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देश में आतंकवाद की जड़ है आईबी…

BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी, आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी कर दोषी पुलिस व आईबी के अधिकारियों को गिरफ्तार करने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को तत्काल रिहा करने की मांग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चित कालीन धरना 24वें दिन भी जारी रहा. आज क्रमिक उपवास पर सामाजिक कार्यकता व पत्रकार हरेराम मिश्र बैठे.

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ में आईबी के विशेष निदेशक राजेन्द्र कुमार को बचाने के लिए केन्द्रिय गृह सचिव आर.के. सिंह ने जिस तरह से आईबी के निदेशक आसिफ इब्राहिम और सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा को एक साथ बैठाकर आईबी के अधिकारियों के मनोबल गिरने के नाम पर मासूम इशरत जहां के कातिल राजेन्द्र कुमार को बचाने में लगी है, उसने साफ़ कर दिया है कि पूरा तंत्र किस तरह राज्य प्रायोजित आतंकवाद का संरक्षण कर रहा है. जिस तरह से केन्द्रिय गृह सचिव आर.के. सिंह ने इशरत के हत्यारे राजेन्द्र कुमार को बचाने के लिए मुहीम छेड़ी हुई है, उन्हें यह भी बताना चाहिए कि इशरत के न्याय के सवाल पर क्या कभी इस तरह उन्होंने बैठकें की?

Why Govt afarid by the expore of IB's involvement in teroor casesआज राजेन्द्र कुमार अपने बूढ़े पिता की देखभाल करने के नाम पर गिरफ्तारी से बचने के लिए जो तर्क गढ़ रहे हैं क्या यह अधिकार देश की आम जनता को भी राज्य देता है. अभी कुछ दिनों पहले ही आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह यूपी के शहबाज़ जो जयपुर की जेल में बंद है उसकी मां की लंबी बीमारी के बाद 26 मई को मृत्यु हो गई और वो अपनी मां की मिट्टी में आना चाहता था, पर नहीं आ पाया. ऐसे ही मरहूम खालिद के चचा का भतीजे के गम में हार्ट अटैक हो गया था, पर उसे तो कभी मिलने की इजाज़त नहीं दी गई. ऐसे सैकड़ों बेगुनाहों के उदाहरण हैं.

धरने को संबोधित करते हुए रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव ने कहा कि जिस तरह राजेन्द्र कुमार के बारे में सीबीआई ने कहा है कि इशरत जहां की हत्या के बाद उसकी लाश के पास से जो एक 47 मिली थी उसे राजेन्द्र कुमार ने ही मुहैया कराया था.

ठीक इसी तरह 23 दिसंबर 2007 को खालिद और तारिक़ की फर्जी गिरफ्तारी के बाद यूपी एसटीएफ ने इन दोनों के पास से डेढ़ किलो आरडीएक्स समेत अन्य विस्फोटक पदार्थों बरामदगी का दावा किया था. आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट जो खालिद-तारिक की गिरफ्तारी को झूठी बताती है. उसके बाद यह अहम सवाल उठता है कि पुलिस के पास इतने बड़े पैमाने पर विस्फोटक कहां से आया. दरअसल, तारिक-खालिद जिनका पहले ही यूपी एसटीएफ ने अपहरण कर लिया था की झूठी गिरफ्तारी भी इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ की तरह ही केंद्रिय सूचना इकाई के इनपुट पर हुई थी. ऐसे में यह बात साबित होती है कि जिस तरह से गुजरात में राजेन्द्र कुमार ने बंजारा-सिंघल एंड कम्पनी को एके 47 उपलब्ध करवाई थी. ठीक उसी तरह केन्द्रिय सूचना इकाई ने उत्तर प्रदेश एसटीएफ को भी आरडीएक्स और अन्य विस्फोटकों को मुहैया कराया था.

धरने को संबोधित करते हुए पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण प्रसाद और हरे राम मिश्र ने कहा कि राजेन्द्र कुमार के हाथ जिस तरह से मासूम इशरत के खून से रंगे हैं, ठीक उसी तरह से खालिद की हत्या में विक्रम सिंह, बृजलाल, मनोज कुमार झा, अमिताभ यश समेत आईबी के अधिकारियों का हाथ है. ऐसे में अगर कोई गृह सचिव आरके सिंह हों या फिर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हों अगर वे इन आतंकवाद में संलिप्त दोषी पुलिस अधिकारियों को बचाना चाहते हैं तो इनका स्थान भी जेल की सीखचों के पीछे है.

धरने को संबोधित करते हुए आजमगढ़ रिहाई मंच के नेता तारिक़ शफीक़ ने कहा कि इस सरकार में कानून और व्यवस्था की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है. उन्होंने कहा कि सीपीआई एमएल कार्यकर्ता राम जन्म बनवासी के ऊपर गाजीपुर जिले के सैदपुर में जिस तरह से कातिलाना हमला किया गया. यह साबित करता है कि अब सरकार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही है तथा अपने पालतू गुंडों से उनकी निर्मम पिटाई तथा कत्ल करवाने से भी गुरेज नहीं कर रही है.

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार शिवदास प्रजापति ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि इस सरकार में आम आदमी की तो कोई हैसियत ही नहीं बची है. आज दिन दहाड़े जिस तरह से इलाहाबाद के बारा थाने में एसएचओ आरपी द्विवेदी की सपा के खनन माफियाओं ने गोली मारकर हत्या कर दी उससे साफ होता है कि सरकार जब पुलिस के मनोबल को बचाने की बात करती है तो दरअसल वो मनोबल के नाम पर अपराधियों और आतंकियों का संरक्षण करती है. ठीक यही काम वह खालिद के हत्यारों को बचाकर आईबी, पुलिस व आतंकवाद के गठजोड़ को छुपाने की हर संभव कोशिश में है. अभी कुछ ही दिनों पहले कुंडा के रघुराज प्रताप सिंह ने जिया उल हक की हत्या कराई तो आज फिर शंकरगढ़ के सपा समर्थित राजा के लोगों ने एसएचओ को गोली मार दिया. उत्तर प्रदेश में कानून के राज की जगह सांमातों रजवाड़ों का गुंडा राज कायम हो गया है.

रिहाई मंच के प्रवक्ता ने बताया कि कल अनिश्चित कालीन धरने के पच्चीसवें दिन इलाहाबाद में सपाई गुड़ों द्वारा मारे गए पुलिस अधिकारी आरपी द्विवेदी के सम्मान में एक शोक सभा दोपहर एक बजे धरने स्थल पर आयोजित होगी. कल रिहाई मंच विरोध दिवस मनाएगा.

धरने का संचालन लक्ष्मण प्रसाद ने किया. धरने को पिछड़ा महासंघ के एहसानुल हक मलिक, सोशलिस्ट फ्रंट के मो0 आफाक, शुएब, एनएलपी के शहबान करीमी, आरिफ नसीम, मौलाना कमर सीतापुरी, शिब्ली बेग, असद हयात, वाराणसी से जेडए हाशमी, असदुल्ला, मो0 फैज, पीस पार्टी प्रतापगढ़ के शम्स तबरेज़ खान, मो0 अकबर, अमित मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार अजय सिंह, प्रगतिशील लेखक संघ की किरन सिंह, ईजपा के इसरारुल हक सिद्दीकी, अखिलेश सक्सेना, जुबैर जौनपुरी, फैजेरब ने संबोधित किया.

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