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गांधी के बताए रास्ते से ही माॅरीशस को मज़बूती मिली…

BeyondHeadlines News Desk

पटना: ‘1901 में महात्मा गांधी माॅरीशस गए थे. उनके बताए विचार से ही माॅरीशस मज़बूत हुआ. भारत माॅरीशस के लिए एक संस्कृति की तरह है.’

ये बातें आज बिहार के प्रवासी व माॅरीशस के प्रसिद्ध उपन्यासकार रामदेव धुरंधर ने रखी. वे आज जगजीवन राम शोध संस्थान में अपने बचपन, जीवन-संघर्ष और भारत के साथ जुड़ाव पर बोल रहे थे.

धुरंधर ने अपने बचपन के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि 1854 में उनके परदादा भारत से माॅरीशस पहुंचे थे. गोरों, जिसमें फ्रांसीसी और अंग्रेज़ दोनों शामिल थे, ने ज़ुल्म ढ़ाया. गरीबी में मां के साथ घास काटी और पिता के साथ कुदाल भी चलाए. इस ज़ुल्म और शोषण में वे ‘होशियार’ लोग भी शामिल थे, जो भारत से गए थे. 

उन्होंने बताया कि ‘गोदान‘ पढ़ने के बाद साहित्य के तरफ़ रूझान हुआ. हिन्दी में लिखना शुरू किया. 

उन्होंने कहा कि वे अपने देश में शब्दों के कुछ बीज बोते हैं और भारत में उसका फ़सल काटते हैं. विदित हो कि पिछले वर्ष का श्रीलाल शुक्ल पुरस्कार उन्हें प्राप्त हुआ है.

रामदेव धुरंधर ने बताया कि पानी के जहाज़ से 3-4 महीने में माॅरीशस पहुंचते थे, तब तक कई संगी-साथी बिछड़ गए होते थे. वहां उतरते ही समूह में बांटकर पिटाई शुरू हो जाती थी. खाना नहीं, पानी मिलता था. फ्रांसीसी गोरे लोगों का जेल होता था. ये भारतीय चतुर ‘मेठों’ के माध्यम से शोषण करते थे, जो आज वहां करोड़पति बन गए हैं. इनका काला इतिहास रहा है.

उन्होंने कहा कि माॅरीशस के जागरण में कबीर का बड़ा योगदान है. लेकिन अब वहां पुराने लोग ही भोजपुरी बोलते हैं. वहां की नई पीढ़ी फ्रांसीसी भाषा की ओर मुख़ातिब है.

उन्होंने कहा कि 1834 से 1912 तक भारत से क़रीब चार-पांच लाख लोग माइग्रेट होकर माॅरीशस गए. आज वहां की आबादी 13 लाख है.

आयोजन में डॉ. रामवचन राय तथा प्रो. यादवेन्द्र ने भी अपने विचार रखे. अतिथियों का स्वागत संस्थान के निदेशक श्रीकांत ने किया.

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