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BeyondHeadlines > Latest News > धोती वाले आईसीएस कहे जाते थे चन्द्रशेखर बाबू…
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धोती वाले आईसीएस कहे जाते थे चन्द्रशेखर बाबू…

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published August 17, 2012 32 Views
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3 Min Read
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मनोरमा सिंह

बिहार के हितों के लिए संघर्ष करते हुए मैंने चन्द्रशेखर सिंह को बहुत करीब से देखा है. यह उनकी कोशिशों का ही नतीजा है कि आज बिहार में कहलगांव जैसा बड़ा बिजली घर है. पटना में इंदिरा गांधी इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस है. राज्य के राजस्व मंत्री के रूप में उन्होंने न सिर्फ सिलिंग एक्ट लागू किया बल्कि अपने हिस्से की 14 एकड़ ज़मीन भी सरकार को दे दी. केन्द्र में मंत्री के रूप में पहली बार देश की टेक्सटाईल पॉलिसी बनाई. निफ्ट जैसी संस्था उनकी कल्पना की ही देन है. उनका एक-एक क़दम विकास और गरीबों के हित को समर्पित था.

मुख्यमंत्री के रूप में तो उन्होंने बिहार को ओवरड्राफ्ट से बाहर निकालने जैसा बड़ा काम किया. पूरे कार्यकाल में एक भी पीतपत्र नहीं लिखा.

श्री सिंह बचपन से ही प्रतिभावान थे. जनसेवा की भावना से भी वह शुरू से ओतप्रोत थे. मेरी शादी तो उनके साथ विधायक बनने के बाद 1953 में हुई. उन्होंने मुझे बताया था कि मात्र 13 वर्ष की आयु में मुंगेर के ज़िला स्कूल से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक पास किया था. 1948 में मास्टर डिग्री लेने के बाद 1952 में पहली बार विधायक बने. उस समय वह सबसे कम उम्र के विधायक थे. कभी-कभी मुझे भी विधानसभा लेकर जाते थे. मैं दर्शक दीर्घा से उनकी गतिविधियां देखती थी. पढ़ाई में उनकी दिलचस्पी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रतिदिन वह हाथ में किताब लिए ही सो जाते थे. पुस्तकें उनकी सबसे बड़ी व अच्छी दोस्त थीं. काम से जब भी छूट्टी मिलती थी, पुस्तकों में डूब जाते थे.

अफसर चन्द्रशेखर बाबू को धोती कुर्ता वाले आईसीएस (भारतीय असैनिक सेवा) अधिकारी कहते थे. वह बातें बहुत कम करते थे. काम में उनका विश्वास था. यही कारण है कि लोग उन्हें ‘मैन ऑफ फ्यू वर्ड्स’ भी कहते थे. इंदिरा जी ने उन्हें बिहार की स्थिति को दुरूस्त करने के लिए मुख्यमंत्री बनाया था. डेढ़ साल राजीव गांधी को उनकी ज़रूरत महसूस हुई तो उन्होंने केन्द्र में बुला लिया. लेकिन वहां भी ईमानदारी से काम करते रहे.

हालांकि बीच में कई बार लॉबीबाज उन्हें परेशान करते थे. एक बार तो उन्होंने यहां तक कह दिया कि ‘अब हमारे जैसे लोगों को सोचना पड़ेगा कि राजनीति में आएं या नहीं, विरोधियों से लड़ना आसान है, अपनो से कैसे लड़ा जाए’.

उनके निधन के बाद राजनीति में मेरी भी रूची नहीं रही. लेकिन राजीव गांधी जी ने मुझे बुलाकर चुनाव लड़ने को कहा तो मैं इन्कार नहीं कर सकी.

(लेखिका बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चन्द्रशेखर सिंह की धर्मपत्नी व पूर्व सांसद हैं.)   

TAGGED:Chandra Shekhar singhFormer Chief Minister of Bihar Chandra Shekhar Singhचन्द्रशेखर सिंह
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