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डेंगू : हजारों करोड़ खर्च के बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात

BeyondHeadlines News Desk

भारत में साल 2006 में डेंगू के महामारी बनने के बाद सरकार ने आनन-फानन में वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया था जिसके तहत वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए हर साल सैंकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं. डेंगू, मलेरिया, चिकगूनिया, काले बुखार, फिलारिया और जापानी बुखार की रोकथाम के लिए सरकार ने साल 2007 में नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया था. प्रोग्राम के शुरू होने के बाद से इन रोगों के नाम पर कई हजार करोड़ रुपये तो खर्च किए जा चुके हैं लेकिन अभी तक इन रोगों पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका. आंकड़ों पर नज़र डाले तो सरकार का खर्चा और मरीजों की संख्या दोनों ही लगातार बढ़ती जा रही है.

सूचना के अधिकार के जरिए BeyondHeadlines को प्राप्त जानकारी के मुताबिक साल 2005-06 में सरकार ने वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के कार्यक्रमों के लिए कुल 348.45 करोड़ रुपये जारी किए थे जिनमें से 260.45 करोड़ रुपये विभिन्न कार्यक्रमों पर खर्च कर दिए गए. साल 2006-07 में भी सरकार ने रोकथाम के कार्यक्रमों के लिए कुल 371.58 करोड़ रुपये जारी किए थे जिनमें से 318.13 करोड़ रुपये विभिन्न कार्यक्रमों पर खर्च कर दिए गए. उसी तरह साल 2007-08 में सरकार ने वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के कार्यक्रमों के लिए कुल 399.50 करोड़ रुपये जारी किए थे जिनमें से 386.36 करोड़ रुपये विभिन्न कार्यक्रमों पर खर्च कर दिए गए. साल 2008-09 में सरकार ने वेक्टर जनित रोगों के लिए 472.25 करोड़ रुपये मंजूर किए जिनमें से मात्र 297.62 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके. साल 2009-10 में सरकार ने 442.25 करोड़ रुपये मंजूर किए थे जबकि कार्यक्रमों पर कुल 338.87 करोड़ रुपये ही खर्च हुए. साल 2010-11 के लिए सरकार ने 418 करोड़ रुपये मंजूर किए थे जिनमें से 408.41 करोड़ रुपये विभाग ने विभिन्न कार्यक्रमों पर खर्च कर दिए. वित्त वर्ष 2011-12 के लिए वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए 520 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ जिनमें से 511.41 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

वहीं आंकड़े बताते हैं कि मरीज़ों की संख्या घटने के बजाए लगातार बढ़ती ही  जा रही है. नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के आंकड़ों के मुताबिक साल 2007 में भारत में डेंगू के कुल 5554 मामले सामने आए और 69 मरीजों की मौत हो गई, साल 2008 में 12561 मामले सामने आए और 80 मरीजों की मौत हो गई, साल 2009 में 15535 डेंगू के मामले सामने आए और 96 मरीजों की मौत हो गई जबकि साल 2010 में 28292 डेंगू के मामले रिपोर्ट किए गए और 110 की मौत हुई. साल 2011 में कुल 18860 मामले सामने आए और 169 की जान चली गई जबकि 26 सितंबर 2012 तक देश भर में डेंगू के कुल 17104 मामले सामने आए जिनमें 100 की मौत हुई.

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