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निमेष रिर्पोट पर एक्शन टेकन रिर्पोट लाए सरकार नहीं तो होगा घेराव

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published August 21, 2013 6 Views
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8 Min Read
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BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : सपा सरकार यदि आगामी मानसून सत्र में आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर कार्यवायी रिपोर्ट नहीं ले आती है और रिपोर्ट के मुताबिक बेगुनाह तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद को आतंकवाद के मामले में फंसाने वाले पुलिस और आईबी अधिकारियों पर कार्यवायी नहीं करती है तो मुसलमान और इंसाफ पसंद अवाम विधान सभा को घेरने का काम करेंगे और यह सत्र नहीं चलने दिया जाएगा.

ये बातें रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने आज रिहाई मंच के अनिश्चितकालीन धरने के 92 वें दिन कहीं. मोहम्मद शुऐब ने कहा कि खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस और आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए रिहाई मंच पिछले तीन महीने से भी ज्यादा वक्त से धरने पर बैठा है जिसमें मणिपुर से लेकर केरल और तमिलनाडू तक से लोग शिरकत करने आ चुके हैं लेकिन राजधानी में ही रहने वाले मुलायम और आज़म के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और उल्टे उन्होंने खालिद के हत्यारों को बचाने के लिए उनकी हत्या को प्राकृतिक मौत बता दिया जिससे साबित होता है कि सपा के लिए धर्मनिरपेक्षता का मतलब सिर्फ मुस्लिम वोटों की फसल काटना है.

Rihai Manch Indefinite dharna completes 92 Daysमोहम्मद शुऐब ने कहा कि दंगे के सवाल हों या आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोष मुसलमानों की रिहाई का सवाल हो सपा अब मुसलमानों के इंसाफ और सुरक्षा के सवाल पर नंगी हो चुकी है.

इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि बटला हाऊस फर्जी मुठभेड़ के बाद सपा के कई बड़े नेता संजरपुर गए थे और उसकी जांच की मांग भी की थी. लेकिन संसद में सपा ने कभी भी बाटला हाऊस की जांच की मांग नहीं उठायी है.

इसी तरह तारिक और खालिद की गिरफ्तारी के समय भी सपा ने इसे बसपा सरकार द्वारा मुसलमानों को फंसाने की कवायद करार दिया था. लेकिन जब सत्ता में आई तो उसने खालिद की हत्या करवा दी. जिससे साफ हो जाता है कि सपा सिर्फ तभी तक धर्मनिरपेक्ष रहती है जब वह विपक्ष में रहती है. इसलिए मुसलमानों को यह तय करना होगा कि सपा अब कभी भी सत्ता में नहीं पहुंचे.

धरने को सम्बोधित करते हुए मुस्लिम मजलिस के प्रदेश प्रवक्ता जैद अहमद फारूकी ने कहा कि सपा सरकार सरकारी योजनाओं में 20 प्रतिशत अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी की बात कहकर मुसलमानों के प्रति किये गये नाइंसाफीयों को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही है. जब कि सच्चाई तो यह है कि मुस्लिम मंत्री अहमद हसन के अधीन काम करने वाले स्वास्थ्य विभाग में पिछले दिनों हुयी 36000 नियुक्तियों में मुसलमानों की संख्या सिर्फ 540 है.

इसी तरह वन विभाग में 200 में सिर्फ 3 मुसलमान, कृषि विभाग में विकलांगों के लिए आई 50 वैकेंसियों में मुसलमान सिर्फ 1 है. मुसलमानों के कल्याण और उर्दू के लिए काम करने वाली संस्थाओं मसलन का आज तक गठन ही नहीं किया गया. वहीं राज्य उर्दू एकेडमी खाली पड़ी है, उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के अंदर मदरसा मान्यता कमेटी का गठन नहीं किया गया और पचासों हजार मदरसे मान्यता के लिए अधर में लटके हुये हैं.

जैद अहमद फारूकी ने सपा सरकार पर साम्प्रदायिक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा सरकार द्वारा शासन की तरफ से नामित किये जाने वाले तीन प्रतिशत सभासदों में भी मुसलमान गायब हैं और यही स्थिति नगर पालिका और नगर निगमों में भी है.

उन्होंने कहा कि सपा सरकार की कैबिनेट का अगर प्रतिशत निकाला जाए तो उसमें भी मुसलमान मंत्रियों का प्रतिशत 20 से कम है. इसलिए सपा को चाहिए कि सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों के हिस्सेदारी का शिगूफा छोड़ने के बजाए वह अपने मंत्री मंडल में मुसलमानों को 20 प्रतिशत हिस्सेदारी दे.

समाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता असद हयात ने कहा कि अभी तक पुलिस द्वारा मुसलमानों से सम्बंधित मामलों में निष्पक्ष विवेचना नहीं होने के मामले सामने आते थे परंतु अब सीबीआई जैसी संस्था भी साम्प्रदायिकता से ग्रस्त हो गयी है. जनपद लखीमपुर खीरी का निघासन कोतवाली में घटित सोनम हत्या कांड और भरतपुर, राजस्थान का गोपालगढ़ मस्जिद में डीएम और एसपी की मौजूदगी में पुलिस बल द्वारा दस मुसलमानों की हत्या और चालीस से ज्यादा घायलों का गोली कांड इसके उदाहरण हैं.

सीओ जीयाउल हक हत्या कांड में भी निष्पक्ष विवेचना सीबीआई ने नहीं की और खालिद के मामले में बिना कागजात देखे ही सीबीआई द्वारा यह कह देना कि वह इस मामले को हाथ में नहीं लेना चाहती, सीबीआई की मनमानी और साम्प्रदायिकता का परिचायक है.

निष्पक्ष जांच एजेंसी का कत्वर्य होता है कि वह आखिरी बिंदु तक गहन जांच करने के बाद अपना निष्कर्ष निकाले परंतु खालिद के मामले में मजिस्ट्रेट और ज्यूडिशियल इंक्वायरी को ही सीबीआई सबकुछ समझ बैठी और भूल गयी कि इनके पास साक्ष्य एकत्र करने और उनकी विवेचना करने और आरोप पत्र दाखिल करने का कोई अधिकार नहीं है. इसलिए सीबीआई द्वारा जांच करना आवश्यक था. लेकिन आईबी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए उसने ऐसा नहीं किया.

धरने को सम्बोधित करते हुए पिछड़ा समाज महासभा के एहसानुल हक मलिक और भागीदारी आंदोलन के पीसी कुरील ने कहा कि सपा ने सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं छला है पिछड़ों, अति पिछड़ों और दलितों को भी ठगने का काम किया है. चाहे वह प्रमोशन में आरक्षण का सवाल हो या लोक सेवा आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षण का सवाल सपा सरकार ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता सवर्ण और सामंती वर्गों के हितों की रक्षा हो गया है.

भारतीय एकता पार्टी के सैय्यद मोईद अहमद और इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी और हारिस सिद्दीकी ने कहा कि रिहाई मंच का धरना 29 अगस्त को सौ दिन पूरे करने जा रहा है. मुसलमानों के सवाल पर चलने वाला यह इतिहास का सबसे लम्बा धरना है. इसने मुसलमानों के दिलों से आईबी और एटीएस जैसी साम्प्रदायिक और अपराधी संस्थाओं का खौफ निकाल दिया है. जो लोकतंत्र की बहाली के लिए सबसे ज़रूरी है. क्योंकि जिस समाज और देश में पुलिस की ज्यादतीयों से जनता डरती है वहां वास्तविक लोकतंत्र नहीं स्थापित हो सकता.

रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव और शाहनवाज आलम ने कहा कि रिहाई मंच के धरने के 100 वें दिन 29 अगस्त, वृहस्पतवार को होने वाले विधान सभा मार्च में शिरकत करने के लिए आरएसएस की साम्प्रदायिकता और आतकंवाद पर चर्चित पुस्तक ‘गोडसेज चिल्ड्रेन’ के लेखक सुभाष गताडे, सीपीएम नेता और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली, पत्रकार अनिल चमडि़या, मुसलमानों और आदिवासियों के जनसंहारों के सवाल उठाने वाले पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स के परमजीत सिंह समेत देश के कई हिस्सों से सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता आएंगे. आज धरने का संचालन राजीव यादव ने किया.

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