Alok Kumar for BeyondHeadlines
गुजरात के उद्योगपति सोहेल हिंगोरा के अपहरण की कहानी बिहार से जुड़ी है. कौन है इसके पीछे ? अटकलों का दौर जारी है. मीडिया भी तरह-तरह के कयास लगा रही है. लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार जी की तिलमिलाहट समझ से परे है? कहीं कोई “तीरंदाज़” तो नहीं शामिल है? वैसे भी आज की तारीख में बिहार के सभी “सक्रिय सूरमा” ‘तीर’ ढोने में ही लगे हैं.
पुलिसिया-सूत्र सारण क्षेत्र की एक जदयू विधायिका के बाहुबली और आपराधिक इतिहास वाले पति की संलिप्तता की बात कर रहे हैं. लेकिन कार्रवाई में कोताही क्यूं बरती जा रही है, वो भी तब जब “न्याय के साथ विकास का सुशासनी नारा” लगाया जा रहा हो? कहीं इस काण्ड में विधायिका के पति से भी बड़े “सूरमाओं” की सरपरस्ती तो नहीं? कहीं ये “खादी और खाकी के गंठजोड़” की कहानी तो नहीं? एक मंत्री की संलिप्तता की बातें भी की जा रहीं हैं. इस अपहरण के मामले में सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों का नाम जुड़ा होने के कारण पुलिसिया-तंत्र भी सहमा हुआ है.
ऐसा नहीं है कि बिहार में अपहरण उद्योग फिर से पांव पसारने लगा है, बल्कि ये बदस्तूर जारी है. मगर तथाकथित सुशासनी सरकार के उम्दा मीडिया-प्रबंधन ने इस पर पर्दा डाल रखा है. क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में प्रतिदिन 10 अपहरण होते हैं.
इस कांड में जदयू नेताओं के शामिल होने की बात से राज्य के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार जी भड़क गए हैं और विपक्षी पार्टियों को नाम उजागर करने की चुनौती दी है. नीतिश कुमार जी ने गुरुवार को विपक्षी पार्टियों से कहा कि वे इस कांड में शामिल उनकी पार्टी से जुड़े लोगों के नामों का खुलासा करें. कितना हास्यास्पद है नीतिश जी का यह बयान… गृह-मंत्रालय उनके अधीन है और खुलासा दूसरे करें? जिस राज-धर्म की सदैव दुहाई देते हुए नीतिश जी सदैव नज़र आते हैं उस राज-धर्म का तकाजा ये है कि वो खुद इस रहस्य पर से पर्दा उठाएं.
गौरतलब है कि दमन के भीमपुर निवासी हनीफ हिंगोरा के बेटे सोहेल हिंगोरा को 20 अक्टूबर को दमन से अगवा कर लिया गया था. सोहेल को उस वक्त अगवा किया गया जब वह अपनी फैक्ट्री से घर लौट रहे थे. सोहेल के पिता ने नानी दमन पुलिस स्टेशन में उनके अगवा होने की एफआईआर दर्ज करवाई थी. एफआईआर दर्ज होने के बाद थाने के आई.ओ. अनिल कुमार ने उद्योगपति हनीफ हिंगोरा के मोबाइल कॉल डिटेल्स पर नज़र रखनी शुरू कर दी. ध्यान रहे कि हनीफ हिंगोरा मूल रूप से सूरत के रहने वाले हैं, जिनका दमन-दीव में कारोबार है.
पुलिस के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने सोहेल की रिहाई के एवज में उनके पिता से 60 करोड़ रुपए फिरौती की मांग की थी. बाद में यह सौदा 25 करोड़ पर तय हुआ ( ऐसा हनीफ हिंगोरा का कहना है). अपहरणकर्ताओं ने हनीफ से फिरौती की रक़म सारण जिले के दरियापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में पहुंचाने और उनके बेटे को दिघवारा पेट्रोल पंप के पास रिहा करने की बात की थी. हनीफ़ 25 करोड़ रुपए लेकर बताई हुई जगह पर पहुंचे और उन्होंने एक गाड़ी में रक़म रख दी, तत्पश्चात सोहेल को अपहरणकर्ताओं ने मुक्त कर दिया.
इसी बीच मोबाइल कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस की एक टीम ने नया गांव थाना क्षेत्र के चतुरपुर गांव के रंजीत सिंह के घर पर छापेमारी की. पुलिस ने रंजीत के घर से 30 हज़ार रुपए नक़द भी बरामद किए. रंजीत के पिता झारखंड पुलिस में ए.एस.आई. के पद पर तैनात हैं.
बिहार पुलिस के एक अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त के साथ ये बताया कि इस मामले में अजय सिंह (सारण क्षेत्र के दरौंधा की जदयू विधायिका श्रीमती कविता सिंह के पति) गिरोह की भूमिका की भी जांच की जा रही है. अजय सिंह ने गुजरात में अच्छा-खासा निवेश भी कर रखा है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि निवेश करने वाले इन लोगों में कई नेता और अपराधी शामिल हैं. ये लोग अपहरण उद्योग से जुड़े रहे हैं या फिर संरक्षक की भूमिका निभाते रहे हैं. पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि मामले में राजनेता की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता, क्योंकि दमन से अगवा व्यक्ति को दो हजार कि.मी. दूर बिहार लाना आसान नहीं है.
हनीफ़ हिंगोरा का यह भी कहना है कि उनके बेटे को अगवा करने में बिहार के एक मंत्री और पुलिस का भी हाथ है और जिस तरह से कुछ गिरफ्तारियां होने के बाद भी इस हाई-प्रोफाईल काण्ड से पर्दा नहीं उठ रहा है, ये हनीफ हिंगोरा के इस कथन को सत्यापित करता हुआ दिख रहा है. सूरत में हनीफ हिंगोरा ने पत्रकारों को यह भी बताया था कि उनके बेटे सुहेल को अपहर्ताओं से छुड़ाने के लिए उन्होंने बिहार में जदयू मंत्री की मौजूदगी में फिरौती की रक़म सौंपी. हनीफ़ का यह भी कहना है कि उनके पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि उन्होंने 25 करोड़ रुपये अपहर्ताओं को दिए हैं. ये संभवत: देश में फिरौती के रूप में दी गई अब तक की सबसे बड़ी रक़म है.
हनीफ हिंगोरा का ये कहना भी लाजिमी है कि “ऐसा नहीं हो सकता कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसकी जानकारी न हो, अगर उन्हें नहीं पता तो वह मुख्यमंत्री बनने लायक नहीं हैं.” उन्होंने अपहरणकर्ताओं को पुलिस-संरक्षण मिलने की बात भी कही है. सोहेल को अगवा कर एक पुलिसवाले के घर पर रखा जाना हनीफ हिंगोरा के इस बयान की कुछ हद तक पुष्टि भी करता है.
बिहार पुलिस के मुताबिक इस हाईप्रोफाइल अपहरण के पीछे जिस अंतर्राज्यीय गिरोह का हाथ है. उसका सरगना रंजीत का बड़ा भाई दीपक सिंह है. यह गिरोह गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार में सक्रिय है. बिहार पुलिस के ए.डी.जी. रवींद्र कुमार ने बताया कि “एसटीएफ बिहार ने उपर्युक्त घर की पहचान की और घर में रहने वाले अभियुक्त रंजीत सिंह की गिरफ्तारी में दमन पुलिस टीम की मदद की. अपहरण कांड का अनुसंधान दमन पुलिस द्वारा किया जा रहा है. गुजरात पुलिस इस कांड के अनुसंधान में शामिल नहीं है.”
हालांकि बिहार पुलिस इस मामले में किसी भी नेता के शामिल होने की बात पर मौन है लेकिन हनीफ हिंगोरा ने साफ आरोप लगाया है कि इसके पीछे बिहार के एक मंत्री का हाथ है. हनीफ हिंगोरा ने इस मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी दखल देने की मांग की है.
बिहार की सरकार और पुलिस के सामने अब अहम सवाल ये हैं कि वह यह पता करे कि फिरौती के लिए दी गई 25 करोड की रक़म कहां गई? किस राजनेता ने पूरे मामले में मध्यस्थता की? रंजीत के साथ इस अपराध में और कौन-कौन शामिल है? बिहार पुलिस के इस दावे का आधार क्या है कि फिरौती के रूप में केवल 9 करोड़ रूपयों की अदायगी हुई?
(आलोक कुमार पटना में पत्रकार व विश्लेषक हैं, उनसे alokkumar.shivaventures@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है.)
