सत्ता बदलने के बाद शासन-प्रशासन के तौर तरीक़े बदल जाते हैं और इस बदलाव में हर कोई फायेदमंद हो, ज़रूरी नहीं. कम से कम मदरसों को लेकर ये बात सौ फीसद सही है. जबसे मोदी सरकार आई है, मदरसों के बजट में कमी ही देखी जा रही है.
Afroz Alam Sahil for BeyondHeadlines
पिछले 4 अगस्त, 2015 को अल्पसंख्यक मामलों के केन्द्रीय राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण पर हर तरह से प्रसायरत है. उन्होंने इससे संबंधित आंकड़े भी पेश किए. लेकिन उनके ही पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि सरकार मदरसों के आधुनिकीकरण पर गंभीर नहीं है. मदरसों की संख्या व बजट में कटौती साफ़ दिख रही है.
आंकड़े बताते हैं कि अल्पसंख्यकों के लिए विशेष पहल करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए योजना के तहत साल 2014-15 में 11,654 मदरसों और 26,619 शिक्षकों के लिए 108.68 करोड़ रुपये जारी किए हैं. जबकि 2013-14 में 14,859 मदरसों और 35,376 शिक्षकों के लिए 182.73 करोड़ रुपये जारी हुए थे. 2012-13 में 9905 मदरसों और 23,146 शिक्षकों के लिए 182.49 करोड़ रुपये जारी किया गया था.
आंकड़े स्पष्ट तौर पर बताते हैं कि 2012-13 व 2013-14 की तुलना में मोदी सरकार ने मदरसों के आधुनिकीकरण के नाम पर अपने बजट को कम कर दिया है.
वहीं अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचा विकास के फंड में भी भारी कटौती देखने को स्पष्ट तौर पर मिल रही है. 2012-13 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 184 संस्थानों के लिए 28.38 करोड़ रुपये जारी किए थे. 2013-14 में भी 229 संस्थानों के लिए 24.99 करोड़ रुपये जारी किया था, लेकिन 2014-15 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचा सुधारने हेतु सिर्फ 131 संस्थानों के लिए 12.26 करोड़ रुपये जारी हुआ है. यानी बजट पूरे 50 फीसदी की कटौती की गई है.
योजना(न्यूनतम/विभाग) | 2012-13 | 2013-14 | 2014-15 |
मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए योजना | 9905 मदरसों और 23,146 शिक्षकों के लिए 182.49 करोड़ रुपये जारी | 14,859 मदरसों और 35,376 शिक्षकों के लिए 182.73 करोड़ रुपये जारी | 11,654 मदरसों और 26,619 शिक्षकों के लिए 108.68 करोड़ रुपये जारी |
अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचा विकास | 184 संस्थानों के लिए 28.38 करोड़ रुपये जारी | 229 संस्थानों के लिए 24.99 करोड़ रुपये जारी। | 131 संस्थानों के लिए 12.26 करोड़ रुपये जारी |
हालांकि मदरसों के आधुनिकीकरण को लेकर हमेशा से विरोध होता आया है. पिछले दिनों दारुल उलूम देवबंद ने देश भर में फैले अपने 3000 मदरसों के आधुनिकीकरण और सरकारी नज़रिए से आधुनिक शिक्षा दिए जाने का भी विरोध करते हुए किसी भी प्रकार की सरकारी मदद लेने से इंकार भी किया था. ऐसा ही विरोध महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में भी देखने को मिले. विरोध करने वालों का स्पष्ट तौर पर कहना था कि “हम क़ौम से चंदा लेकर काम चलाते हैं. जो हमारी दीनी ज़रूरत है, उसमें किसी तरह की सरकारी मदद की ज़रूरत नहीं पड़ती है.”