Exclusive

हथियारों के दलाल की मॉडल प्रेमिका को राहुल गांधी ने दिया था एक घंटा!

Dilnawaz Pasha for BeyondHeadlines

हिंदुस्तान में हथियारों का सबसे बड़ा दलाल और नेवी वार रूम लीक मामले का मुख्य आरोपी अभिषेक वर्मा और उसकी मॉडल लिव इन पार्टनर एना मारिया नियाक्सू इस समय सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के शिकंजे में हैं. अमेरिकी नागरिक सी एडमंड्स एलन ने सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और देश की अन्य जांच एजेंसियों को अभिषेक वर्मा और उसके दलाली नेटवर्क के खिलाफ ठोस सबूत भेजे हैं, जिनके आधार पर ही वर्मा और एना को 8 जून, 2012 को गिरफ्तार किया गया.

अभिषेक वर्मा और उसकी मॉडल लिव-इन पार्टनर एना नियाक्सू को बुधवार को अदालत ने जमानत दे दी. सीबीआई इन दोनों की गिरफ्तारी के 60 दिन बाद भी कोर्ट में चार्जशीट नहीं पेश कर पाई जिस कारण कोर्ट को उन्हें जमानत देनी पड़ी. हालांकि धोखाधड़ी के एक दूसरे मामले में सीबीआई ने अभिषेक वर्मा और एना को फिर गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट ने दोनों को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. धोखाधड़ी का यह मामला कांग्रेसी सांसद और खेल मंत्री अजय माकन ने दर्ज कराया है. अभिषेक वर्मा ने अजय माकन के लैटरपैड का इस्तेमाल करके प्रधानमंत्री को पत्र लिखे थे.

अभिषेक वर्मा की रक्षा मंत्रालय में ही अंदर तक पहुंच नहीं थी, बल्कि देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के युवराज राहुल गांधी ने भी अभिषेक वर्मा की मॉडल प्रेमिका से अपने घर पर मुलाकात की थी. एडमंड्स एलन द्वारा भेजे गए दस्तावेज़ों के मुताबिक हथियार कंपनी ‘सिग सॉउर’ के अधिकारियों को राहुल गांधी ने 6 दिसंबर 2011 को अपने घर पर एक घंटे का वक्त दिया था. इस मुलाकात में अभिषेक वर्मा की मॉडल प्रेमिका भी शामिल थी. यही नहीं 7 दिसंबर को वर्मा और जर्मन हथियार कंपनी के अधिकारियों ने गृह मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी (पोलिस मोडर्नआइजेशन) श्री सुरेश कुमार से भी जेसलमेर हाउस में मुलाकात की थी. इसके बाद अभिषेक वर्मा की मॉडल प्रेमिका और कंपनी के अन्य अधिकारियों ने रक्षा राज्य मंत्री एम पल्लम राजू से रक्षा मंत्रालय में ही मुलाकात की थी. 7 दिसंबर को ही एना नियाक्सू और ‘सिग सॉउर’ के अधिकारियों ने स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के डीजी से भी मुलाकात की थी. एन नियाक्सु ‘सिग सॉउर’ हथियार कंपनी की भारत में प्रबंध निदेशक है. अभिषेक वर्मा के दलाली नेटवर्क के ज़रिए एना कंपनी की रक्षा मंत्रालय से डील फिक्स करा रही थी.

यही नहीं रक्षा मंत्रालय में भी अभिषेक वर्मा की गहरी पैठ थी, जिसकी जांच भी सीबीआई कर रही है. उसकी लिव इन पार्टनर एना नियाक्सु रोमानियाई मूल की प्रसिद्ध मॉडल है. एलन के मुताबिक रक्षा सौदों में दलाली के लिए अभिषेक वर्मा मॉडलों का भी इस्तेमाल करता था. मॉडल सप्लाई करने के लिए एना ने एक मॉडलिंग एजेंसी भी खोली थी. खास बातचीत में एडमंड एलन ने बताया कि वर्मा अधिकारियों और राजनेताओं के करीब जाने के लिए मॉडलों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता था. सौदा पटाने के लिए वो न सिर्फ कमीशन देता बल्की खूबसूरत मॉडल भी उपलब्ध करवाता. ब्राजील की कई मॉडलों ने अभिषेक वर्मा के खिलाफ शोषण का मामला भी दर्ज करवाया था. एलन के मुताबिक, ‘वर्मा पहले लोगों को वेश्याओं के साथ फिक्स करता है और फिर उन्हें बाद में ब्लैकमेल करता है.’

हो सकता है अभिषेक वर्मा और उसकी लिव इन पार्टनर एना को गुरुवार को जमानत मिल जाए. लेकिन कई बड़े सवालों के जवाब मिलने अभी बाकी हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्मा के खिलाफ ठोस सुबूत होने के बावजूद भी सीबीआई 60 दिनों के भीतर चार्जशीट पेश क्यों नहीं कर पाई? यही नहीं, अजय माकन ने उन पर लैटर पैड का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, लेकिन सवाल यह भी है कि बिना माकन से नजदीकी के अभिषेक वर्मा ने लैटर पैड का इस्तेमाल कैसे कर लिया?

अभिषेक वर्मा नेवी वार रूम लीक मामले का मुख्य आरोपी है. फिर भी उसकी मॉडल गर्लफ्रैंड को राहुल गांधी ने अपने घर पर एक घंटे का वक्त कैसे दे दिया? अगर एडमंड एलन की माने तो अभिषेक वर्मा यह दावा करता है कि भारत का कानून और राजनीति उसकी जेब में है. जिस तरह से अभिषेक वर्मा ने राहुल गांधी से अपनी मॉडल प्रेमिका और ‘सिग सॉउर’ के अधिकारियों की मीटिंग फिक्स करवाई उससे तो अभिषेक वर्मा के दावों में सच्चाई ही दिखाई देती है.

फिलहाल सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की टीम अमेरिका जाकर एडमंड एलन से पूछताछ करने की तैयारी भी कर रही है. एडमंड एलन ने बताया कि सीबीआई और ईडी की टीम अमेरिका आकर उसका बयान लेने वाली हैं.

अभिषेक वर्मा के जेल पहुंचने में अमेरिकी नागरिक सी एडमंड्स एलन की अहम भूमिका रही. भारत और अमेरिका में एलन और अभिषेक वर्मा के बीच कई मुकदमे भी चल रहे हैं. पढ़िए एलन और वर्मा के रिश्तों और वर्मा की दलाली की पूरी कहानी…..

एडमंड एलन की 12 साल पहले हुई थी अभिषेक वर्मा से पहचान

पेशे से वकील सी एडमंड्स एलन के मुताबिक अभिषेक वर्मा से उनकी पहचान साल 2000 में अपने कुछ मित्रों के जरिए हुई थी. एलन के कुछ मित्र व्यापार की संभावनाएं तलाशने के लिए भारत आए थे. यहां उनकी मुलाकात अभिषेक वर्मा से हुई. एलन के इन मित्रों ने ही अभिषेक वर्मा से उनका परिचय कराया. ईमेल और फोन से परिचय के बाद एलन और अभिषेक के बीच खूब बातचीत होती रही. इसी दौरान साल 2000 में ही अभिषेक ने विदेशी बैंकों में जमा अपनी दौलत के प्रबंधन के लिए उनकी सेवाएं लेनी चाही.

अभिषेक वर्मा के 2 हजार करोड़ मैनेज करता है एलन

एलन द्वारा भेजे गए दस्तावेजों के मुताबिक 5 अप्रैल 2000 को अभिषेक और एलन के बीच एक करार  हुआ जिसके तहत अभिषेक वर्मा ने एलन को 205 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब एक हजार करोड़ रुपए) अमेरिका में निवेश करने के लिए दिए. इस क़रार के तहत एलन अभिषेक की दौलत की देखभाल और निवेश के लिए जिम्मेदार एजेंट थे और अभिषेक के मांगने पर उन्हें सभी पैसा, कमाई और ब्याज सहित तीन दिन के भीतर उपलब्ध करवाना था.

क़रार के अनुसार  इस काम के लिए एलन को दस प्रतिशत पैसा मिलना था. एलन ने स्वीकार किया कि उन्होंने दस प्रतिशत कमीशन के लिए ही यह काम किया था.

ऐसा ही एक और करार 11 फरवरी 2004 को दोनों के बीच हुआ, जिसके तहत स्विटजरलैंड की बैंक से 205 मिलियन डॉलर (करीब एक हजार करोड़ रुपए) एलन के अमेरिकी खाते में भेजे गए. इस करार के तहत भी एलन को अभिषेक की ब्लैक मनी को अमेरिका में निवेश करना था.

अभिषेक वर्मा की अमेरीकी कंपनी का अध्यक्ष है एलन

साल 2005 में अभिषेक ने एलन के जरिए अमेरिका के डेलेवर प्रांत में एक कंपनी रजिस्टर्ड कराई. गेंटन प्राइवेट लिमिटेड नाम की इस कंपनी के अध्यक्ष एलन ही हैं. इस कंपनी का मुख्य काम अभिषेक के पैसे को दुनियाभर से रिसीव करके उनके आदेशानुसार भेजना था.

गेंटन प्राइवेट लिमिटेड ने अभिषेक वर्मा के कहने पर भारत से रक्षा सौदा कर रही कई विदेशी हथियार और तकनीक कंपनियों को सेवाएं दीं और बदले में मोटा कमीशन भी हासिल किया. एलन ने इन कंपनियों से गेंटन प्राइवेट लिमिटेड के रिश्तों के दस्तावेज भी भेजे हैं.

गेंटन प्राइवेट लिमिटेड के तहत ही अभिषेक वर्मा ने कई और कंपनियां भी अमेरिका में रजिस्टर्ड की. यही नहीं नेवी वार रूम लीक मामले में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद अभिषेक वर्मा ने गेंटन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड भी शुरु की, जिसके कर्मचारियों की सैलरी और बाकी सभी लेनदेन गेंटन प्राइवेट लिमिटेड ही करती थी.

गेंटन के जरिए एलन का मुख्य काम अभिषेक वर्मा के निर्देशानुसार दुनियाभर से पैसा रिसीव करना और फिर आगे भेजना था. भारत में मौजूद कई लोगों को बैंक ट्रांस्फर के जरिए एलन ने अभिषेक वर्मा के कहने पर पैसा चुकाया.

यूं बिगड़े एलन और अभिषेक वर्मा के रिश्ते

एडमंड्स एलन और अभिषेक वर्मा के रिश्तों में कड़वाहट अगस्त 2011  में आई. एडमंड्स के मुताबिक अगस्त 2011 में किसी व्यक्ति ने उन्हें बेल्जियम से तीन लाख अमेरिकी डॉलर भेजे थे. यह पैसा अभिषेक वर्मा को कर्ज के रूप में भेजा गया था. पैसे के साथ कुछ  दस्तावेज भी आए थे. एलन ने दस्तावेज और पैसा अभिषेक वर्मा के निर्देशानुसार आगे भेज दिए.

अभिषेक वर्मा ने कहा कि वो अब पैसे के मामले को देख लेंगे. पैसा भेजने वाले व्यक्ति ने कई बार ईमेल किया और हर बार वर्मा ने कहा कि वो मामला देख रहा है. जब एलन ने इस व्यक्ति से बात की तो पता चला कि अभिषेक वर्मा ने उससे भी अपने 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब एक हजार करोड़ रुपए) मैनेज करने के लिए कहा था. साथ ही उसने लिंकेस्टीन की एक बैंक को कुछ संवेदनशील ईमेल भी किए थे.

तीन लाख डॉलर (करीब 1.5 करोड़ रुपए) के इस लेनेदेन के बाद ही एलन और वर्मा के रिश्तों में कड़वाहट आनी शुरु हो गई. हालात यह हुए कि 18 जनवरी 2012 को वर्मा ने अपना पैसा (205 मिलियन अमेरिकी डॉलर) एलन से वापस मांग लिए. इसके बाद से ही एलन ने भारत की तमाम जांच एजेंसियों, आर्थिक अपराध एजेंसियों और संबंधित मंत्रालयों को ईमेल  और रजिस्टर्ड पोस्ट के जरिए दस्तावेज भेजकर अभिषेक वर्मा की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी. यही नहीं, एलन ने एफबीआई और अन्य अमेरिकी एजेंसियों को भी अभिषेक वर्मा की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी लेकिन उन एजेंसियों ने कोई कार्रवाई नहीं की.

न्यूयॉर्क के कोर्ट में अभिषेक वर्मा की ओर से एडमंड्स एलन के खिलाफ दायर किए गए मुकदमें में भी कहा गया है कि एलन जांच एजेंसियों और व्यापारिक संबंधियों को ईमेल भेजकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है.

एलन और  अभिषेक वर्मा के बीच न्यूयॉर्क में चल रहा है मुकदमा

साल 2012 तक एलन ने अभिषेक के लिए हर वो काम किया जो उन्होंने कहा. एलन द्वारा भेजे गए दस्तावेजों के मुताबिक 18 जनवरी 2012 को अभिषेक वर्मा ने एलन से अपने 1 हजार करोड़ रुपए दिल्ली की एक  बैंक में ट्रांस्फर करने के लिए कहा. एलन को हालांकि बैंक का नाम और खाता संख्या नहीं दी गई थी.

करार की शर्त के मुताबिक एलन को तीन दिन के भीतर पैसा अभिषेक वर्मा को लौटाना था. जब पैसा नहीं लौटाया गया तो  अभिषेक वर्मा ने 24 जनवरी को अमेरिकी लॉ फर्म शेच्टमैन हाल्परिन सावेज, एलएलपी के जरिए एलन को नोटिस भिजवाया और समझौता करने के लिए कहा. एलन से कहा गया कि जल्द ही अभिषेक के भारतीय वकील न्यूयॉर्क में होंगे और वो चाहे तो उनसे मिलकर पैसा लौटाने की शर्तों पर समझौता कर सकते हैं.

लेकिन एलन ने जब इसका भी जवाब नहीं दिया तो लॉ फर्म ने अपनी अधिवक्ता लिन ई. जुडैल के जरिए यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट सदर्न डिस्ट्रिक्ट न्यूयॉर्क में एलन के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर कर दिया. फिलहाल यह मामला जज रॉबर्ट एल. कार्टर की बैंच के अधीन है.

15 फरवरी 2012 को दायर किए गए इस मुकदमे (केस संख्या1:2012cv01182, न्यूयॉर्क सदर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट) में अभिषेक वर्मा को भारत का नागरिक, प्रतिष्ठित व्यापारी और समाजसेवी बताया गया है. इस मुकदमें में कहा गया है कि अभिषेक वर्मा ने 205 मिलियन डॉलर एलन को दिए. एलन ने 11 साल तक इस पैसे का का प्रबंधन किया लेकिन वापस मांगने पर मुकर गए. कभी एलन के हाथों में अपनी काली कमाई सौंपने वाला अभिषेक वर्मा अब अपनी काली कमाई वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि अभिषेक के पास इतना पैसा आया कहां से और इसके लिए उन्हें अमेरिकी एजेंट रखने कि जरूरत क्यों पड़ी?

कभी अभिषेक वर्मा के बेहद करीब था एलन

अभिषेक वर्मा अपना हर राज एलन के साथ शेयर करता था. एलन के मुताबिक पिछले 12 साल में दोनों के बीच दस हजार से ज्यादा ईमेल संपर्क हुए हैं. हालांकि अभिषेक वर्मा अक्सर ईमेल आईडी बदलता रहता था.

एलन और अभिषेक के बीच के रिश्ते इतने अंदरूनी थे कि नेवी वार रूम लीक केस में  तिहाड़ जेल में रहते हुए भी अभिषेक वर्मा  एलन के साथ लगातार ईमेल के जरिए संपर्क में था. इस दौरान अभिषेक वर्मा द्वारा भेजे गए ईमेल संदोशों को एलन ने हमें उपलब्ध करवाया है.

एलन ने तिहाड़ जेल में बंद अभिषेक वर्मा की तस्वीरें भी भेजी हैं. अभिषेक अपनी सभी कानूनी रणनीतियों के बारे में एलन को खुलकर बताता था.

न्यूयॉर्क के कोर्ट में दायर मुकदमे के मुताबिक एलन ने अभिषेक वर्मा से साल 2000 में 205 मिलियन डॉलर प्राप्त किए थे. एलन ने कहा कि उन्हें इस रकम का दस प्रतिशत कमीशन मिलना तय हुआ था.

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर डील में भी अभिषेक वर्मा?

फरवरी 2010 में इटली की कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड और भारत सरकार के बीच हुआ 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों का 3546 करोड़ रुपए का सौदा भी इटली की खुफिया एजेंसियों की जांच के बाद शक के घेरे में है. इस सौदे में 350 करोड़ रुपए की दलाली की जांच इटली की एजेंसियां कर रही हैं.

एलन ने जो दस्तावेज उपलब्ध करवाएं हैं उनके मुताबिक गेंटन प्राइवेट लिमिटेड और अगस्ता वेस्टलैंड के बीच भी 7 अगस्त 2009 को एक डील हुई थी जिसके तहत भारत सरकार के साथ सौदे में गेंटन प्राइवेट को मदद करनी थी जिसके एवज में उसे हेलीकॉप्टर की बिक्री पर 8 प्रतिशत और पुर्जों और मशीनरी पार्ट्स की बिक्री पर 15 प्रतिशत कमीशन मिलना था. हालांकि एलन द्वारा भेजे गए दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता है कि अगस्ता ने फरवरी 2010 में हुई 3546 करोड़ रुपए की इस डील के लिए कोई फीस गेंटन प्राइवेट लिमिटेड को चुकाई थी या नहीं. इस डील के विवादों में आने के बाद रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में जांच आदेश दे  दिए हैं. मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने इस डील को रद्द करने की मांग की है.

हथियार कंपनी को ब्लैक लिस्ट से हटाने के लिए दलाली

फरवरी 2011 में ऑर्डिनेंस फेक्ट्री बोर्ड ने स्विटजरलैंड की हथियार कंपनी रीनमैटल एयरडिफेंस एजी (आरएडी) को सुदिप्तो घोष नाम के एक अधिकारी को रिश्वत देने के मामले में ब्लैक लिस्ट करने के संबंध में आशय पत्र लिखा था.

4 फरवरी 2011 को ओर्डिनेंस फेक्ट्री बोर्ड ने आरएडी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के संबंध में पत्र लिखा था और इसी बीच अभिषेक वर्मा ने अपनी कंपनी गेंटन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए आरएडी को ब्लैकलिस्ट से हटाने के नाम पर दलाली की. एलन द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के मुताबिक गेंटन प्राइवेट लिमिटेड ने सिंगापुर से बैंक ट्रांस्फर के जरिए आरएडी से फरवरी 2011 में ही 6 लाख डॉलर (लगभग तीन करोड़ रुपए) प्राप्त किए.

एलन के मुताबिक अभिषेक वर्मा ने इस डील के संबंध में उनसे एक महिला के नाम से बनाई गई ईमेल आईडी के जरिए संपर्क किया और उन्हें स्काईप के जरिए दिशानिर्देश उपलब्ध करवाए. एलन ने जब पूछा कि गेंटन ने आरएडी के साथ कोई करार ही नहीं किया है तो फिर इतना पैसा किस आधार पर दिया जा रहा है तो अभिषेक की ओर से कहा गया कि भारत में हाथ मिलाना ही करार होता है.

एलन के मुताबिक फरवरी में गेंटन को आरएडी से 5 लाख 30 हजार डॉलर मिल भी गए थे लेकिन अभिषेक वर्मा वादे के मुताबिक आरएडी का काम नहीं कर सके. अप्रैल में एलन को लिखे ईमेल में कहा गया कि आरएडी से मिले पैसे का कुछ हिस्सा भारत में मौजूद लोगों को दिया जाना था, लेकिन कुछ कारणवश यह काम नहीं हो पा रहा है. आरएडी अपना पैसा वापस चाहती है लेकिन गेंटन पैसा वापस नहीं करेगी क्योंकि यह काम लगभग पूरा हो चुका है. अभिषेक की ओर से लिखे गए इस ईमेल में यह भी कहा गया था कि भारतीय सेना से जुड़े कुछ ताकतवर लोग अपने हिस्से के काम की कीमत लेकर रहेंगे और अगर उन्हें पैसा नहीं चुकाया गया तो गेंटन के भारत में अन्य प्रोजैक्ट भी प्रभावित हो जाएंगे.

हालांकि इस पूरे मामले में गेंटन प्राइवेट लिमिटेड ने आरएडी से तीन करोड़ रुपए दलाली के रूप में ले तो लिए लेकिन वो इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट से बाहर नहीं करा सकी. मार्च 2012 में आरएडी और 5 अन्य विदेशी कंपनियों को भारत सरकार ने ब्लैक लिस्ट कर दिया था.

टैक्स छूट दिलवाने के नाम पर भी दलाली?

एडमंड्स एलन ने जो दस्तावेज जांच एजेंसियों को भेजे हैं, उनके मुताबिक अभिषेक वर्मा का दखल भारत सरकार के कई मंत्रालयों में है.  दस्तावेजों के मुताबिक अभिषेक वर्मा ने गेंटन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए इजराइल की एक दूरसंचार उपकरण विक्रेता कंपनी पर भारत सरकार द्वारा लगाए गए 100 मिलियन डॉलर के एंटी डंपिंग टैक्स को एक मिलियन डॉलर कमीशन के बदले माफ करवाने का वादा किया.

दिसंबर 2010 में भारत सरकार ने वाणिज्य मंत्रालय की एंटी डंपिंग नोडल एजेंसी डीजीएड की सिफारिश के बाद चीन और इजराइल की कई कंपनियों के दूरसंचार उपकरणों पर 3 से 266 प्रतिशत एंटी डंपिंग टैक्स लगाया था.

इजराइल की कंपनी ईसीआई टेलीकॉम पर यह करीब 15 मिलियन डॉलर (लगभग 75 करोड़ रुपए) बैठती. एलन द्वारा उपलब्ध करवाए दस्तावेजों के मुताबिक 27 फरवरी 2011 को ईसीआई ने गेंटन से करार कर इस टैक्स को खत्म कराने के एवज में एक मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 5 करोड़ रुपए) बतौर फीस देने का ऑफर किया.

17 दिसंबर 2011 को अभिषेक वर्मा ने ईसीआई टेलीकॉम के अधिकारी जीव काफ्तोरी को ईमेल के जरिए बताया कि भारत के प्रधानमंत्री ने विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से बातचीत कर उनसे इजराइल जाकर द्विपक्षिय वार्ता का आग्रह किया है. 9 जनवरी 2012 को कृष्णा इजराइल में होंगे और इस यात्रा के बाद वो एंटी डंपिंग ड्यूटी को हटाने की सिफारिश सरकार से करेंगे.

इस ईमेल में अभिषेक वर्मा ने जीव काफ्तोरी से यह भी कहा कि मुझसे कहा गया है कि मैं आपकी ओर से इजराइल के व्यापार मंत्रालय के जरिए कृष्णा के नाम 9/10 जनवरी को मुलाकात का आग्रह प्राप्त करवाऊं. इस बैठक के दौरान कृष्णा के समक्ष एंटी डंपिग ड्यूटी रॉलबैक का मामला लाया जाए. विदेश मंत्री कृष्णा इस संबंध में बेहद पॉजिटिव रेस्पांस देंगे और रोलबैक का मामला प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाएंगे.

जीव काफ्तोरी ईसीआई में शीर्ष अधिकारी हैं. उन्हें यह ईमेल कथित तौर पर अभिषेक वर्मा की कई ईमेल आईडी में से एक [email protected] ईमेल आईडी से भेजा गया था.

इस ईमेल में यह भी आग्रह किया गया था कि ईसीआई गेंटन के साथ किए गए अपने करार को 4 महीने और बढ़ा दे. करार के मुताबिक एंटी डंपिंग ड्यूटी रोलबैक में कामयाबी मिलने पर ईसीआई की ओर से गेंटन को एक मिलियन डॉलर फीस दी जानी थी.

(नोट: पूरी रिपोर्ट अमेरिकी नागरिक एडमंड्स एलन द्वारा भेजे गए दस्तावेज़ों और खास बातचीत पर आधारित है. इस खबर का मूल कंटेंट पहले दैनिकभास्कर डॉट कॉम पर प्रकाशित हो चुका है।) 

Loading...
Loading...

Most Popular

Loading...
To Top

Enable BeyondHeadlines to raise the voice of marginalized

 

Donate now to support more ground reports and real journalism.

Donate Now

Subscribe to email alerts from BeyondHeadlines to recieve regular updates

Subscribe to Blog via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.