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Reading: बाटला हाऊस कांड में डीसीपी आलोक कुमार की भूमिका को क्यों छुपाया गया?
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BeyondHeadlines > India > बाटला हाऊस कांड में डीसीपी आलोक कुमार की भूमिका को क्यों छुपाया गया?
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बाटला हाऊस कांड में डीसीपी आलोक कुमार की भूमिका को क्यों छुपाया गया?

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published August 1, 2013 21 Views
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10 Min Read
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BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : रिहाई मंच ने लखनऊ में शिया-सुन्नी के नाम पर हुई हिंसक घटनाओं और तोड़-फोड़ को सपा सरकार की सोची समझी साजिश का नतीजा बताया है. मंच का आरोप है कि मुसलमानों के सपा से दूर होते जाने और मुस्लिम समुदाय द्वारा उसे 2014 में सबक सिखाने की तैयारी से डरी सरकार ने मुसलमानों के बीच सामुदायिक संघर्ष कराकर वोटों को बिखेरने की रणनीति के तहत ऐसा किया है.

रिहाई मंच ने लखनऊ की अमन पसंद अवाम से अपील किया कि वो सरकार की ऐसी साजिशों पर नज़र रखे और किसी भी कीमत पर शहर का माहौल न बिगड़ने दें, क्योंकि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आएंगे सपा भाजपा को मज़बूत करने के लिए इस तरह के आपराधिक हथकंडे अपनाएगी.

batla house encounter and role of dcp alok kumarरिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज़ आलम और राजीव यादव ने कहा कि बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ मामले में जिस तरह पुलिस डीसीपी आलोक कुमार की मौका-ए-वारदात, एल-18 पर मौजूदगी को शुरू से ही छुपाई जाती रही है उससे इस शक को और बल मिलता है कि इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या के पीछे पुलिस की कोई सोची समझी साजिश है.

उन्होंने कहा कि बटला कांड के ठीक बाद जारी तस्वीरों और वीडियो फुटेज में डीसीपी आलोक कुमार को हाथ में रिवालवर लिए दिखाया गया, लेकिन बावजूद इसके न तो एफआईआर में और ना बाकी तफ्तीशों में ही उनकी मौजूदगी दर्ज की गयी. जिसका सीधा मतलब है कि पुलिस किसी गहरे राज को छुपाने के लिए उनकी उपस्थिति को छुपाना चाहती है.

उन्होंने मांग की कि अगर सरकार सचमुच लोकतंत्र और न्याय में यकीन रखती है तो उसे बटला हाऊस कांड के दिन, 19 सितम्बर 2008 के डीसीपी आलोक कुमार कि दिनचर्या और मोबाइल कॉल डिटेल सावर्जनिक करना चाहिए ताकि जनता बटला कांड की सच्चाई जान सके.

रिहाई मंच के नेताओं ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा यह कहानी गढ़ना कि शहजाद ने मोहन चंद शर्मा की हत्या करने के बाद पिस्तौल गंग नहर में फेंक दिया, भी आलोक कुमार द्वारा मोहन चंद शर्मा की हत्या किए जाने के शक को पुष्ट करता है. क्योंकि पुलिस द्वारा जांच में इस बात का उल्लेख बिल्कुल ही नहीं किया गया कि उसने शहजाद द्वारा गंग नहर में फेंके गए असलहे की बरामदगी के लिए क्या-क्या कोशिशें की और जिन गोताखोरों का इस्तेमाल किया गया उनके नाम क्या थे.

हाजी फहीम सिद्दीकी और सैयद मोईद अहमद ने कहा कि मौलाना तारिक कासमी की रिहाई, मौलाना खालिद मुजाहिद की पुलिस कस्टडी में हत्या और उनके हत्यारे पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी को लेकर रिहाई मंच का 22 मई से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अमन व अमान के साथ शांति पूर्ण तरीके से आज 72 दिन पूरे कर लिए लेकिन प्रदेश की अखिलेश सरकार ने अभी तक वादे के मुताबिक मानसून सत्र न बुलाकर आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर कोई अमल नहीं किया.

रमजान का मुबारक महीना जो कि इबादत का महीना है. इस महीने में भी तमाम इंसाफ पसन्द हिंदू व मुसलमाना दोनों ही इस नांइंसाफी के खिलाफ काधें से काधां मिलाकर आवाज़ उठा रहे हैं. अल्लाह ताला रोज़ेदारों की दुआवों को कुबूल फरमाता है, कल जुमा अलविदा है, इस मौके पर तमाम इमाम ए मसाजिद से गुजारिश है कि वो जुमे के खुतबे के वक्त जो बेगुनाह जेलों में बंद हैं उनकी रिहाई के लिए इज्तमाई दुआ फरमाएं. रिहाई मंच जो कि इस नाइंसाफी के खिलाफ जद्दोजहद कर रहा है उसकी कामयाबी की भी दुआ करें.

मौजूदा सपा की नाकाम सरकार सोलह महीने की मुद्दत में 33 फसाद हो चुके हैं, अल्लाह ऐसी सरकार से निजात दिलाए. तमाम अहले ईमान से गुजारिश है कि अपनी मसरुफियत में से थोड़ा वक्त निकालकर रिहाई मंच की इस तहरीक में शामिल हों, यह भी एक जम्हूरी जिहाद है.

धरने के समर्थन में आए शोषित समाज दल के नेता केदारनाथ सचान ने कहा कि सपा मनुवादी एजेण्डे के तहत अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और दलितों के खिलाफ राज्य प्रायोजित हिंसा करवाकर भाजपा को मज़बूत करना चाहती है. इससे अवाम को सावधान रहना होगा.

मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पाण्डे ने कहा कि सपा सरकार जिस तरीके से आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को लेकर गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाए हुए है वो इस मुल्क की सुरक्षा के लिए उचित नहीं है. क्योंकि इस सवाल को सिर्फ इतने तक रखकर नहीं देखना चाहिए कि इससे बेगुनाहों पर जो आतंकी का ठप्पा लगा है वो हट जाएगा बल्कि इसे इस स्तर पर देखना चाहिए कि आतंकवाद को लेकर सरकारों की क्या नीति है और सुरक्षा एजेंसियां चाहे वो आईबी हो, एटीएस या एसटीएफ हो वो किस तरह से वैश्विक टेरर पॉलिटिक्स के आधार पर भारत के मुसलमानों पर हमलवार हैं.

धरने को संबोधित करते हुए इलाहाबाद से आए ऑल इंडिया स्टूडेन्ट एसोसिएशन (आइसा) के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि सपा सरकार अल्पसंख्यक, पिछड़ा व दलित विरोधी है. इस बात को स्पष्ट तरीके से देखा जा सकता है कि दो दिनों पहले इसी विधानसभा धरना स्थल पर जब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षण की मांग को लेकर हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, उन पर तथाकथित पिछड़े वर्ग की सरकार उनकी मांग को मानने बजाए लाठी चलवाती है.

आज यूपी सरकार ने प्रतापगढ़ के ईमानदार सीओ जियाउल हक की हत्या करवाने वाले दोषी रघुराज प्रताप सिंह को सीबीआई से क्लीन चिट दिलवा दिया. जिस तरीके से सपा के रंग में रंगे होर्डिग से प्रदेश की राजधानी को पाटा जा रहा है कि ‘सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं’ वो इस प्रदेश सरकार की विकृत सामंती सोच को दर्शाता है कि किस तरह वो अन्याय करके उसको न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रही है.

जिस तरीके से पिछले 72 दिनों से आतंकवाद के नाम पर बेगुनाहों की रिहाई के सवाल पर रिहाई मंच संघर्ष कर रहा है, ऐसे में मुस्लिम समाज को यह बात समझ लेनी चाहिए कि जिस सामाजिक न्याय और मंडल कमीशन की राजनीति से पैदा हुई सपा पिछड़े वर्ग की नहीं हुई वो मुसलमानों की कभी नहीं हो सकती है.

धरने को संबोधित करते हुए डा0 अली अहमद कासमी ने कहा कि सरकार ने जिस तरीके से हम रोजदारों को रिहाई मंच की मांगों को न मांग कर धरने पर बैठने के लिए मजबूर किया है उसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ेगा. बेगुनाहों की रिहाई के इस आंदोलन को तोड़ने के लिए सपा सरकार ने रिहाई मंच का टेंट नहीं उखड़वाया बल्कि आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की आवाज को खामोश करने की कोशिश की उसका जवाब हमने यहीं दे दिया कि हमने हर मुश्किलात में इस संघर्ष को चलाया और बेगुनहों की रिहाई तक यह मुहीम चलती रहेगी.

इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान और मुस्लिम मजलिस के जैद अहमद फारुकी ने कहा कि सरकारें जनता का ध्यान बुनियादी सवालों से हटाने के लिए कभी आतंकवाद का हौव्वा खड़ा करती हैं तो कभी दंगे का सहारा लेती है. जिस तरीके से सपा सरकार ने दंगों को हथियार बनाया है यह एक पुरानी चाल थी जिसे आज जनता समझ चुकी है. लेकिन सत्ता के नशे में चूर सपा को समझ में नहीं आ रहा है. इसलिए आने वाले चुनाव में ही उसे इसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा उसका अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा.

रिहाई मंच के नेता हरेराम मिश्र ने परिवहन निगम संविदा/नियमित कर्मचारी संघर्ष मोर्चा उत्तर प्रदेश के विधान सभा पर चल रहे धरने का समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरीके से सार्वजनिक क्षेत्रों को बेचने की अखिलेश यादव तैयारी कर रहे है उसकी भरपाई लैपटाप रुपी लेमन चूस से नहीं हो सकती. ऐसे में परिवहन से जुड़े कर्मचारियों की मांग प्रदेश सरकार तत्तकाल मांगे.

उत्तर प्रदेश की कचहरियों में सन् 2007 में हुए सिलसिलेवार धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फंसाए गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और खालिद के हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को 72 वें दिन भी जारी रहा.

धरने में भारतीय एकता पार्टी (एम) के सैय्यद मोईद अहमद, संदीप पांडे, शिबली बेग, तुगरल, मोहम्मद सुलेमान, केदार नाथ सचान, पीसी कुरील, भवननाथ पासवान, ब्रजेश दिक्षित, एहसानुल हक मलिक, मौलाना कमर सीतापुरी, डॉ. अली अहमद कासमी, असदुल्ला, अमित मिश्रा, राजकुमार, मुख्तार अहमद, सुनील मौर्या, हाजी फहीम सिद्दीकी, हरे राम मिश्रा, बब्लू यादव, मोहम्मद फैज़, शाहनवाज़ आलम और राजीव यादव आदि शामिल रहे.

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