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चंद पैसों के लिए प्रसूता को लगाया जा रहा है ‘केटॉमिन’ का इंजेक्शन

Amitabh/ Ajay for BeyondHeadlines

केस न. 1

अस्पताल के एक डॉक्टर मुताबिक एक माह पूर्व रात में एक प्रसूता को देखने के बाद उन्होंने ऑपरेशन थियेटर (ओटी) तैयार करने को कहा. थोड़ी देर बाद जब वो पहुंचे तो ओटी तैयार था लेकिन मरीज़ गायब… पता चला कि किसी के बहकावे में आकर परिजन मरीज़ को प्राईवेट नर्सिंग होम में ले गए हैं.

केस न. 2

7 अप्रैल को मझौलिया के भगेड़वा की संभा देवी ने एमजेके अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया. इसके बाद उसे केटॉमिन का इंजेक्शन दे दिया गया, जिससे वह बेहोश हो गई. फिर दलाल उसे एक झोला छाप डॉक्टर के नर्सिंग होम में ले गए, जहां 15 हज़ार रूपये की उगाही की गई.

केस न. 3

20 अप्रैल की रात में रमपुरवा की कोशिला देवी को प्रसव पीड़ा के बाद अस्पताल लाया गया, जहां दलाल व आशा कार्यकर्ता ने उसे केटॉमिन का इंजेक्शन दे दिया. कोशिला के बेहोश होने के बाद परिजनों को बहका कर गैसलाल चौक के एक नर्सिंग होम में ले जाया गया, जहां परिजनों से 12 हज़ार रूपये वसूले गए.

 चंद पैसों के लिए प्रसूता को लगाया जा रहा है ‘केटॉमिन’ का इंजेक्शन

यह सारे मामले बिहार के पश्चिम चम्पारण ज़िला, बेतिया शहर के हैं. बल्कि ऐसे अनगिनत मामले यहां हर रोज़ हो रहे हैं. जिन्हें जानने के बाद जब हमने तहकीकात की तो कई राज पर से पर्दा उठ गया.

दरअसल, बेतिया के एमजेके अस्पताल में ‘केटॉमिन’ नामक इंजेक्शन से प्रसव के लिए आई महिलाओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है. चंद रूपये के लालच में यह काम कतिपय आशा कार्यकर्ता व झोला छाप डॉक्टरों के नर्सिंग होम के दलाल कर रहे हैं. और इनके शिकार बन रहे हैं गांव के भोले-भाले मरीज़…

कहानी यह है कि रात में जैसे ही गांव की कोई महिला प्रसव के लिए अस्पताल में आती है. नर्सिंग होम के दलाल व उनसे मिलीभगत रखने वाली आशा सक्रिय हो जाती हैं. मरीज़ के परिजनों से मीठी-मीठी बातें कर और दौड़-धूप का नाटक कर अस्पताल के डॉक्टर से उसे दिखाती हैं. जैसे ही डॉक्टर ज़रूरी दवा लिखती हैं, उसकी आड़ में यह मरीज़ को केटॉमिन का इंजेक्शन लगा देतीं हैं. इंजेक्शन के प्रभाव से आधा घंटे में प्रसूता बेहोश होने लगती है और उसकी गर्दन एक तरफ झूल जाती है. फिर मरीज़ के परिजनों को अस्पताल में अच्छी व्यवस्था नहीं होने का डर दिखाया जाता है. जब परिजनों पर उनका जादू पूरी तरह से चल जाता है तो मरीज़ को लेकर नर्सिंग होम पहुंचा दिया जाता है. वहां मरीज़ के परिजनों से दोगुना-तिगुना पैसा वसूल किया जाता है. इस पूरे खेल में कई डॉक्टरों की भी मिलीभगत है. हालांकि अस्पताल उपाधीक्षक ने कहा कि मामले की कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

महिला चिकित्सक डॉ. मंजू जायसवाल  का कहना है कि केटॉमिन का इस्तेमाल मरीज़ों को बेहोश करने के लिए किया जाता है. इसका निर्धारित से अधिक डोज जच्चा-बच्चा के लिए खतरनाक होता है. इससे दोनों की जान भी जा सकती है.

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