BeyondHeadlines News Desk
लखनऊ : मौलाना खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए रिहाई मंच के पांचवे दिन भी जारी रहे धरने से वक्ताओं ने फैजाबाद दंगे में संलिप्त होने के चलते निलंबित चल रहे चार पुलिस अधिकारियों की पुर्नबहाली को सपा सरकार की सांप्रदायिक राजनीति की एक और मिसाल बताया.
धरने को संबोधित करते हुए इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि एक तरफ तो खालिद मुजाहिद के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग के लिए प्रदर्शन करने वाले फैजाबाद के मुस्लिम वकीलों को पीटा जाता है. उनके ऊपर सपा समर्थित बार एसोशिएसन के लोग राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की बात करते हैं. तो वहीं फैजाबाद दंगे में शामिल पुलिस वालों को सरकार बहाल कर रही है. यह पूरा घटनाक्रम साबित करता है कि अयोध्या फैजाबाद में सपा हुकूमत हर वह मुस्लिम विरोधी काम कर देना चाहती है जो भाजपा भी नहीं कर पाई जो साबित करता है कि सपा और भाजपा में गठजोड़ है.
बाराबंकी से आए सूफी उबैदुर्रहमान ने कहा कि खालिद की हत्या में शामिल पुलिस वालों को बचाकर सपा ने साफ कर दिया है कि इसमे उसकी भी भूमिका है. मजहब हमें सिखाता है कि जुल्म और अन्याय के खिलाफ सभी को एकजुट होना चाहिए इसलिए खालिद के इसांफ की लड़ाई हम सबकी लड़ाई है.
बाराबंकी से आए पीस पार्टी के नेता मसूद रियाज ने कहा कि आज हफ्ताभर से ज्यादा समय हो गया पर बाराबंकी में खालिद मुजाहिद के हत्यारों पर दर्ज मुक़दमें में नामजद पुलिस अधिकारी विक्रम सिंह, बृजलाल, मनोज कुमार सिन्हा, चिरंजीव नाथ सिन्हा, एस आनंद को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की जिससे साफ हो जाता है कि सरकार खालिद मुजाहिद के हत्यारों को बचाकर कई राज छिपाना चाहती है.
रिहाई मंच के अध्यक्ष व तारिक खालिद के अधिवक्ता मोहम्मद शुएब ने कहा कि एक तरफ तो सपा हुकूमत मुक़दमा वापसी की बात करती है लेकिन वहीं फैजाबाद में आरोपी बनाए गए खालिद, तारिक, सज्जादुर्रहमान और अख्तर वानी की जमानत का विरोध करने में सबसे अहम भूमिका सपा के फैजाबाद अधिवक्ता संघ के नेता मंसूर इलाही की है. जो सपा के दोहरे चरित्र को उजागर करता है.
वरिष्ठ नाटककर राजेश कुमार जिन्होंने आतंकवाद के मामलों में फंसाए जा रहे निर्दोष मुसलमानों की जिन्दगी को बयां करने वाला नाटक ‘‘ट्रायल ऑफ एरर’’ लिखा है ने कहा कि जिस तरह से आतंकवाद के नाम पर षडयंत्र के तहत मुस्लिम युवकों को सिर्फ जेलों में सड़ने को मजबूर ही किया जा रहा है बल्कि उनकों खत्म भी किया जा रहा है और जिसमें उन एजेसियों की भूमिका है जिन पर सुरक्षा का जिम्मा है यह लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक है. अलग दुनिया के केके वत्स ने कहा कि पूंजीवाद ने पहले आतंकवाद के नाम पर पड़ोसी देशों से रिश्ते खराब किए और अब पड़ोसियों से. पर राज्य को समझ लेना चाहिए की जब बात पड़ोस की हो जाती है तो सच्चाई बहुत करीब होती है और वो सच्चाई अब सबके सामने है कि खालिद मुजाहिद आतंकवादी नहीं और उसकी रिहाई होने वाली थी इसीलिए सरकार ने उसकी हत्या करा दी.
कानपुर से आए एखलाक चिश्ती, अधिवक्ता अशफाक गनी, मुमताज अली, नदीम जावेद, मखबूल अख्तर और खालिद अहमद ने कहा कि खालिद मुजाहिद के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग इंसाफ का तकाजा है, इसलिए अब मुलायम को समझ लेना चाहिए कि मुसलान सिर्फ वोट बैंक नहीं है बल्कि वह जालिम सरकारों को नेस्तानाबूत करने का जज्बा रखता है.
बाराबंकी से रिहाई मंच के धरने के समर्थन में आए एडवोकेट अखलाक, फरहान वारसी, प्रदीप कुमार ने कहा कि खालिद मुजाहिद को फर्जी तरीके से बराबंकी से आतंकवाद का ठप्पा लगया गया था और साजिशन वहीं उसकी हत्या भी हई है. इसलिए हम बराबंकी के लोग इस लड़ाई को तब तक लड़गे जब तक खालिद मुजाहिद के हत्यारे जेल के पीछे नहीं चले जाते.
धरने में तारिक कासमी के चचा फैयाज अहमद ने कहा कि खालिद की हत्या के बाद उन्हें डर है कि तारिक कासमी को भी सरकार मरवा सकती है. उन्होंने तारिक़ की सुरक्षा की गारंटी मांग करने के साथ कहा कि आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट तत्काल जारी की जानी चाहिए.
धरने को सोशलिस्ट फ्रंट के मोहम्मद आफाक, हाजी फहीम, आफताब अहमद, तारिक शफीक, हरेराम मिश्रा, अरसद आजमी, वकारुक हसनैन, शुएब, मुस्लिम संघर्ष मोर्चा के आफताब खान, डा. अनीस, आमिर महफूज, आरिफ नसीम, अंकित चौधरी, आलोक अग्निहोत्री, शाहनवाज आलम और राजीय यादव ने संबोधित किया.
