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अगर संविधान में रहम नाम की कोई चीज़ है तो ज़ैबुन्निसा को माफी ज़रूर मिलनी चाहिए

Fahmina Hussain for BeyondHeadlines

मुम्बई बम धमाकों के मामले में मशहूर अभिनेता संजय दत्त के बाद अब 71 वर्षीय बुज़ुर्ग महिला ज़ैबुन्निसा अनवर काज़ी की सज़ा को भी माफ कराने का संघर्ष शुरू हो चुका है. फिल्म निर्देशक व सामाजिक कार्यकर्ता महेश भट्ट इनकी मदद के लिए यह कहते हुए मैदान में आए हैं कि अगर संविधान में रहम नाम की कोई चीज़ है तो इस बुज़ुर्ग महिला यानी ज़ैबुन्निसा को माफी ज़रूर मिलनी चाहिए.

BeyondHeadlines से बात करते हुए महेश भट्ट ने बताया कि जब लोग संजय दत्त को हुई सज़ा के लिए माफी मांग सकते हैं तो फिर इस बुजुर्ग महिला को भी माफी मिलनी ही चाहिए. हम मीडिया के लोगों से अनुरोध करेंगे कि इसके लिए भी माफी की गुहार लगाएं.

mahesh_bhatt, (Photo Courtesy: www.indianexpress.com)

स्पष्ट रहे कि 1993 में होने वाले मुम्बई के सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए ज़ैबुन्निसा अनवर काजी को 5 साल कैद और 25 हज़ार रूपये का जुर्माना भरने का ऑर्डर दिया था. इस बुजुर्ग महिला पर धमाकों की साज़िश करने वालों की मदद करने व सारी जानकारी होने के बावजूद साज़िश को छुपाए रखने का आरोप है.

इसी मामले में संजय दत्त को भी 5 साल की सज़ा सुनाई गई है. अहम बात यह है कि संजय दत्त के सज़ा की माफी के लिए जस्टिस काटजू, कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और फिल्म इंडस्ट्रीज के अहम अभिनेता व अभिनेत्रियों ने अपनी आवाज़ बुलंद की है ताकि रहम की अपील पेश करके सज़ा को माफ कराया जा सके. पर किसी को जैबुन्निसा नज़र नहीं आई.

महेश भट्ट ने बताया कि उनसे ज़ैबुन्निसा की बेटी ने मुलाकात करके अपनी समस्याओं को सामने रखा और मदद की अपील की. ज़ैबुन्निसा काफी बुजुर्ग हो चुकी हैं और इन दिनों लगातार बीमार चल रही है. महेश भट्ट ने आगे बताया कि हम उनके साथ हैं. और अदालत के फैसले का एहतराम करते हुए सिर्फ इतना कहना चाहुंगा कि संजय दत्त को माफी मिले या न मिले लेकिन ज़ैबुन्निसा को माफी ज़रूर मिलनी चाहिए, क्योंकि अब उनकी उम्र नहीं है कि वो जेल में ज़िन्दगी गुज़ारें. हम सबको उनके लिए आगे आना चाहिए.

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