BeyondHeadlines News Desk
पटना, गुवाहाटी, झारखंड, कोलकाता व देश के अन्य शहरों में ईद के चांद का दीदार हो चुका है. देशभर में कल धूमधाम से ईद मनाई जाएगी. हालांकि बादल होने की वजह से नई दिल्ली में चांद का दीदार नहीं हो सका है. इससे पहले बाजारों में शानदार रौनक के बीच आज खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं.
ईद को लेकर मुसलमान ही नहीं, बल्कि हिन्दू भी अपने-अपने तरीके से चांद होने की गणना कर रहे थे. चांद से सम्बंधित वेबसाइट ने भी ईद का चांद निकलने का दावा किया है. इमारत-ए-शरीया ने ऐलान किया है कि कल पूरे देश में ईद मनाया जाएगा.
लखनऊ में मरकजी चांद कमेटी फरंगी महल ने ऐशबाग ईदगाह और शिया मून कमेटी ने सतखण्डा में चांद के दीदार के लिए विशेष इंतजाम किये थे. हालांकि वरिष्ठ शिया धर्मगुरु मौलाना (डा.) कल्बे सादिक ने रमजान से पहले ही ईद 29 जुलाई को मनाने की घोषणा की थी.
आज ईद का चांद नज़र आते ही रोजा खत्म हो गया और लोग ईद की खुशियों में मग्न हो चुके हैं. दरअसल, ईद-उल-फित्र यानी ईद मतलब रमजान के महीने की समाप्ति पर सामूहिक रूप से मनाई जाने वाली खुशी का दिऩ है. एकता व भाईचारे का दिन है. आंतरिक प्रेम की वर्षा का दिऩ है. दुश्मनों से भी गले मिलने का दिन है. ऐसा दिन जिससे लोगों के बीच एक नया रिश्ता, एक अभिनव प्रेम-संबंध का आगाज होता है. ऐसा लगता है कि इंसान-इंसान के बीच दुश्मनी की कोई दीवार, भेदभाव की कोई खाई नहीं. ये दिन तो हर किसी से गले मिलने का दिन है. हर किसी की खातिरदारी और खुशियां मनाने का दिन है. लोगों को सेवईयों से मुंह मीठा कराने का दिन है.
ईद-उल-फित्र वास्तव में रमजान के रोजों का इनाम है. यह दिन निश्चय ही महान खुशी का दिन होता है. इस दिन से मुसलमानों के ऊपर से अतिरिक्त बंदिशें हट चुकी होती हैं, जिन्हें ये निरंतर एक माह तक सहन करते रहे होते हैं. कड़े अनुशासन की इस परीक्षावधि से सफलतापूर्वक गुजर जाने की खुशी की पहली अभिव्यक्ति ईद की नमाज है. इस नमाज का उद्देश्य अतिरिक्त बंधनों से आजादी के लिए ईश्वर के समक्ष कृतज्ञता प्रकट करना है. ईद यह संदेश देती है कि हमारे लिए वास्तविक प्रसन्नता ईश्वरीय आदेशों का पालन करने और उसके द्वारा ली गई परीक्षा से सफलतापूर्वक गुजर जाने में ही है.
ईद हमें यह संदेश देती है कि हम परमेश्वर के प्रति तब तक कृतज्ञ नहीं हो सकते, जब तक हम उसके दीन-हीन बंदों की समस्याओं को हल करने का प्रयास न करें. यही कारण है कि ईद के दिन मुसलमान ईदगाह जाने के पहले फित्र के रूप में एक निश्चित राशि अल्लाह के राह में खर्च करता है, ताकि निर्धन व असहाय लोग भी ईद के खुशियों में शामिल हो सकें. नजीर अकबराबादी अपने एक नज्म में लिखते हैं-
पिछले पहर से उठके नहाने की धूम है
शीरो-शकर सेवईयां पकाने की धूम है
पीरो-जवां को नेअमतें खाने की धूम है
लड़कों में ईदगाह जाने की धूम है.