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Reading: मुल्ला मुलायम की करतूत : बनवाया श्री राम जन्मभूमि थाना
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BeyondHeadlines > India > मुल्ला मुलायम की करतूत : बनवाया श्री राम जन्मभूमि थाना
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मुल्ला मुलायम की करतूत : बनवाया श्री राम जन्मभूमि थाना

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published December 5, 2013 6 Views
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7 Min Read
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BeyondHeadlines News Desk

अयोध्या : समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव आज कल अतीत में की गई अपनी गलतियों पर कुछ ज्यादा ही शर्मिन्दा होते हुए माफीनामें जारी कर रहे हैं. इसी क्रम में उन्होंने पिछले दिनों एक बयान में 30 अक्टूबर 1990 के अयोध्या में बाबरी मस्जिद पर कथित कारसेवकों पर गोली चलवाने के लिए क्षमा प्रार्थना की थी. यहां तक तो ठीक है कि गोली चलवाने का फैसला बहुत ही नाजुक समय में लिया गया होगा, लेकिन कभी खुद को मुल्ला मुलायम सिंह कहलवाने में सुखानुभूति करने वाले नेता जी तो सच्चे कारसेवक निकले.

अयोध्या (फैजाबाद) के सामाजिक कार्यकर्ता और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर शाह आलम को सरकारी स्तर पर जो सूचनाएं प्राप्त हुई हैं वह काफी चौंकाने वाली हैं. “रामलला हम आएंगे/ मंदिर वहीं बनाएंगे” का नारा लगाने वाले लोग तो पता नहीं कब मंदिर बनाएंगे लेकिन अपने नेता जी ने तो बाकायदा श्री रामजन्मभूमि थाना बनवा दिया है.

3सरकारी दस्तावेजों के अनुसार अयोध्या में टेढ़ी बाजार पुलिस चौकी हुआ करती थी लेकिन शासन के आदेशानुसार इस पुलिस चौकी को थाने में परिवर्तित कर दिया गया और शासन के आदेशानुसार इसका नाम थाना श्री रामजन्म भूमि कर दिया गया. दस्तावेज़ बताते हैं कि शासन के आदेशानुसार यह कार्रवाई दिनाँक 03 अक्टूबर 1990 को की गई. गौर करने वाली बात यह है कि 03 अक्टूबर 1990 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे और बाबरी मस्जिद के गुम्बद पर चढ़े तथाकथित कारसेवकों पर 30 अक्टूबर 1990 को गोली चलवाई गई थी.

थाना श्री रामजन्मभूमि के विषय में जानकारी देता सरकारी पत्र मामला ऐसे खुला कि जब थाना श्री रामजन्मभूमि बनाया गया तो कुछ स्थानीय नागरिकों ने इसके नाम पर आपत्ति की थी. लिहाजा आपत्ति के मद्देनज़र थाने के बोर्ड पर “श्री” मिटाकर “थाना रामजन्मभूमि” कर दिया गया. इस पर हाल ही में जब शाह आलम ने जांच पड़ताल की तो तथ्य सामने आया कि सरकारी दस्तावेजों में तो अभी भी थाना श्री राम जन्मभूमि ही है और यह 03 अक्टूबर1990 को शासन के आदेशानुसार किया गया है. अब सवाल यह है कि जब शासकीय दस्तावेजों में यह थाना श्री राम जन्मभूमि ही है तब सार्वजनिक रूप से इसका “श्री” किसने हटा दिया और जनता के सामने यह “थाना राम जन्मभूमि” क्यों है?

मामला इसलिए और गंभीर है कि क्या नेता जी पहले ही तय कर चुके थे कि अयोध्या में रामजन्म भूमि भी है और वह भी बाबरी मस्जिद के स्थान पर ही? अन्यथा एक विवादित नाम पर थाने का नामकरण क्यों किया गया? क्या यह थाना बाबरी मस्जिद भी किया जा सकता था? यदि नहीं तो थाना श्री रामजन्म भूमि किस आधार पर कर दिया गया?

अपेक्षा की जा सकती है कि उत्तर प्रदेश सरकार एवं समाजवादी पार्टी इस पर अपना स्पष्टीकरण अवश्य देगी कि क्या थाना श्री रामजन्म भूमि के निर्माण सम्बंधी शासन के आदेश की जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री को थी.

अक्टूबर का महीना है ही कुछ ऐसा ही कि नेता जी के लिए परेशानियां खड़ा कर देता है. इसी अक्टूबर 2013 में यूपी सरकार के गृह विभाग की एक चिट्ठी में वरिष्ठ पुलिस अफसरों और फैजाबाद के डीएम को बैठक के लिए बुलाया गया था. इस चिट्ठी में लिखा था कि 14 अक्टूबर को अयोध्या में राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए चर्चा में शामिल हों. भाजपा और कांग्रेस के विरोध करने के बाद समाजवादी पार्टी ने इस मामले पर सफाई दी थी. पार्टी के मुताबिक चिट्ठी में भाषाई गलती थी और ये बैठक दशहरा को लेकर बुलाई गई थी.

उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने विश्व हिन्दू परिषद के संकल्प दिवस के मद्देनजर 14 अक्टूबर को बुलाई गई बैठक के लिए अधिकारियों को जारी चिट्ठी में ‘सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर संसदीय कानून बनाकर अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण’ कराने का जिक्र किया था. हालांकि सरकार ने फौरन सफाई पेश कर इसे भूलवश हुई गलती करार देकर मामला संभालने की कोशिश की थी. गृह विभाग के सचिव सर्वेश चंद्र मिश्र को निलंबित करते हुए सारा दोष मिश्र के ऊपर मढ़ दिया था. लेकिन अब लगता है कि दाल में कुछ काला ज़रूर था.

शाह आलम कहते हैं कि अभी बाबरी मस्जिद/श्री राम जन्मभूमि का विवाद सुलझा ही नहीं था कि सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने तीन अक्टूबर 1990 कोतवाली अयोध्या अंतर्गत टेढ़ी बाज़ार पुलिस चौकी का नाम बदल कर थाना श्री रामजन्म भूमि कर दिया. 30 अक्टूबर 1990 कारसेवकों पर गोली चलवाने के हीरो बने मुलायम हाल में ही इस घटना पर अफ़सोस जता चुके हैं. इससे पहले वोटों कि छीना झपटी में बहुत सारे खेल खेले जा चुके हैं.

खैर एक पुरानी घटना 1986 में कांग्रेस ने ताले खुलवाये. इतना ही नहीं 1989 में राजीव गाँधी ने फिर वही गलती दोहराई मस्जिद की ज़मीन मन्दिर निर्माण के लिए शिलान्यास करा दिया. इसका अंज़ाम यह हुआ कि लोकसभा चुनाव में राजीव गाँधी का अयोध्या आकर प्रचार करने व रामराज्य लाने का वादा भी कुछ काम नहीं आया… और यह सीट भी हार गयी. ठीक ही कहता है रामदीन ‘बाबूजी श्रीराम जन्भूमि से डर लगता है’ वैसे भी आम आदमी थाने से दूर रहने में भलाई समझता है.

शाह आलम कहते हैं कि मंदिर आंदोलन के दौर में अचानक यह नाम क्यों सूझा ? अभी फैजाबाद में सपा के चार मंत्री हैं… इसका मतलब वोटों की छीना-झपटी में एक दिन जब हम सोकर उठेंगे तो समाजवादी पार्टी भावी राम मंदिर भी बना देगी ? यह विचारधाराओं के अंत का दौर है.

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