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सरकार इंडियन मुजाहिदीन पर श्वेतपत्र जारी करे- पीयूसीएल

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published June 17, 2012 13 Views
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8 Min Read
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बीएच न्यूज़ डेस्क

खुफिया जांच एजेंसियां और एटीएस आतंकवाद के नाम पर निर्दोष मुस्लिम युवकों को फंसा रही हैं. जिसके चलते आज पूरा मुस्लिम समाज डर और दहशत के माहौल में जीने को मजबूर है. आज ज़रूरत इस मुस्लिम विरोधी राज्य मशीनरी के खिलाफ खडे होने की है. यह बातें पीयूसीएल, एनएपीएम, लोकसंघर्ष, जेयूसीएस और तराई समेत अन्य जनसंगठनों के नेतृत्व में सीतापुर के बिसवां इलाके के कुतुबपुर में आयोजित मानवाधिकार जनसम्मेलन में वक्ताओं ने कही.

गौरतलब है कि कुतुबपुर वही गांव है जहां से ताल्लुक रखने वाले दो मुस्लिम युवकों बशीर हसन और मो. शकील को एटीएस ने इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी बता कर पिछले दिनों पकड़ा था. और बाकी परिजनों को पकड़ने की फिराक में थी. लेकिन मानवाधिकार संगठनों की सक्रियता के चलते वह अपने इस आपराधिक षडयंत्र में विफल हो गयी.

जबरदस्त गर्मी के बावजूद दो हजार से ज्यादा की संख्या में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुये पीयूसीएल के प्रदेश उपाध्यक्ष और रिटायर्ड पुलिस महानिरिक्षक एसआर दारापुरी ने कहा कि खुफिया विभाग इस देश की सबसे साम्प्रदायिक संस्था है, जो समाज में मुस्लिम विरोधी माहौल बनाने में जुटी रहती है. जिसमें उसका साथ स्थानीय पुलिस और मीडिया देती है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के नाम पर जितनी भी गिरफ्तारियां हुई हैं उनमें एटीएस और पुलिस कानूनी मापदंडों पर खरी नहीं हैं. उन्होंने बिना वर्दी और नेमप्लेट के ही दबिश दी और गिरफ्तारियां की हैं, जो कि कानूनन गलत है. उन्होंने आहवान किया कि इन गैरकानूनी पुलिसिया जुर्म के खिलाफ लोग ग्राम सुरक्षा कमेटियां बनायें और किसी भी बिना वर्दी के पुलिस या एटीएस कर्मी को अपने गांव में न घुसने दें. उन्होंने आगे कहा कि बिना कानूनी प्रावधानों को माने किसी को गिरफ्तार करना न सिर्फ उस व्यक्ति के मानवाधिकारों का हनन है बल्कि राज्य के बढते अपराधीकरण को भी दशार्ता है, जो लोकतंत्र के लिये खतरनाक है.

वहीं चर्चित वकील मो. शुएब ने कहा कि एक तरफ तो सपा अपने चुनावी घोषणापत्र में निर्दोष मुस्लिम नौजवानों को छोडने का वायदा करती है, लेकिन सत्ता में आ जाने के बाद वायदा तो भूलती ही है, नई गिरफ्तारियां भी शुरू हो जाती हैं. उन्होंने इस पूरे मसले पर सपा सरकार को चेतावनी देते हुये कहा कि अगर गिरफ्तारियां नहीं रूकीं और निर्दोष नहीं छूटे तो मुसलमान 2014 में मुलायम सिंह को सबक सिखाएगा.

वामपंथी नेता ताहिरा हसन ने सम्मेलन में महिलाओं की मौजूदगी को सराहते हुये कहा कि महिलाओे का इस आंदोलन में शामिल होना आंदोलन की आवाज को और बुलंद करेगा. मानवाधिकार कार्यकर्ता महताब आलम ने कहा कि राजनीतिक दलों में आपस में चाहे जितनी असहमतियां हों लेकिन मुस्लिमों को आतंकवादी साबित करने के होड़ में सभी एक साथ आ जाती हैं. इसीलिये हम देखते हैं कि मोदी का गुजरात हो या शीला दिक्षित की दिल्ली या नीतीश का बिहार सभी जगह मुसलमानों की हालत एक सी है.

वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों के फंसाए जाने में मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुये कहा कि मीडिया हिंदुत्ववादी प्रचारतंत्र का भोंपू हो गया है जो ‘सूत्रों के हवाले’ से फर्जी खबरें गढ कर मुसलमानों की छवि खराब करता है. उन्हांने कहा कि आज मीडिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपने पाठकों और दशर्कों के बजाये खुफिया विभाग के प्रति जवाबदेह लगते हैं. आज़मगढ से आए पीयूसीएल नेता मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि खुफिया और एटीएस अब सीतापुर को भी आज़मगढ बना देना चाहती है जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा.

लोकसंघर्ष पत्रिका के सम्पादक रणधीर सिंह सुमन ने इंडियन मुजाहिदीन के अस्त्तिव पर सवाल उठाते हुये कहा कि यह खुफिया विभाग द्वारा बनाया गया एक कागजी संगठन है. जिसके नाम पर एटीएस निर्दोष मुस्लिमों को फंसाती है. राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय सचिव मौलाना ताहिर मदनी ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को आतंकवाद के नाम पर सीआईए और मोसाद के एजेंडे को आगे बढाने का आरोप लगाते हुये कहा कि ये सरकारें अपने नागरिकों के बजाये ओबामा के प्रति जिम्मेदार हैं.

पीयूसीएल के प्रदेश संगठन सचिव राजीव यादव ने कहा कि खूफिया विभाग और एटीएस ने यासीन भटकल नाम की प्रेतात्मा को छोड़ा है. जो खुद तो कभी नहीं पकड़ा जाता लेकिन वह जहां-जहां भी रूकता है या जिनके मोबाइल में उसका नम्बर होता है, वह पकड लिये जाते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार कभी कहती है कि आईएम सिमी का फ्रंटल संगठन है तो कभी उसे आईएसआई का तो कभी लश्कर का बताती है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकार आईएम पर श्वेतपत्र जारी करे. उन्होंने यरवदा जेल में मार दिये गये कतील सिद्दीकी की हत्या का आरोप एटीएस और खूफिया विभाग पर लगाते हुये कहा कि कतील लगातार अपने घर वालों से फोन पर बात करता था और इस दौरान उसने कई बार अपनी बीवी को एटीएस से अपने जान के खतरे के बारे में बताया था. उन्होंने कहा कि अगर मुम्बई एटीएस के अधिकारियों से मोबाइल पर हुई बातचीत का ब्यौरा सामने आ जाता है तो कतील के हत्यारे एटीएस अधिकारियों तक पहुंचा जा सकता है. जनसम्मेलन को डा. उमेश चन्द्रा, जैद फारुकी और ऋषि कुमार सिंह ने भी संबोधित किया. संचालन पीयूसीएल के प्रदेश संगठन सचिव शाहनवाज आलम ने किया.

सम्मेलन के अंत में सात सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया… 
1. कतील सिद्दीकी की हत्या पर मुम्बई हाई कोर्ट स्वयं संज्ञान लेते हुये उस पर न्यायिक जांच बैठाए.
2. आतंकवाद के आरोप में बंद सभी मुस्लिम युवकों की सुरक्षा की गारंटी की जाए.
3. फसीह महमूद को भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तत्काल प्रस्तुत करे.
4. प्रदेश की सपा सरकार आतंकवाद के आरोप में बंद बेगुनाह मुस्लिम युवकों को रिहा करने का अपना वायदा तत्काल पूरा करे.
5. बशीर हसन और शकील को आतंकवाद के आरोप में फंसाने वाले यूपी एटीएस के अधिकारियों पर सरकार तत्काल कार्यवाई करते इनकी गिरफ्तारी पर जांच आयोग का गठन करे.
6. तारिक कासमी और खालिद मुजाहिद की गिरफ्तारी की जांच के लिये गठित आरडी निमेश जांच आयोग की रपट तत्काल सार्वजनिक की जाए.
7. पीयूसीएल नेता और पत्रकार सीमा आजाद और उनके पति विश्वविजय की रिहायी की दिशा में सरकार ठोस कदम उठाये और उन पर लगाये गये मुकदमे वापस ले.

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