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BeyondHeadlines > India > ईद के दिन काली पट्टी बांधकर अवाम करेगी सपा सरकार का विरोध
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ईद के दिन काली पट्टी बांधकर अवाम करेगी सपा सरकार का विरोध

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Beyond Headlines Published August 5, 2013 13 Views
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BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सपा सरकार द्वारा आयोजित रोजा इफ्तार में शिरकत करने वाले लोग आवाम के साथ धोखेबाजी कर रहे हैं. सपा सरकार के हाथ बेगुनाह मौलाना खालिद की हत्या से निकले खून से रंगे हुए हैं. जिन्होंने सरकार के इस अफ्तार में भाग लिया है वे कौम के गद्दार हैं.

हमारी लड़ाई हक़ और इंसाफ के लिए है तथा हम मुसलमानों के अंधेरे भविष्य को लेकर चिंतित हैं. जिन कथित उलेमाओं और दलाल मुस्लिम नेताओं ने मुख्यमंत्री के रोजा इफ्तार में शिरकत की, उनकी गिनती इतिहास के पन्नों में मीर जाफ़र और जय चन्द सरीखे गद्दारों में होगी.

उपरोक्त बातें रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने खालिद मुजाहिद की हत्या के बाद उनके कातिल पुलिस और खुफिया अधिकारियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग को लेकर पिछले 76 दिनों से चल रहे रिहाई मंच के अनिश्चित कालीन धरने को संबोधित करते हुए कहीं.

History will never forgive broker Ulemasउन्होंने कहा कि यह कितने शर्म की बात है कि अपने को लोहिया का वारिस बताने वाली सपा सरकार आज लोकतंत्र की हत्या करने पर उतारू हो चुकी है. प्रदेश के हिन्दू और मुसलमानों को, शिया तथा सुन्नीयों को आपस में लड़ाने का खेल खेल रही है. सरकार की केवल एक ही उपलब्धि है बत्तीस दंगे और बेकसूरों की पुलिस हिरासत में हत्या.

उन्होंने कहा कि मुलायम सरकार का आगामी लोकसभा चुनाव में जनाजा निकलना तय है. उसकी पटकथा रिहाई मंच के लोग धरना स्थल पर बैठकर रोज़ लिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि सपा सरकार की वादा खिलाफी के चलते आतंकवाद के नाम पर कैद हमारे बेगुनाह भाई जेलों में ईद के मौके पर बेबस सलाखों के पीछे पड़े हैं. उनके परिजन इस मौके पर मायूस हैं और ये कौम के दलाल लोग उन्हीं हुक्मरान के यहां इफ्तार कर रहे हैं.

धरने को संबोधित करते हुए इंडियन नेशनल लीग के अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि विधानसभा का मानसून सत्र न बुलाकर सपा सरकार सिर्फ मुसलमानों को ही धोखा नहीं दे रही है बल्कि सपाई गुंडा राज से त्रस्त सूबे के पूरे आवाम को धोखा दे रही है क्योंकि लोकतंत्र में सदन के भीतर ही जनता के सवालों का जवाब देना होता है. लेकिन यह सरकार इन सवालों से डरी हुई है.

धरने को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता असद हयात ने कहा कि आज इस सरकार में मुसलमानों के पूजा स्थल पर सांप्रदायिक लोगों द्वारा जबरन कब्जा किया जा रहा है. उनहोंने कहा कि सांप्रदायिक जेहनियत के लोग अल्पसंख्यक मुसलमानों को धमकाते रहते हैं.

उन्होंने कहा कि बदायूं जिले में एक गावं बकसुआ है, जहां पर मदरसा चलता है. यह सपा विधायक धर्मेन्द्र यादव का निर्वाचन क्षेत्र है. गांव की सांप्रदायिक ताकतों ने पहले मस्जिद पर लगे माइक को उतरवा दिया और उसके बाद अब अजान भी नहीं करने देते. इस समय गांव में भय का माहौल है. भय का आलम यह है कि मुसलमान माइक पर नमाज़ नहीं पढ़ सकते. उन्होंने सवाल दागा कि क्या यही इस देश का लोकतंत्र है.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के ओरैया में मुसलमानों को मस्जिद नहीं बनाने दी जा रही है और यहां सरकार इफ्तार का ड्रामा रच रही है. उन्होंने पूछा कि इसकी क्या ज़रूरत है. औरैया में पिछले बीस सालों में मस्जिदों पर कब्जा करने का खेल बेखौफ जारी है. आजमगढ़ की लोहरा मस्जिद में सुप्रीम कोर्ट से मुक़दमा जीतने के बाद भी लोग बकरीद पर कर्बानी नहीं कर पाते.

उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री के इशारे पर अस्थान में जो दंगा हुआ उसमें नाबालिग लड़कों पर गैंगस्टर लगा दिया गया. अब सब सच्चाई खुलकर सामने आ गयी है.  इस सरकार में प्रदेश के मुसलमान बिल्कुल ही सुरक्षित नहीं हैं.

धरने को संबोधित करते हुए मुस्लिम मजलिस के प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव और उनका कुनबा इस मुगालते में न रहे कि सरकार परस्त उलेमाओं को इफ्तार कराकर डेढ़ साल में बत्तीस दंगे, वरुण गांधी जैसे दंगाई पर से मुक़दमा हटवाने, खालिद मुजाहिद की हत्या और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नैजवानों को छोड़ने के वादे से वादा खिलाफी से मुसलमानों में चल रहे सपा विरोधी लहर को नहीं रोक सकते.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा के वोटों से राज्य सभा में पहुंचने वाले एक सांसद अपने को स्वतंत्र सांसद बताते हुए प्रदेश में 2014 के चुनाव में फेडरल फ्रंट बना कर मुस्लिम उम्मीदवारों को लड़ाने की बात करके मुसलमानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें सबसे पहले तो यह बताना चाहिए कि वे अपने को स्वतंत्र सांसद संविधान के किस नियम के अनुसार बताते हैं. उन्हें बताना चाहिए कि राज्य सभा में आये हर प्रस्ताव पर वे कांग्रेस के पक्ष में क्यों वोट देते हैं.

धरने को संबोधित करते हुए उन्नाव से आये पत्रकार आलोक अग्निहोत्री ने कहा कि रिहाई मंच के इस धरने ने केवल खालिद मुजाहिद की शहादत के सवाल को ही नहीं वरन व्यापक कौम के सवालातों को एक व्यापक आयाम दिया है जिससे सपा सरकार की बुनियाद हिल गयी है. मंच ने अपनी मांगों मे जो लोकतांत्रिक सवाल उठाए हैं उनको पूरा करने की हिम्मत सपा सरकार में नहीं है. इसीलिए वह मानसून सत्र को लगातार टालती जा रही है और पूरे प्रदेश के व्यापक जनवादी सवालों की भी उपेक्षा कर रही है जबकि उसे निमेष कमीशन की रिपोर्ट को जल्द से जल्द विधानसभ के पटल पर लाकर जनता के बीच आम करना चाहिए. जिससे जेलों में बंद बेगुनाहों को रिहाई मिलने का रास्ता साफ हो जाय.

मंच ने 2014 के आम चुनाव के लिए आम जनमानस की आखों पर एक साफ सुथरा निष्पक्ष चश्मा पहना दिया है. अब सारी जनपक्षीय व जनवादी ताकतों को एक मंच पर आकर जनता को सही नेतृत्व प्रदान करना चाहिए.

भारतीय एकता पार्टी(एम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैय्यद मोईद अहमद ने कहा कि अलविदा की नमाज़ में जिस तरह मुसलमानों ने बेगुनाहों की रिहाई के लिए दुआ मांगी वह जम्हूरियत की लड़ाई के इतिहास में एक अहम घटना थी. जिसका खामियाजा सपा को भुगतना होगा.

उन्होंने आवाम से अपील की कि ईद की नमाज़ में भी बेगुनाहों की रिहाई के लिए दुआ मांगें और बाजुओं पर भी पट्टी बांधकर जेलों में कैद बेगुनाहों के गम में भी शरीक हों.

धरने को संबोधित करते हुए पिछडा समाज महासभा के एहसानुल हक़ मलिक और शेख इरफान ने कहा कि मुलायम और अखिलेश के यहां जो उलेमा इफ्तार करने गये थे वे अपने इलाकों से एक छोटा सा चुनाव भी नहीं जीत सकते. अगर मुलायम इन दलालों के ज़रिये 2014 में प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुलायम पर अब उम्र हावी होने लगी है.

धरने का संचालन तारिक़ शफीक़ ने किया. इस अवसर पर बब्लू यादव, कमर इरशाद, मोहम्मद असलम, इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी, पीसी कुरील, मोहम्मद फैज, राजेश कुमार, ब्रजेश कुमार, शिवदास प्रजापति, यास्मीन बानो, आदियोग, हरेराम मिश्र, राजीव यादव शाहनवाज आलम इत्यादि मौजूद थे.

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