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पुलिसिया हमले में कई छात्र-छात्राएं घायल, हमले की हर तरफ निन्दा…

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published August 10, 2012 6 Views
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5 Min Read
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तलहा आबिद

लाल झंडों से पूरा जंतर-मंतर पटा हुआ था. कारपोरेट लूट, शिक्षा के निजीकरण और राजनेताओं के भ्रष्टाचार को दर्शाने वाले बड़े-बड़े पेंटिंग और नारो के प्ले कार्ड्स भी लोगों का ध्यान खींच रहे थे. दरअसल, दो दिनों पहले से ही सुदूर पूर्वात्तर से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, दक्षिण भारत समेत हिंदी पट्टी के तमाम राज्यों से यहां छात्र-नौजवानों का दिल्ली पहुंचना शुरू हो गया था. असुविधाओं और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए दिल्ली पहुंचे इन छात्र-नौजवानों के तेवर से भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और लूट के खिलाफ एक लंबे संघर्ष के प्रति इनकी प्रतिबद्धता का इजहार हो रहा था.

संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर एक विशाल सभा हुई, जिसे संबोधित करते हुए भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन को याद किया और कारपोरेट लूटेरों भारत छोड़ो का नारा दिया. उन्होंने कहा कि यह देश छात्र-नौजवानों और मजदूर-किसानों का है, वही प्राकृतिक संसाधनों की लूट को खत्म कर सकते हैं. इस देश की संसद में बैठे सत्ता और विपक्ष की नीतियों में कोई फर्क नहीं रह गया है. भ्रष्टाचार के खिलाफ इस देश में तीन तरह के आंदोलन चले. अन्ना आंदोलन कारपोरेट लूट के सवाल पर चुप रहा और अब तो उन्होंने आंदोलन भी वापस ले लिया. लेकिन आइसा-इनौस, माले और ऑल इंडिया लेफ्ट कोआर्डिनेशन कमेटी प्रभावी जनलोकपाल कानून बनाए जाने की मांग के साथ-साथ इस देश से कारपोरेट-परस्त आर्थिक नीतियों, साम्राज्यवाद, सांप्रदायिकता और सामाजिक उत्पीड़न के तमाम रूपों के खिलाफ आज भी आंदोलनरत है. उन्होंने बाबा रामदेव के आंदोलन पर निशाना साधते हुए कि वे विदेशों से काला धन लाने के लिए आंदोलन चला रहे हैं, लेकिन देश में जो काला धन है और जो करोड़ों की लूट जारी है, उसके खिलाफ कुछ भी बोलने से कतरा जाते हैं. सांप्रदायिक जनसंहार रचाने वालों कातिलों के साथ खड़े होकर वे काले धन के वापसी का सपना दिखा रहे हैं. जबकि वास्तविकता यह है कि यूपीए-एनडीए के साथ साठ-गांठ करके कोई देश के भ्रष्टाचार और लूट को खत्म नहीं कर सकता और न ही काला धन वापस ला सकता है.

छात्र नौजवानों का रास्ता भगत सिंह का रास्ता है, वह एक शोषण-मुक्त और जनपक्षीय व्यवस्था के निर्माण का रास्ता है. संघर्ष व नवनिर्माण के इस रास्ते पर चलने वाले नौजवानों के साथ भाकपा-माले के नेतृत्व में इस देश के मजदूर-किसान हर कदम साथ रहेंगे. सभा को आइसा बिहार के राज्य सचिव अभ्युदय, जवाहर लाल नेहरू छात्र संघ की अध्यक्ष सुचेता डे समेत आइसा-इनौस के कई राष्ट्रीय नेताओं ने संबोधित किया. संचालन इनौस के महासचिव कमलेश शर्मा ने किया.

कार्यक्रम के बाद संसद मार्च का आह्वान इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मो. सलीम ने किया. और फिर यही से शुरू छात्रों व पुलिस का संघर्ष… इस संघर्ष में कई छात्र घायल हुए. पुलिस ने आइसा-इनौस के शांतिपूर्ण मार्च पर भी लाठियां बरसाई और छात्र-छात्राओं को घसीटते हुए गिरफ्तार किया, लेकिन जब हजारों छात्र इस पर अड़ गए कि अगर आंदोलनकारियों को छोड़ा नहीं गया, तो वे सब गिरफ्तारी देंगे, तब प्रशासन को उन्हें छोड़ना पड़ा. पुलिस के हमले में कई छात्र-छात्राएं बुरी तरह घायल हो गए, कई लोगों के सर फटे हैं और कई लोगों के शरीर पर चोट आई है. आइसा के राष्ट्रीय महासचिव रवि राय ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि संसद में बैठे भ्रष्ट और लूटेरे लोगों के पक्ष में सुरक्षाबलों ने लोकतंत्र, रोजगार और भीषण लूट का विरोध करने वाले युवाओं और छात्रों पर लाठियां बरसाई और पुरुष पुलिसकर्मी छात्राओं को घसीटते हुए थाने में ले गए. रवि राय ने कहा कि जब तक भ्रष्टाचार और कारपोरेट लूट के लिए जिम्मेवार राजनीतिक-आर्थिक नीतियां बदल नहीं जातीं, छात्रों की लड़ाई तब तक जारी रहेगी. आज देश भर दूसरे छात्र-संगठनों ने भी इस पुलिसिया कार्रवाई की निन्दा की है.

दरअसल भ्रष्टाचार, कारपोरेट लूट और नवउदारवादी अर्थनीति के खिलाफ़ समान शिक्षा, रोजगार के मौलिक अधिकार और लोकतंत्र के सवाल पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा के बैनर तले देश भर से दिल्ली पहुंचे हजारों छात्र-नौजवानों का दिनांक 9 अगस्त को संसद मार्च था. पिछले साल ही जंतर-मंतर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ 100 घंटों तक संसद की बैरिकेटिंग करते हुए आइसा-इनौस के नेताओं ने घोषणा की थी कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वे अगली बार संसद के सामने लगाई गई पुलिस की बैरिकेटिंग को तोड़ने आएंगे, और इस बार उन्होंने उस बैरिकेटिंग को तोड़ा.

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