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2014 के लिये बिक चुके उलेमाओं से जनता चौकन्नी रहे…

BeyondHeadlines News Desk

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के रिहाई मंच (Forum for the Release of Innocent Muslims imprisoned in the name of Terrorism) ने आतंकवाद के नाम पर पकड़े गए बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों पर सपा सरकार द्वारा मुकदमा हटाने का वादा करने के बावजूद मुकदमा न हटाने का आरोप लगाया है. संगठन ने यह भी कहा कि इस पूरे मसले पर सरकार कुछ जेबी मुस्लिम उलेमाओं को आगे करके मुसलमानों में भ्रम पैदा करना चाहती है.

रिहाई मंच के प्रवक्ताओं शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि पिछले हफ्ते भर से सरकार लगातार मीडिया माध्यमों के जरिए आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों पर से मुकदमा हटाने की बात करती रही है लेकिन इस दौरान गोरखपुर, लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, रामपुर समेत कहीं पर भी मुकदमें वापसी के लिए न्यायालय में आज तक कोई प्रार्थना पत्र नहीं दाखिल किया गया जिससे सरकार का झूठ उजागर होता है.

muslim clerics meeting with CM Akhilesh Yadav (Photo Courtesy: twocircles.net)

रिहाई मंच ने कहा कि रामपुर सीआरपीएफ कैंप पर हुए कथित आतंकी हमले में कौसर फारुकी, जंग बहादुर, मोहम्मद शरीफ, गुलाब खान बिहार के सबाउद्दीन और मुंबई के फहीम अंसारी 2008 से जेल में बंद है. सपा सरकार मुकदमें वापसी को लेकर कितनी ईमानदार है इसका अंदाजा मोहम्मद शरीफ के भाई मोहम्मद शाहीन की इस बात से लगाया जा सकता है कि 29 अप्रैल 2013 को रामपुर में सीआरपीएफ कैंप पर हुए कथित हमले के मुकदमें की सुनवाई के दौरान जब न्यायाधीश जीतेन्द्र सिंह ने एसटीएफ पर इन बेगुनाहों का फसाने की बात कहते हुए कहा कि एसटीएफ अपने पक्ष में मजबूत गवाह नहीं पेश कर पा रही है, तब एसटीएफ ने मुकदमा वहां से हटाकर दूसरे न्यायालय में स्थानान्तरित करवा लिया. इससे समझा जा सकता है कि किस तरह बेगुनाहों को जेलों में सड़ाने के लिए सरकार पैंतरेबाजी कर रही है.

रिहाई मंच ने कहा कि इसी तरह 2 मई को लखनऊ न्यायालय में भी जहां पश्चिम बंगाल के पांच आरोपियों मुख्तार हुसैन, मोहम्मद अली अकबर, अर्जीजुर्रहमान, नौशाद हाफिज और नुरुल इस्लाम पर से 2008 में लखनऊ कोर्ट में पेशी के दौरान देश विरोधी नारेबाजी करने के झूठे मुकदमें की वापसी का वादा सपा सरकार ने किया था, उसे भी हटाने के लिए कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया गया है. यह पूरा मामला कुछ इस तरह था कि 2008 में बार एसोसिएशन के आतंकवाद के आरोपियों के मुकदमें न लड़ने के विरुद्व दिए गए संविधान विरोधी फतवे के खिलाफ जब एडवोकेट व रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने जब मुकदमे लड़ने शुरु किए तब सांप्रदायिक वकीलों की भीड़ ने मुहम्मद शुएब व आरोपियों पर जानलेवा हमला किया और पुलिस के गठजोड़ से उन पर देश विरोधी नारे लगाने का झूठा मुकदमा दर्ज किया गया था.

इसी तरह 3 मई 2013 को भी बाराबंकी कोर्ट में भी जहां तारिक और खालिद की झूठी गिरफ्तारी का मुकदमा चल रहा है वहां पर भी मुकदमा वापसी के लिए कोई प्रक्रिया नहीं शुरु की गई. जिससे जाहिर होता है कि पिछले हफ्ते-दस दिन से बेगुनाहों को छोड़ने के नाम पर सरकार सिर्फ मुसलमानों को भ्रमित कर रही है.

कुछ उलेमाओं द्वारा अमरीका में आजम खान के साथ जांच के नाम पर की गई बदसलूकी पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा बॉस्टन में अपनी प्रस्तावित भाषण को स्थगित कर देने पर उन्हें मुसलमानों का हमदर्द बताने पर टिप्पणी करते हुए रिहाई मंच के प्रवक्तओं ने कहा कि यह कथित धर्मगुरु सपा के पे रोल पर काम करते हैं, जिन्हें आज़म खान के साथ हुई बदसलूकी तो नजर आती है लेकिन इसी सरकार द्वारा वादा करने के बावूजद आतंकवाद के नाम पर बंद बेगुनाहों को न छोड़ना, सपा हुकूमत में एक साल में 27 दंगे हो जाना, सपा सरकार द्वारा मुसलमानों का हाथ काटने और मुसलमानों को एक बीमारी कहने वाले भाजपा नेता वरुण गांधी पर से मुकदमें हटाना, प्रवीण तोगडि़या पर अस्थान प्रतापगढ़ में उसकी मौजूदगी में मुस्लिम घरों को नजर-ए-आतिस करवाने के बावजूद उस मुकदमा न दर्ज करवाना और मुस्लिम विरोधी राजनीति के सबसे बड़े केन्द्र इस्राइल का शिववाल यादव द्वारा दौरा करना उनके लिए कोई मसला नहीं होता.

रिहाई मंच के नेताओं ने कहा कि ऐसे कथित धार्मिक उलेमाओं से समाज को चौकन्ना रहना होगा. क्योंकि जैसे-जैसे 2014 का लोकसभा चुनाव करीब आ रहा है वैसे-वैस मुस्लिमों को उत्पीडि़त करने वाली पार्टियों को सेक्युलर बताकर ये कौम को बेचने का काम करेंगे.

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