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Reading: दूसरी दामिनी मामले में कविता कृष्णनन और कल्याणी मेनन सेन का बयान
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BeyondHeadlines > Lead > दूसरी दामिनी मामले में कविता कृष्णनन और कल्याणी मेनन सेन का बयान
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दूसरी दामिनी मामले में कविता कृष्णनन और कल्याणी मेनन सेन का बयान

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published December 23, 2013 11 Views
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4 Min Read
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ये बयान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें पीड़िता का भी जिक्र है और खुर्शीद अनवर का भी… 

Abhishek Upadhyay

इसे ध्यान से पढ़ें. इन दोनो में कोई दक्षिणपंथी नहीं है. इसलिए दक्षिणपंथ बनाम वामपंथ का सहारा लेकर पीड़िता का चरित्र हनन न करें. कल्याणी मेनन सेन खुद खुर्शीद अनवर के एनजीओ इंस्टीट्यूट फार सोशल डेमोक्रेसी की बोर्ड मेंबर हुआ करती थीं, जिन्होंने अनवर के अपने दोस्तों को पीड़िता के चरित्र हनन की इजाज़त देने और गंभीर आरोपों के बावजूद भी अपना पद न छोड़ने के विरोध में इस्तीफा दे दिया था. वे देश की जानी मानी महिला अधिकारवादी कार्यकर्ता हैं. महिलाओं के लिए ज़मीनी स्तर पर लड़ाई लड़ती रही है. जागोरी संस्था से जुडी हैं. कविता कृष्णनन ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन एसोसिएशन की सचिव हैं. कविता भी स्त्री के हक में उठने वाली देश की सबसे सशक्त आवाजों में से एक हैं. इस बयान में साफ तौर पर लिखा है कि–

“सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ता के खिलाफ़ लगातार जारी धमकियाँ और खुसफुसाहटें भी उतनी ही व्यथित करने वाली हैं. हमें डर है कि इस तरह के अभियानों से इस त्रासद मामले के समाधान की बची-खुची संभावना भी नष्ट हो जाएगी.” इसमें इस बात का भी जिक्र है कि किस तरह से शिकायतकर्ता यानी complainant यानि की पीड़िता के खिलाफ भी धमकी और चरित्र-हनन का सामूहिक अभियान चलाया जा रहा था. ये बयान पढ़िए और सोचिए कि हम इस मामले में कहां खडे़ हैं, जहां पीड़िता अब सीआरपीसी के सेक्शन 164 के तहत यानि मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराकर बलात्कार की और सोडोमाइज किए जाने की भी पुष्टि कर चुकी है.

बयान–

खुर्शीद अनवर के निधन से हमें गहरा सदमा और दुख पहुंचा हैं.
महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध कार्यकर्ता होने के नाते खुर्शीद अनवर के खिलाफ लगे आरोपों के सिलसिले में हम कानून और न्याय की मुनासिब प्रक्रिया को सुनिश्चित करवाने की कोशिश करते रहे.

ये आरोप सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना बहसों में लगाए गए. वहीं शिकायतकर्ता के खिलाफ भी धमकी और चरित्र-हनन का सामूहिक अभियान चलाया जा रहा था.

हम जानते हैं कि सोशल मीडिया पर इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना अभियान से दोनों पक्षों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है. इसलिए हम दोनों [इन्स्टीच्यूट फॉर सोशल डेमोक्रेसी की बोर्ड सदस्य की हैसियत से कल्याणी और एक राष्ट्रीय स्तर के महिला संगठन की पदाधिकारी के बतौर कविता] ने शिकायतकर्ता से संपर्क करने की कोशिश की. हमने कोशिश की कि शिकायतकर्ता सामने आ सके जिससे समुचित जांच शुरु हो सके.

हम समझ-बूझ कर सीधे पुलिस या राष्ट्रीय महिला आयोग के पास नहीं गए क्योंकि हमारे पास इस मामले में शिकायतकर्ता के स्पष्ट निर्देश नहीं थे. हमने अभियुक्त और शिकायतकर्ता, दोनों की गोपनीयता का हर संभव तरीके से पूरा ध्यान रखा. हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि हमने शिकायतकर्ता की गवाही और मामले से जुड़े किसी भी अन्य तथ्य को किसी से साझा नहीं किया.

खुर्शीद अनवर की असामयिक एवं दुखद मृत्यु की त्रासदी अपने पीछे बहुतेरे अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है. सोशल मीडिया पर शिकायतकर्ता के खिलाफ लगातार जारी धमकियाँ और खुसफुसाहटें भी उतनी ही व्यथित करने वाली हैं. हमें डर है कि इस तरह के अभियानों से इस त्रासद मामले के समाधान की बची-खुची संभावना भी नष्ट हो जाएगी.

हम खुर्शीद अनवर के मित्रों, सहयोगियों और परिवारजनों के दुख के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आशा करते हैं कि धर्मनिरपेक्षता और शांति के लिए किया गया उनका महत्वपूर्ण काम उनकी सच्ची स्मृति बन कर रहे.

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