वाह रे मीडिया! यह ख़बर गुजरात के भ्रष्ट मंत्रियों की है, इसलिए दबा दो…

Beyond Headlines
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Shailendra Gupta for BeyondHeadlines

वाह रे मीडिया तेरी नीति… तुम में है अगिनित छेद और खोट! घपला किसी भी राज्य का हो तो मीडिया का दायित्व यह है कि पाठकों को बिना भेदभाव के सूचनाएं उपलब्ध कराये. आजकल शायद किसी ऊंचे स्वार्थवश भाजपा और खास कर आदरणीय नमो जी को खुश रखने के अभियान के तहत पाठकों के प्रति जवावदेही को चूना लगाते हुए दैनिक जागरण ने “गुजरात के मंत्रियों ने लगाया अरबों का चूना” लगाने वाली ख़बर को प्रमुखता से न छाप कर 22.6.2014 के अंक में पेज 19 पर सिंगल कॉलम में छाप कर “अजागरण” का परिचय दिया है. (चलिए कम से कम जागरण ने कुछ तो जगह दिया, बाकी अखबारों को तो यह खबर मालूम ही नहीं है. और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो इस खबर को खबर मानती भी नहीं)

ज़रा सोचिए! अगर यही खबर उत्तर प्रदेश के मंत्रियों के बारे में होती तो जागरण में खबर प्रथम पेज पर कम से कम दो कॉलम में चस्पा होती. मैं किसी एक सरकार की तरफदारी नहीं कर रहा हूँ, मुद्दा तो सिर्फ मीडिया धर्म का है, उसके दायित्व का है…

गुजरात के मंत्रियों ने लगाया अरबों का चूना

नरेंद्र मोदी को अंधेरे में रख दो मंत्रियों ने 400 करोड़ का घपला

जागरण संवाददाता, अहमदाबाद : गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को अंधेरे में रखकर सरकार के दो मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी और दिलीप संघाणी ने ठेकेदारों के साथ मिलकर चार सौ करोड़ रुपये की घपलेबाजी को अंजाम दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर जांच कर रहे अपराध निरोधक शाखा(एसीबी) ने अपने आरोप पत्र में यह बात कही है। गांधीनगर की स्थानीय अदालत में पेश 350 पेज के आरोप पत्र में एसीबी ने कहा है कि तत्कालीन मत्स्योद्योग मंत्री मंत्री दिलीप संघाणी तथा राज्यमंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को जानकारी दिए बिना प्रदेश के जलाशयों से मछली पकड़ने का ठेका दे दिया था। गुजरात सरकार की वर्ष 2004 की नीति के मुताबिक, बिना निविदा के ठेका नहीं दिया जा सकता था। इसके बावजूद दोनों मंत्रियों ने अपने मिलने वाले ठेकेदारों को पहले 30 जुलाई 2008 को 38 जलाशयों से और 30 जून 2009 को 12 जलाशयों से मछली पकड़ने का ठेका काफी कम कीमत पर जारी कर दिया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसमें 400 सौ करोड़ रुपये का घपला हुआ है। एसीबी ने इस मामले में मंत्रियों के बयान दर्ज किए।

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