BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Reading: फांसी तो हो गर्इ किन्तु यह तो पता चले कि संसद पर हमला किया किसने था?
Share
Font ResizerAa
BeyondHeadlinesBeyondHeadlines
Font ResizerAa
  • Home
  • India
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Search
  • Home
  • India
    • Economy
    • Politics
    • Society
  • Exclusive
  • Edit/Op-Ed
    • Edit
    • Op-Ed
  • Health
  • Mango Man
  • Real Heroes
  • बियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी
Follow US
BeyondHeadlines > Latest News > फांसी तो हो गर्इ किन्तु यह तो पता चले कि संसद पर हमला किया किसने था?
Latest NewsLeadबियॉंडहेडलाइन्स हिन्दी

फांसी तो हो गर्इ किन्तु यह तो पता चले कि संसद पर हमला किया किसने था?

Beyond Headlines
Beyond Headlines Published March 27, 2013 20 Views
Share
10 Min Read
SHARE

Sandeep Pandey for BeyondHeadlines

(नोट: हाल ही में लियाकत शाह के मामले से साफ हो गया है कि किस तरह पुलिस श्रेय लेने के लिए आत्मसमर्पण किए हुए उग्रवादियों को फर्जी मामलों में फंसा कर आतंकवादी के रूप में पेश करती है. यदि जम्मू-कश्मीर पुलिस और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने खुल कर लियाकत के पक्ष में भूमिका नहीं ली होती तो सारा देश यही मानता कि लियाकत होली के समय दिल्ली में विस्फोट करने आया था. यह भी सवाल उठता है कि पुरानी दिल्ली में बरामद हथियार-बारूद किसने रखे थे? हमारा मानना है कि अफजल गुरु का मामला लियाकत जैसा ही था. एस.टी.एफ. और दिल्ली पुलिस के विशेष सेल ने उसे बलि का बकरा बना दिया. इस देश में पुलिस अपनी अक्षमता को छिपाने के लिए अन्य मामलों में भी निर्दोष लोगों को फंसाती रही है.)

Photo Courtesy: rt.com

अफजल गुरु को फांसी हो गर्इ. अफजल को फांसी की सजा इसलिए दी गर्इ थी कि राष्ट्र की सामूहिक चेतना संतुष्ट हो सके. राष्ट्र की सामूहिक चेतना संतुष्ट हो गर्इ होगी. राष्ट्रवादी लोगों ने नाच गाकर, एक-दूसरे को मिठार्इ खिला कर, पटाखे चला कर खुशियां मनार्इं. शायद सजा सुनाने के पीछे उददेश्य भी यही था कि एक अध्याय पूरा हो.

किंतु एक सवाल अनुत्तरित रह जाता है. संसद पर हमले की साजिश आखिर रची किसने थी? जो पांच कड़ी सुरक्षा भेद कर संसद भवन तक पहुंच गए थे वे तो मौके पर ही मारे गए. जांच एजेंसियों के अनुसार साजिशकर्ता हैं मसूद अज़हर, गांजी बाबा और तारिक अहमद जो पाकिस्तान में हैं. जाहिर है कि इन्हें अभी तक गिरफतार नहीं किया जा सका है.

फिर अफजल कौन था और संसद हमले में उसकी क्या भूमिका थी? आइए देखें उसका और उसकी पत्नी का पक्ष जो पत्र रूप में उसकी सजा से पहले सार्वजनिक हो चुका था.

अफजल गुरु को फांसी की सजा हुर्इ मात्र उस इकबालिया बयान के आधार पर जो उसने विशेष पुलिस सहायक पुलिस आयुक्त राजबीर सिंह के दबाव में मीडिया के सामने दिया. उसे यह धमकी दी गर्इ थी कि यदि वह ऐसा नहीं करेगा तो उसके परिणाम उसकी पत्नी और बच्चों के लिए सही नहीं होंगे.

अफजल गुरु जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट की ओर 1990 में आकर्षित हुआ और प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान गया. किन्तु तीन माह ही रहने के बाद वह लौट आया क्योंकि उसे इन संगठन के नेताओं की बातें, खासकर पाकिस्तान के पक्ष में, पसंद नहीं आर्इं. उसने लौटकर सीमा सुरक्षा बल के सामने आत्मसमर्पण किया. उसे जल्दी ही समझ में आया कि आत्मसमर्पित उग्रवादी के रूप में रहना आसान नहीं. उसे समय समय पर सेना, बी.एस.एफ. व एस.टी.एफ. जैसी सुरक्षा एजेंसियां परेशान करती रहती थीं. उसका परिवार सुरक्षित रहे इसलिए अफजल गुरु जैसे आत्मसमर्पण किए हुए उग्रवादी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बताए गए सही या गलत काम करने को मजबूर थे. जो पैसे दे सकते थे उन्हें परेशान नहीं किया जाता.

यानी यहां भी भ्रष्टाचार. एक बार पारमपोर पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी अकबर ने उससे पांच हजार रुपए मांगे थे और फिरौती न मिलने की सूरत में उसे नकली दवाएं व चिकित्सीय उपकरण बेचने के आरोप में गिरफतार किए जाने की धमकी दी गर्इ. अफजल के मुदकमे के दौरान अकबर भी गवाह के रूप में न्यायालय में पेश हुआ और अफजल के खिलाफ बयान दिया. अफजल ने 1997-98 में दवाओं और उपकरणों का व्यापार कमीशन के आधार पर शुरू किया था चूकिं आत्मसमर्पित उग्रवादियों को नौकरी नहीं मिल सकती थी. इससे अफजल की चार-पांच हजार प्रति माह की कमार्इ हो जाती थी.

वर्ना एस.टी.एफ. के साथ विशेष पुलिस अधिकारी के रूप में काम करना पड़ता जिसमें आतंकवादियों के हाथ मारे जाने का खतरा रहता था. अफजल को एस.पी.ओ. को भी 300-500 रुपए घूस देनी पड़ती थी ताकि वे उसे परेशान न करें.

एक दिन सुबह 10 बजे जब वह दो माह पुराने स्कूटर से जा रहा था तो एस.टी.एफ. उसे पकड़ कर पलहल्लन शिविर ले गर्इ. यहां उसे काफी प्रताडि़त किया गया. फिर उसे हमहामा शिविर ले गए. यहां भी यातनाओं का दौर चलता रहा. एस.टी.एफ. उससे रुपयों की मांग कर रही थी जिसके लिए उसे अंतत: उसे अपनी पत्नी के जेवर बेचने पड़े. कुल मिलाकर 80 हजार रुपए नकद और अपनी नर्इ स्कूटर से उसे हाथ धोना पड़ा. हरेक प्रताड़ना के बाद सिथति ये होती थी कि कर्इ दिनों तक इलाज कराना पड़ता था.

1990 से 1996 के दौरान अफजल ने दिल्ली विश्वविधालय में पढ़ार्इ की थी और उस दौरान टयूशन भी पढ़ाता था. बड़गाम के एस.एस.पी. अशफाक हुसैन के साले अल्ताफ हुसैन ने उसे अपने दो बच्चें को पढ़ाने के लिए कहा. एक दिल अल्ताफ अफजल को डी.एस.पी. दरविंदर सिंह के पास ले गया. उससे कहा गया कि उसे मोहम्मद नामक एक आदमी, जो गैर-कश्मीरी था, को दिल्ली ले जाना है और उसे वहां किराए का घर दिलवाना है.

वहां कार खरीदवाने से लेकर उसने मोहम्मद की सभी प्रकार से मदद की. एक दिन मोहम्मद ने उसे पैंतीस हजार रुपए देकर कश्मीर वापस जाने के लिए मुक्त कर दिया. इस बीच अफजल ने दिल्ली में आकर अपनी पत्नी और चार वर्ष के बेटे गालिब के साथ रहने के फैसले के साथ एक कमरा भी इंदिरा विहार में किराए पर ले लिया. उसने चाभियां मकान मालकिन को सौंपते हुए उनसे कहा कि वह शीघ्र परिवार के साथ लौटेगा.

संसद हमले के बाद कश्मीर पहुंच कर जब अगले दिन वह सोपोर की बस पकड़ने के लिए बस स्टैण्ड पर खड़ा था तो श्रीनगर पुलिस ने उसे गिरफतार कर लिया और पारमपोरा पुलिस थाने ले गर्इ. उससे पैंतीय हजार रुपए ले लिए गए. एस.टी.एफ. मुख्यालय ले गए. वहां से दिल्ली ले जाया गया. विशेष सेल ने यहां उसको प्रताडि़त करना शुरू किया.

विशेष सेल द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में जब उसने यह कह दिया कि सैयद अब्दुर रहमान गिलानी निर्दोष हैं तो ए.सी.पी. राजबीर सिंह मीडिया के सामने उसपर बहुत नाराज हुए और मिडिया को उस बयान को न दिखाने या छापने का आग्रह किया.

अफजल को यह समझाया गया कि एस.टी.एफ. का सहयोग करने में ही उसकी भलार्इ है. दिल्ली में उसे उन जगहों पर ले जाया गया जहां से मोहम्मद ने तमाम चीजें खरीदी थीं। फिर उसे कश्मीर ले गए और वहां से वापस दिल्ली. उससे कर्इ सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए.

अफजल को न्यायालय में अपनी बात कहने का मौका नहीं मिला. न्यायाधीश ने उससे कहा कि अंत में उसे मौका दिया जाएगा लेकिन अदालत ने उसके बयान दर्ज नहीं किए और न ही दर्ज किए बयानों को उसे दिखाया गया. यदि सिर्फ उसे किए गए फोन काल का ही रिकार्ड निकाला जाता तो पता चल जाता कि एस.टी.एफ. ने उसे कितने फोन किए. उच्च न्यायालय का फैसला आने तक उसके मुकदमे की कैसी सुनवार्इ हो रही है उसे इसका कोर्इ अंदाजा ही नहीं था.

हो सकता है अफजल ने अपने को बचाने के लिए उपर्यक्त बात कही हों. किन्तु यदि ये बातें सही हैं तो बड़ी गम्भीर हैं. एक तो अफजल का संसद हमले से सिर्फ इतना सम्बंध था कि उसने मोहम्मद नामक एक आदमी की मदद की जिसकी कोर्इ भूमिका संसद हमले में प्रतीत होती है. यह मोहम्म्द कौन है? सबसे गम्भीर बात यह है कि उसने मोहम्मद की मदद एस.टी.एफ. के कहने पर की जिस बात को न्यायालय ने नहीं माना। क्या यह न्यायोचित नहीं है कि यदि अफजल ने यह बात कही है तो इस कोण की भी जांच हो कि संसद हमले में एस.टी.एफ. की कोर्इ भूमिका थी या नहीं? एस.टी.एफ. की भी जिम्मेदारी है कि एक निष्पक्ष जांच के उपरांत अपनी भूमिका साफ करे.

यदि हम ऐसा नहीं करते तो संसद हमले की साजिश की तह तक कभी नहीं पहुचेंगे और इस तरह के हमलों का खतरा बना रहेगा. अपनी सुरक्षा के लिए यह सच पता लगाना जरूरी है कि संसद पर हमले की साजिश किसने की?

TAGGED:Afzal guruLet us Now Find Out who Organised the Attack?Liaqat ShahThe Hanging Over
Share This Article
Facebook Copy Link Print
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Telangana Must Order CBI Inquiry into Alleged Murder of Advocate Moizuddin in Waqf Cases
India Waqf Facts
Waqf Registration Ends With Fears of Vanishing Properties
Exclusive India Waqf Facts
The Waqf Act 2025, Supreme Court Interim Ruling, and the Role of Muslims in Protecting Waqf Properties
Waqf Facts
Supreme Court Verdict on the Waqf Act: Justice or Just Temporary Consolation?
India Waqf Facts Young Indian

You Might Also Like

ExclusiveIndiaLead

What Happened After Assam Converted Madrasas into Schools? A Ground Report on Education, Identity, and Community Impact

June 4, 2026
IndiaLeadYoung Indian

Uttarakhand’s New Minority Education Overhaul: End of Madrasa Board, Curriculum Shift, and Rising State Control Explained

May 10, 2026
IndiaLatest News

Iran Consul General Praises India’s Humanity; No Legal or UN Basis for Attack on Iran, Says Dr Ausaf Sayeed

April 15, 2026
EducationIndiaLeadYoung Indian

55 Candidates with Muslim Names in UPSC Final List, Check the List

March 9, 2026
Copyright © 2025
  • Campaign
  • Entertainment
  • Events
  • Literature
  • Mango Man
  • Privacy Policy
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?