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क्या यह ‘रेप’ किसी अख़बार की ख़बर बन पाएगी?

Amit Bhaskar for BeyondHeadlines

वो देख क्या मस्त माल जा रही है…. चल आजा… डर मत पकड़ लेते हैं…. चल ना…. डरता क्यों है… कुछ नहीं होगा…. यार तेरी फटती बहुत है…. अकेले जा रही है…. चल…  इतना अंधेरा है…. किसी को पता भी नहीं चलेगा….

यार पता लग गया ना किसी को तो मारे जायेंगे….

अरे पागल है क्या…. किस को पता लगेगा बे…. इधर देख कितना जंगल है…. चल मुंह पे कपड़ा डाल के उठा के ले चलते हैं…. यार आज तो मज़ा ही आ जाएगा….  क्या लग रही है भाई….

यार मुझे डर लग रहा है…. वो किसी न किसी को तो बता ही देगी यार…. उसके घर वाले ढूंढने आ गए तो मारे जायेंगे हम दोनों……

अरे तू आजा…. साली ने किसी को कुछ बोला तो मज़े लेके मार देंगे और क्या….

अरे तू पागाल है क्या बे…. एक दो ज़बरदस्ती करने जा रहे हैं…. ऊपर से मार देगा…. साले ज़िन्दगी भर जेल में चक्की पिसेंगे कुछ देर के मज़े के लिए….

अरे यार! देश के सबसे विभत्स रूप से हुए दामिनी रेप के दोषियों को तो अब तक कुछ हुआ नहीं…. वो तो फिर भी दिल्ली में हुआ था भाई… हर चैनल पर 4 दिन लाइव दिखाया था… सारा देश सड़क पर आ गया था…. बच्चे बूढ़े सब फांसी फांसी कर रहे थे… विदेशियों ने भी प्रदर्शन किया…. संयुक्त राष्ट्र ने भी बवाल मचा दिया था…. संसद हिल गयी थी…. राष्ट्रपति भवन में बवाल मच गया था… लेकिन क्या हुआ….

कुछ भी तो नहीं यार… हां! यार सही कह रहा है…. चल आज तो इस चिड़िया को दबोच के ही दम लेंगे…. आजा….

ये हुई ना बात…. बारी बारी से करेंगे…. ठीक है…. पहले मै फिर तू…. जल्दी चल….

इस देश में हर घंटे 25 से 90 बलात्कार की रिपोर्ट लिखी जाती है. यानी करीब हर एक मिनट में एक रिपोर्ट. इसी हिसाब से ये ऊपर की सोच है 2 रेपिस्टों की, जो इस वक़्त जब आप ये पढ़ रहे हैं तब वो रेप करने के फिराक में होंगे.

जब दिल्ली में दामिनी जैसे रेप केस के आरोपी जेल में मस्त हैं, तो इतने बड़े देश के किसी राज्य के किसी जिले के किसी गांव के किसी टोले के किसी तालुके के किसी घनघोर अंधेरे जंगल में एक लड़की का रेप करने वाले इन दोनों को कोई कुछ कर पाएगा? क्या उस लड़की के रेप की खबर भी उस टोले से बाहर गांव में जिले में या राज्य में या देश को मिल पाएगी?

रोज़ रोज़ जिस रेप की ख़बरों को आप पढ़ कर या देख कर पेपर के पन्ने या चैनल बदल लेते हैं. क्या ये संभव नहीं कि कल को इस ख़बर का हिस्सा हम या हमारे जानकार खुद बन जाएं? क्या तब हम जागेंगे? क्या हम एक दामिनी के लिए लड़कर इतने थक गए हैं कि रोज़ एक दामिनी के होते हुए भी हमें नींद आ जाती है? मौनी बाबा के आश्रम में हुई घटना की खबर क्या मीडिया ने आपको दिखाया? आपको पता भी है कि इस बाबा के आश्रम में एक नाबालिग के साथ क्या क्या हुआ? नहीं ना…. और आपको फर्क भी क्या पड़ता है…. चलिए सो जाते हैं…. कल ऑफिस या कॉलेज भी तो जाना है….

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