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सूचना मांगी तो लेक्चरर साहब की हो गई छूट्टी

BeyondHeadlines News Desk

राजस्थान के अलवर ज़िले में एक लेक्चरर साहब को अपने ही कॉलेज से सूचना मांगना काफी महंगा पड़ा. उनके सूचना मांगने भर से उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया.

दरअसल, यह मामला राजकीय राजर्षि महाविद्यालय, अलवर का है. यहां के वनस्पति विज्ञान के लेक्चरर डॉ. जगतपाल सिंह ने सूचना के अधिकार के माध्यम से अपने ही महाविद्यालय से कुछ सूचना चाही थी. लेकिन सूचना के बदले उन्हें जो आदेश प्राप्त हुआ, उसमें लिखा था कि ‘आप महाविद्यालय प्रशासन को सिर्फ और सिर्फ परेशान करने की नियत से बार-बार आरटीआई द्वारा अवांछनीय सूचना मांगने के आदी हैं.’

इसके साथ ही डॉ. जगतपाल सिंह पर कार्यालय के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप भी लगाया गया है. डॉ. जगतपाल सिंह को 21 जून अपराह्न से कार्यमुक्त कर अपनी उपस्थिति आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा निदेशालय को देने को कहा गया है.

इस महाविद्यालय के प्रिसिंपल डॉ. घनश्याम लाल का कहना है कि डॉ. जगतपाल सिंह को प्रायोगिक परीक्षा में आन्तरिक परीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन उन्होंने काम करने से मना कर दिया. यही नहीं, इन पर कार्यालय आदेशों की अवहेलना के कई मामले हैं. आरटीआई तो मामूली बात है.

लेकिन डॉ. जगतपाल सिंह बताते हैं कि मैनें किसी भी आदेश की अवहेलना नहीं किया है. और न ही कोई अवांछित जानकारी नहीं मांगी है. उन्होंने यह भी बताया कि 6 माह पहले कॉलेज में स्मार्ट क्लासेज के लिए प्रोजक्टर खरीदा गया था. इसे एक दिन ही चलाकर बंद करवा दिया गया. ऐसे कई प्रोजक्टर व शैक्षणिक ज़रूरत के सामान इस्तेमाल में नहीं लिए जा रहे हैं. विभागाध्यक्ष से यही जानकारी पूछ ली. वे नाराज़ हो गए और जानकारी नहीं दी. इसलिए इन प्रोजेक्टरों के बारे में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी. यह सब विद्यार्थियों और कॉलेज के हित में ही है तो अवांछित कैसे माना जा सकता है.

स्पष्ट रहे कि इससे पूर्व कई छात्रों को सूचना मांगने के जुर्म में उनके स्कूल व कॉलेज से उन्हें निष्कासित किया जाता रहा है.

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