BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Reading: महान में नहीं होगी पेड़ों की अक्टूबर तक कटाई
Share
Font ResizerAa
BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
Font ResizerAa
  • Home
  • India
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Search
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Follow US
BeyondHeadlines > India > महान में नहीं होगी पेड़ों की अक्टूबर तक कटाई
IndiaLead

महान में नहीं होगी पेड़ों की अक्टूबर तक कटाई

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published May 26, 2014 7 Views
Share
6 Min Read
SHARE

BeyondHeadlines News Desk

आज मध्यप्रदेश सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को कहा है कि महान जंगल में अक्टूबर तक कोई पेड़ नहीं काटे जायेंगे. राज्य सरकार का यह फैसला महान संघर्ष समिति के लिए अस्थायी राहत लेकर आया है, जिन्होंने महान कोल ब्लॉक को मिले दूसरे चरण की मंजूरी को पिछले हफ्ते एनजीटी में चुनौती दी थी.

महान संघर्ष समिति के सदस्य और इस केस में अर्जीदार हरदयाल सिंह गोंड कहते हैं कि “यह भले हमारे लिए अस्थायी राहत की बात है. लेकिन हम लोग जंगल में खदान से संबंधित किसी भी तरह के गतिविधि का विरोध जारी रखेंगे.”

इस महीने की शुरुआत में चार वन सत्याग्रहियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, जो जंगल में मार्किंग का शांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे.

महान संघर्ष समिति द्वारा दायर अर्जी में महान कोल ब्लॉक को मिली मंजूरी में  वन (संरक्षण) अधिनियम 1980, राष्ट्रीय वन नीति 1988, जैव विविधता अधिनियम 2002 और अनुसूचित जनजाति और अन्य वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के प्रावधानों के साथ सतत विकास के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ बताया गया है. इस कोल ब्लॉक को एस्सार पावर और हिंडाल्को को संयुक्त रुप से आवंटित किया गया था.

गोंड आगे कहते हैं कि “हमलोग इस कोयला खदान के प्रस्ताव का दो सालों से भी अधिक समय से विरोध कर रहे हैं. लेकिन हमारे विरोध के बावजूद यूपीए सरकार ने इसे दूसरे चरण की मंजूरी दे दी.”

महान जंगल में कोयला खदान आने से पांच लाख पेड़ काटे जायेंगे और हजारों ग्रामीणों की आजीविका खत्म होगी.

राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार जंगली भूमि का गैर जंगली उद्देश्य के लिए उपयोग करने से पहले बेहद सावधानी की ज़रुरत है, लेकिन महान के मामले में इस तरह की सावधानी नहीं बरती गयी.

ग्रीनपीस की सीनियर कैंपेनर प्रिया पिल्लई कहती हैं कि “5 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और मंत्रियों के समूह द्वारा सबसे आरामदायक तरीके से पेश किया गया है, जिसने महान कोल ब्लॉक को पहले चरण की मंजूरी के लिए सिफारिश किया था.”

वे आगे कहती हैं कि “सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव को बिल्कूल ही नज़रअंदाज किया गया है.”

वनाधिकार कानून का उल्लंघन

वनाधिकार कानून 2006 को इस क्षेत्र में लागू ही नहीं किया गया है. जूलाई 2013 में खुद जनजातीय मंत्री केसी देव ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस मामले को लेकर पत्र लिखा था. इस क्षेत्र में एक भी सामुदायिक वनाधिकार नहीं दिया जा सका है. इसके अलावा वनाधिकार कानून में ग्राम सभा की मंजूरी को प्रासंगिक बनाया गया. लेकिन अमिलिया में वनाधिकार पर आयोजित विशेष ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव पर फर्जी और मरे हुए लोगों के हस्ताक्षर कर दिये गए. इसी फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के आधार पर महान कोल ब्लॉक को दूसरे चरण की पर्यावरण मंजूरी दे दी गयी.

वन संरक्षण अधिनियम की सिफारिश भी नज़रअंदाज की गयी

वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अनुसार जंगल के किसी भी विषयांतर के लिए वन सलाहकार समिति द्वारा विचार किया जायेगा, जो बाद में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को अंतिम निर्णय के लिए सिफारिश कर देगा, लेकिन महान के मामले में प्रक्रिया बहुत अलग निकला.

12 जूलाई 2011 को वन सलाहकार समिति ने अपनी रिपोर्ट में महान कोल ब्लॉक को अस्वीकार करने का सुझाव दिया। “ऐसा क्षेत्र के जमीनी हकीकत का वैज्ञानिक अध्ययन के बाद सिफारिश किया गया था. लेकिन वन व पर्यावरण मंत्रालय ने इस पर विचार नहीं किया. अंततः महान को मंत्रीमंडल समूह की सिफारिश पर पहले चरण की मंजूरी दे दी गयी.”

ग्रीनपीस के सीनियर कैंपेनर नंदीकेश शिवालिंगम कहते हैं कि यह मंजूरी ही गलत है और आने वाले समय में यह एक गलत संदेश लेकर जायेगा.

वन्यजीव अध्ययन

पहले चरण की मंजूरी में स्पष्ट कहा गया कि वन्यजीव अध्ययन के लिए वन्यजीव संस्थान ऑफ इंडिया और वन्यजीव ट्रस्ट ऑफ इंडिया या इसी तरह के अन्य प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा क्षेत्र में कोयला खदान से वन्यजीव के आवास पर प्रभाव का मूल्यांकन होना चाहिए.

नन्दी बताते हैं कि “लेकिन अंतिम रिपोर्ट अवैज्ञानिक और गलत और भ्रामक है. यह एक तरह से पिछली रिपोर्ट का ही कट पेस्ट है.”

महान जंगल में 164 प्रजातियों साल, साज, महुआ, तेंदू आदि का निवास स्थान है. इसके अलावा कई तरह के जानवरों का भी निवास है.

संचयी प्रभाव आकलन अभी भी प्रतीक्षित

संचयी प्रभाव आकलन जिसमें छोटे से क्षेत्र में कई पावर प्लांट और कोयला खदान होने का अध्ययन किया जाना है, अभी भी प्रतीक्षित है. पहले चरण की मंजूरी के समय कहा गया था कि इस अध्ययन को आईसीएफआरई और एनईईआऱआई जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से कराया जाना है.

प्रिया पिल्लई कहती हैं कि “पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, क्षेत्र में आ रही परियोजनाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए संचयी प्रभाव आकलन की आवश्यकता को पहचानता है और अभी तक पूरा हो जाने के अध्ययन के लिए इंतजार किए बिना परियोजना के लिए वन विभाग की मंजूरी दे दी गयी.”

हरदयाल गोंड आगे कहते हैं कि “हम आशा करते हैं कि एनजीटी इस केस में जंगल बचाने में हमारी मददगार साबित होगी. हमलोग अंत में न्याय लेकर रहेंगे.”

ग्रीनपीस और महान संघर्ष समिति लगातार जंगल में किसी भी तरह के गैर-जंगली काम का विरोध करती रहेगी.

TAGGED:No tree felling in Mahan till October
Share This Article
Facebook Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Telangana Must Order CBI Inquiry into Alleged Murder of Advocate Moizuddin in Waqf Cases
India Waqf Facts
Waqf Registration Ends With Fears of Vanishing Properties
Exclusive India Waqf Facts
The Waqf Act 2025, Supreme Court Interim Ruling, and the Role of Muslims in Protecting Waqf Properties
Waqf Facts
Supreme Court Verdict on the Waqf Act: Justice or Just Temporary Consolation?
India Waqf Facts Young Indian

You Might Also Like

ExclusiveIndiaLead

What Happened After Assam Converted Madrasas into Schools? A Ground Report on Education, Identity, and Community Impact

June 4, 2026
Edit/Op-EdExclusiveHistoryIndia

Kamal Maula Mosque Controversy Explained: How History, Politics, and Faith Collided Over a Single Monument

May 22, 2026
IndiaLeadYoung Indian

Uttarakhand’s New Minority Education Overhaul: End of Madrasa Board, Curriculum Shift, and Rising State Control Explained

May 10, 2026
IndiaLatest News

Iran Consul General Praises India’s Humanity; No Legal or UN Basis for Attack on Iran, Says Dr Ausaf Sayeed

April 15, 2026
Copyright © 2025
  • Campaign
  • Entertainment
  • Events
  • Literature
  • Mango Man
  • Privacy Policy
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?