Ilyaskhan Pathan for BeyondHeadlines
गुजरात के राजकोट जिले में वांकानेर शहर की तहसिल का गाँव है कणकोट. जहाँ की महिला सरपंच को देश की सबसे कम उम्र की युवा सरपंच बनने का गौरव हासिल है. इस युवा सरपंच का नाम अफ़शाना है, जिसकी उम्र मात्र 19 साल है.
अफशाना मोहम्मद बादी का जन्म कणकोट में ही 07 नवम्बर, 1993 को हुआ था. वो 9 वीं कक्षा तक पढ़ी है. इसके पिता मोहम्मद बादी और माता अमीना बादी भी कणकोट के पूर्व सरपंच रह चुके है. मोहम्मद बादी के चाचा भी लगातार 15 वर्षो तक कनकोट के सरपंच रहे थे. दरअसल, अफ़शाना का परिवार पिछले 25 सालों से राजनीति से जुड़ा है. हालांकि पेशे से पूरा परिवार किसान है. अफशाना के पिता मोहम्मद बादी फिलहाल कणकोट वन संरक्षण समिति (KVSS) के प्रमुख भी हैं.
3000 से अधिक आबादी वाले कणकोट में पंचायत चुनाव के लिए 3 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे. जिनमें से एक नाम 19 वर्षीय अफशाना का था, जिसे गाँव के 40 फीसदी से अधिक वोट मिले और वो चुनाव जीत गई. अफ़शाना के लिए यह सबसे ख़ुशी का पल था.
अफ़शाना BeyondHeadlines को बताती है कि मैं बचपन से ही माता-पिता की तरह गाँव की सरपंच बनना चाहती थी. साथ ही मुझे सौ फीसदी यक़ीन था कि अगर चुनाव लड़ी तो अवश्य ही जीतूंगी.
अफशाना के पिता मोहम्मद बादी बताते हैं कि जब हम अफ़शाना को लेकर नॉमिनेशन फॉर्म भरने चुनाव अधिकारी के पास गए थे. चुनाव अधिकारी इसे देखकर हैरान था. तभी ही अफ़शाना चुनाव अधिकारी को कहा कि देख क्या रहे हैं? चुनाव तो मैं ही जीतने वाली हूं. आप चाहे तो अभी ही मुंह मीठा कर लीजिये. यही नहीं, अफ़शाना की मां बताती है कि जब वो सरपंच पद पर थी तब भी वो मुझसे कहती थी कि आप यह कुर्सी मुझे दे दीजिये, मैं गाँव का विकास करुँगी.
अफ़शाना बताती है कि सरपंच बनने के बाद पहली बार जब अपने ही स्कूल में अपने हाथों से ध्वज वंदन किया तब मैं भावुक हो गई थी. जे.के.टी. स्कुल के प्रिंसिपल अजय सिंह राणा, जो अफ़शाना के टीचर रहे चुके हैं. वो बताते हैं कि अफशाना जब मेरे पास पढ़ती थी तब वो कभी-कभी मजाक में मुझे भी कहती थी कि सर! जब मैं सरपंच बनुंगी तो स्कुल में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं करुँगी. आप सभी को स्कुल के नियमों का पालन करवाउंगी. एक शिक्षक की हैसियत से मुझे गर्व है कि मेरी ही एक छात्रा आज हमारे गाँव की सरपंच है. जो गांव के हर बच्चे को पढ़ाना चाहती है.
अफ़शाना बादी ने सरपंच बनने के बाद सबसे पहले अपने स्कूल के विकास पर ध्यान दिया. गांव के अधिक से अधिक बच्चे पढ़ सकें, इसलिए स्कूल में 6 नए कमरे बनाने का काम मंजूर करवाया, जो काम आज पूर्ण भी हो चूका है.
अफ़शाना कहती है कि मैं हाई स्कूल में पढ़ने के लिए 5 किलो मीटर दूर के गाँव सिन्धावादर में जाती थी. क्योंकि मेरे गांव में स्कूल नहीं था. हालांकि आज भी मेरे गाँव में हाईस्कूल नहीं है. मैं अब अपने इस गांव में ही हाईस्कूल बनवाने जा रही हूं, ताकि गांव के किसी बच्चे को गांव से बाहर न जाना पड़े. और स्कूल करीब रहेगा तो हर कोई लड़की को पढ़ाना चाहेगा, जो दूर की वजह से स्कूल भेजने से कतराते हैं.
अफ़शाना सरपंच बनने का सपना पूरा होने के पीछे अपने गांव के लोगों के सहयोग को जिम्मेदार मानती है. वो कहती है कि सरपंच बनने के बाद मुझे गांव के लोग काफी सम्मान देते हैं. पर मैं चाहती हूं कि हमारे गांव का नागरिक सम्मान के साथ जीए.
सोनिया गाँधी को अपना रोल मॉडल मानने वाली अफ़शाना का एक सपना अब भी अधूरा है. वो कहती है कि जब मैं टीवी पर पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिन्ना रब्बानी को देखती हूं तो मेरी भी ये ख्वाहिश होती है कि मैं भी कभी हिना रब्बानी की तरह अपने देश की विदेश मंत्री बनूंगी और फिर उसके बाद सोनिया गांधी की तरह देश को चलाउंगी.
