध्‍यक्ष की ओर से इस पर कोई कमेंट नहीं आया.

सलमान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा नेता शाहिद सिद्दिकी ने कहा, ‘राहुल पीएम बनना चाहते होंगे लेकिन उनके भीतर लीडरशिप क्‍वालिटी नहीं है. उन्‍हें अभी खुद को साबित करना होगा. राहुल गांधी यूपी और बिहार में फेल हो गए. उनके पास आइडियोलॉजिकल फोकस नहीं है.’ उन्‍होंने यह भी कहा, ‘देश आर्थिक संकट के साथ साथ नेतृत्‍व के संकट से गुजर रहा है. इसमें कोई शक नहीं कि राहुल कड़ी मेहनत कर रहे हैं लेकिन उनकी तुलना इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से नहीं की जा सकती है.’ खुर्शीद के इस बयान पर कि कांग्रेस ‘दिशाहीन’ हो गई है.  सिद्दिकी ने कहा, ‘सलमान खुर्शीद ने आखिरकार अपने की पार्टी हकीकत बयां कर दी है.’

बीजेपी नेता मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा है कि कांग्रेस नीति, नेतृत्‍व और नैतिकता के संकट से गुजर रही है.

बहरहाल सलमान खुर्शीद के बयान पर कांग्रेस ने उनसे बयान का मतलब समझाने का कहा है. इसके बाद खुर्शीद ने मीडिया के सामने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया. उन्‍होंने जो कहा है, उसे नकारात्‍मक नहीं सकरात्‍मक सोच से पढ़ने की आवश्‍यकता है. देश और पार्टी के सामने जो चुनौतियां हैं, उसके लिए अगली जेनरेशन के नेताओं को तैयार रहना चाहिए.

सलमान ने कहा, ” मैंने कभी भी पार्टी को दिशाहीन नहीं कहा. मैं चाहता हूं कि राहुल जिम्‍मेदारी संभालें.”

मीडिया पर अपनी नाराजगी व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍होंने कहा कि अब तक वह मीडिया से सकारात्‍मक संवाद करते आ रहे थे लेकिन जिस तरह से उनके शब्‍दों का गलत अर्थ निकाला गया, उसके बाद ऐसे संवाद को जारी रखने को लेकर सोचना पड़ेगा.

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