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तो क्या अंशुमाला झा के ईलाज-खर्च माफ हो पायेगा!

BeyondHeadlines News Desk

मधुर आवाज़ की मल्लिका अंशुमाला झा दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में जिंदगी से संघर्ष कर रही हैं. अपनी माँ द्वारा दान की हुई किडनी से जीवन-संघर्ष को आगे बढ़ा रही अंशुमाला झा के लंग्स में इंफेक्शन हो गया है.

लगातार बीमारी से जूझने के कारण परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो गया है. सर गंगा राम अस्पताल के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के चेयरमैन डॉ. डी.एस राणा का कहना है कि अंशुमाला की केयरिंग ठीक से की जा रही है.

सबसे अहम मसला यह है कि तकरीबन ढाई लाख रूपये ईलाज का बिल आया है, जिसमें 80 हजार रूपये अंशुमाला के परिवार ने अदा कर दिया है. अभी भी डेढ़ लाख रूपये से ज्यादा का बिल बकाया है. आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके इस परिवार के लिए इतना रूपये का इंतजाम कर पाना बहुत मुश्किल है.

anshu mala jha

अंशुमाला का मामला मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही प्रतिभा-जननी सेवा संस्थान ने अस्पताल प्रशासन से अंशुमाला की ईलाज खर्च को माफ करने के लिए अनुरोध किया है. संस्था के नेशनल को-आर्डिनेटर आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि संस्था ने सर गंगा राम अस्पताल के चेयरमैन (ट्रस्टी) श्री अशोक चन्द्रा से बातचीत की है. उन्होंने सोमवार को इस बावत एक लेटर भेजने को कहा है.

इसी संदर्भ में सर गंगा राम अस्पताल के ही लेडिज वेलफेयर सोसाइटी की सचिव वंदना दत्ता ने भी सहयोग करने का वादा किया है और अंशुमाला के परिवार को सोमवार को मिलने के लिए बुलाया है.

पटना के मगध महिला से होते हुए मिरांडा हाउस तक पहुंचकर अपनी शिक्षा के लिए रास्ता खुद बनाने वाली अंशु माला ने एम.ए और संगीत में पीएचडी की उपाधि हासिल की है. मूल रूप से मधुबनी जिले की अंशु माला ने न सिर्फ मैथिली बल्कि भोजपुरी गायन के क्षेत्र में भी अपना एक अलग मुकाम हासिल किया है.

अपनी मां से संगीत और सुर उन्हें विरासत में मिला पर अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्हों ने इसे भरपूर निखारने का काम किया जिसके लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से उन्हें शास्त्रीय गायन में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए छात्रवृति भी मिल चुकी है. पहले भी वह ऑल इंडिया रेडियो पर नियमित रूप से शास्त्रीय गायन और गजल के कार्यक्रम पेश करती रही हैं.

लेकिन सबसे अहम सवाल यह उठता है कि क्या अस्पताल प्रशासन डेढ़ लाख रूपये की राशि को माफ कर देगा? देखने वाली बात यह है कि जीत पैसे की होती है या मानवता की.

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