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BeyondHeadlines > Lead > मोदी का नया ‘इतिहास’…
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मोदी का नया ‘इतिहास’…

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published February 22, 2014 16 Views
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9 Min Read
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Sharique Nadeem for BeyondHeadlines

जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहा है, वैसे-वैसे देश का राजनीतिक इतिहास बदलता नज़र आ रहा है. आगामी चुनाव में सत्ता की कुर्सी पर कौन क़ाबिज़ होगा, यह तो ऊपर वाला ही बेहतर जानता है, लेकिन सत्ता हासिल करने की जंग में नरेन्द्र मोदी संपूर्ण भारत के इतिहास को बदल देना चाहते हैं.

मोदी के ज़ेहनी किताब में चंद्रगुप्त (मौर्य) मौर्य वंश नहीं, बल्कि गुप्तवंश के हैं. मोदी का ज्ञान यह बताता है कि तक्षशिला बिहार में है और सिकंदर गंगा के रास्ते बिहार आए थे. लेकिन सच्चाई यह है कि तक्षशिला बिहार में नहीं बल्कि पाकिस्तान में है और सिकंदर गंगा क्या, कभी सतलज से पार भी नहीं आ पाया था.

खैर, इसके पीछे वजह चाहे जो भी हो, लेकिन मोदी का इतिहास ज्ञान तो वाकई लाजवाब है, और अब  यही इतिहास ज्ञान गुजरात के स्कूली बच्चों व शिक्षकों में भी सर चढ़कर बोलने लगा है.  ऐसे में अगर गुजरात का कोई स्कूली बच्चा आपको महात्मा गांधी की पुण्यतिथि की तारीख़ 30 अक्टूबर 1948 बताए तो आप क्या करेंगे?

जनाब मुग़ालते में मत रहिए… आप कुछ भी नहीं कर सकते… उन्हें सही करने की कोशिश करेंगे तो वे मोदी के अंध-भक्तों की तरह आपकी बात नहीं सुनेंगे बल्कि एक ठोस जवाब देंगे, ‘हमारी किताब में यही लिखा है.’

ज़रा एक नज़र देखिए कि मोदी के गुजरात में बच्चों को क्या इतिहास ज्ञान परोसा जा रहा है… दूसरे विश्व युद्ध में जापान ने अमरीका पर एटम बम गिराया था, दादाभाई नौरोजी, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी और गोपाल कृष्ण गोखले कांग्रेस के ‘एक्सट्रीमिस्ट’ सदस्य थे, ‘होम रूल’ आंदोलन आज़ादी के बाद 1961 में शुरू हुआ था, संयुक्त राष्ट्र के संगठन यूनेस्को का पूरा नाम “यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल सोसायटी एंड चिल्ड्रन ऑर्गेनाइज़ेशन है, 1947 में विभाजन के बाद एक नए देश का जन्म हुआ जिसका नाम था इस्लामिक इस्लामाबाद. इसकी राजधानी हिंदूकुश की पहाड़ियों में खैबर घाट नाम से थी.

ये सारी बातें गुजरात बोर्ड के अंग्रेज़ी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों के लिए छापी गई किताब में कहा गया है. आठवीं क्लास की सामाजिक विज्ञान की यह किताब गुजरात काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च ऐंड ट्रेंनिंग (जीसीईआरटी) ने छापी है.

इतना ही नहीं, इस किताब के पेज नंबर 21 पर राजपूतों की वीरता का बयान करते हुए कहा गया है, “राजपूत महिला संयम और निर्भयता के लिए जानी जाती थी… वे पति के युद्ध में पराजित होने पर ख़ुद को आग में जलाकर मारना (जौहर) अधिक पसंद करती थीं.” ऐसे में आप गुजरात सरकार पर स्कूल की किताबों के ज़रिए हिंदुत्व की राजनीति और सांप्रदायिक घृणा फैलाने के खेल आसानी से समझ सकते हैं. और वो भी तब जब इन किताबों को एक समय में गुजरात बोर्ड के 50 हजार से अधिक बच्चे ये गलतियां पढ़ रहे हो.

बात यहीं खत्म नहीं होती. किताब के दो चैप्टर गांधी जी को समर्पित हैं. इनमें लिखा है कि महात्मा गांधी ने पहला सत्याग्रह आश्रम अहमदाबाद में मई 1925 में स्थापित किया. (सही साल 1915 है) पेज 24 पर लिखा है कि होम रूल आंदोलन 1961 में शुरू हुआ, तब तो देश को आजाद हुए 14 साल हो चुके थे और होमरूल को 45 साल.

ये गड़बड़ियां ऐसी हैं कि इतिहास की शक्ल ही बदल दें. इसी किताब में देश के सुधारकों और क्रांतिकारियों के नाम तक गलत लिखे हैं. इस प्रकार इस किताब पर एक सरसरी नज़र में ही आप सबको 124 पेजों पर 120 तथ्यात्मक गलतियां या गड़बड़ियां मिल जाएंगी.

यह कहानी कोई नई नहीं है. गुजरात शिक्षा विभाग की किताबों में भारी लापरवाही के भी कई क़िस्से हैं. मई 2012 में गुजरात शिक्षा विभाग ने बच्चों के पढ़ने के लिए ‘पज़ल मैजिक’ नाम की पत्रिका का एक अंक बांटा था. बच्चों के पढ़ने के लिए भेजी गई इस किताब में कई अश्लील चुटकुले छपे थे. ये पत्रिका 35,000 स्कूलों में बांटी गई थी. लेकिन इस पर हंगामा खड़ा हो गया और पत्रिका के अंक को स्कूलों से वापस लेना पड़ा.

सच तो यह है कि मोदी सरकार इन किताबों से सांप्रदायिक और जातिवादी भावनाओं को बढ़ावा देना चाहती है. इन किताबों के ज़रिए मोदी नौनिहालों में हिंदुत्व की राजनीति और सांप्रदायिक घृणा परोसना चाहते हैं. शायद इसीलिए 2002 के बाद गुजरात की पाठ्यपुस्तकों में जो संशोधन हुए उसके बाद से ही किताबें महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ पूर्वाग्रहों से भरी हुई हैं.

बीबीसी के एक रिपोर्ट के मुताबिक सामाजिक संस्था निरंतर, वूमेन स्टडीज रिसर्च सेंटर, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय और सेंटर फॉर स्टडीज़ इन सोशियोलॉज़ी ऑफ़ एजुकेशन, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज ने मुंबई, तमिलनाडु, गुजरात, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली पाठयपुस्तकों पर 2010 में एक रिपोर्ट तैयार की थी.

‘टेक्स्टबुक रेसिज़्म’ नाम की इस रिपोर्ट में कहा गया था कि 90 के दशक में आई गुजरात की बीजेपी सरकार के कार्यकाल के दौरान छपी किताबों में भारतीय संस्कृति को हिंदू और मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय को विदेशी के तौर पर पेश किया गया है.

रिपोर्ट में ख़ासतौर पर पांचवीं और नौवीं कक्षा की किताबों का ज़िक्र है. कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में इंडियन हिस्ट्री को हिंदू दक्षिणपंथी फ्रेम में ढ़ालने की कोशिश की गयी है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ जो इतिहास बच्चों को पढ़ाया जा रहा है उसके ज़्यादातर स्रोत पौराणिक और अर्ध काल्पनिक है. “पाठ्यपुस्तकों में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को आज़ादी की लड़ाई का मुख्य हिस्सा बताया गया है और गांधी जी मात्र ‘आध्यात्मिक चिन्ह’ हों, ऐसा दिखाने की कोशिश की गई है. 2004 के बाद छपी हुई किताबों में अति राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ावा देने की कोशिश नज़र आती है. इतिहास की किताबों में शिवाजी, सरदार पटेल, मुसोलिनी और एडोल्फ़ हिटलर की प्रशंसा की गई है.”

रिपोर्ट के समापन में कहा गया है कि गुजरात की इतिहास की किताबों में भारत के लिए एक विशेष दृष्टिकोण को प्रसारित करने की कोशिश की जा रही है.

सामाजिक और राजनीतिक विचारक अच्युत याग्निक और सुचित्रा सेठ ने अपनी किताब ‘शेपिंग ऑफ़ मॉडर्न गुजरात: प्लूरालिटी, हिंदुत्व एंड बियॉन्ड’ में कहा है कि गुजरात में स्कूली शिक्षा के ज़रिए बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति को बढ़ावा दे रही है.

आईए अब दिग्विजय सिंह के बयान से मोदी के इस बीमारी को समझने की कोशिश करते हैं. दिग्विजय सिंह बताते हैं कि ‘मोदी संघ द्वारा बताए गए झूठ बोलने के तरीकों में पूरी तरह से पारंगत हैं. इतने वर्षों से संघ की सेवा करते हुए उन्होंने अफवाह फैलाने की संघ की सारी विद्या को हृदयंगम कर लिया है. मोदी को झूठ बोलने का व्यसन है, जिसे अंग्रेजी में ‘कंपलसिव लायर’ कहा जाता है. यह एक तरह की बीमारी है, जिसका इलाज बहुत मुश्किल है.’ मोदी के गुरु केशुभाई पटेल भी कभी कह चुके हैं कि मोदी ने झूठ बोलने पर एकाधिकार कर रखा है.

बहरहाल, दिग्विजय सिंह का यह बयान राजनीतिक है. लेकिन तथ्यों के साथ ‘फर्जी मुठभेड़’ करना मोदी बखूबी जानते हैं. उनके हर बयान में एक झूठ ज़रूर होता है. यह बात समझ से परे है कि मोदी तथ्यों के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ क्यों करते हैं? क्या इन्हीं झूठों के सहारे वे प्रधानमंत्री बनकर भारत का इतिहास बदलना चाहते हैं?

हम सबको इस समय यह ज़रूर सोचना चाहिए कि मोदी प्रधानमंत्री बनने से पहले ही गुजरात में जिस प्रकार भारत का इतिहास में बदलने में लगे हैं, अग वो गलती से इस मुल्क के प्रधानमंत्री बन गए तो इस देश के इतिहास का क्या होगा?

(लेखक The Origin संस्था के अध्यक्ष हैं.)

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